श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 9 (राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga))

अध्याय 9 · श्लोक 2

राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 34 3 मिनट का पठन 122 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
राजविद्या राजगुह्यं पवित्रमिदमुत्तमम् | प्रत्यक्षावगमं धर्म्यं सुसुखं कर्तुमव्ययम् || २||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

10 पद
राज-विद्या
राजविद्या (श्रेष्ठ विद्या)
राज-गुह्यम्
राजगुह्य (श्रेष्ठ गोपनीय)
पवित्रम्
पवित्र करने वाला
इदम्
यह
उत्तमम्
उत्तम
प्रत्यक्ष-अवगमम्
प्रत्यक्ष अनुभव होने वाला
धर्म्यम्
धर्मयुक्त
सु-सुखम्
अत्यन्त सुखपूर्वक
कर्तुम्
करने को
अव्ययम्
अविनाशी।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

यह (ज्ञान) राजविद्या (विद्याओं का राजा) है, राजगुह्य (रहस्यों का राजा) है, अत्यन्त पवित्र करने वाला है, उत्तम है, प्रत्यक्ष अनुभव में आने वाला है, धर्मयुक्त है, साधन में अत्यन्त सुखद है और अविनाशी है।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

इस श्लोक में भगवान उस ज्ञान की महिमा का वर्णन करते हैं। इसे "राजविद्या" कहा गया है – सभी विद्याओं में श्रेष्ठ। यह ज्ञान न केवल सैद्धांतिक है, बल्कि प्रत्यक्ष अनुभव किया जा सकता है, और इसका पालन करना अत्यंत सुखद है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

भगवान कहते हैं कि यह ज्ञान (भक्तियोग) राजविद्या है, राजगुह्य है, अति पवित्र, उत्तम, प्रत्यक्ष अनुभव करने योग्य, धर्म के अनुकूल, करने में अति सुखद और अविनाशी है।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भक्तियोग सबसे सरल और सुखद साधना है। यह किसी कठोर शारीरिक या मानसिक तपस्या पर निर्भर नहीं है, बल्कि प्रेम और श्रद्धा से किया जाने वाला मार्ग है जो सीधे अनुभव में आता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 9: राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga)
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श्लोक 2/34 6% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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