श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 9 (राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga))

अध्याय 9 · श्लोक 22

राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 34 3 मिनट का पठन 137 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते | तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् || २२||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

11 पद
अनन्याः
अनन्य (अन्य भाव से रहित)
चिन्तयन्तः
चिन्तन करते हुए
माम्
मेरा
ये
जो
जनाः
मनुष्य
पर्युपासते
सब प्रकार से उपासना करते हैं
तेषाम्
उनकी
नित्य-अभियुक्तानाम्
नित्य-युक्त
योग-क्षेमम्
योगक्षेम (प्राप्ति और रक्षा)
वहामि
वहन करता हूँ
अहम्
मैं।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जो मनुष्य अनन्य भाव से मेरा चिन्तन करते हुए मेरी उपासना करते हैं, उन नित्ययुक्त भक्तों का योगक्षेम मैं स्वयं वहन करता हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह अत्यन्त प्रसिद्ध श्लोक है। भगवान वादा करते हैं कि वे अपने अनन्य भक्तों की समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति और उनकी सम्पत्ति की रक्षा स्वयं करते हैं।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

जो मनुष्य अनन्य भाव से मेरा चिन्तन करते हुए नित्य मेरी उपासना करते हैं, उन नित्ययुक्त भक्तों का योग (जो नहीं मिला उसे पहुँचाना) और क्षेम (जो मिला उसकी रक्षा) मैं स्वयं वहन करता हूँ।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

यह भगवान का अमोघ वचन है। जो साधक पूर्ण रूप से भगवान पर निर्भर हो जाता है, भगवान उसकी सभी भौतिक और आध्यात्मिक आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं करते हैं। इससे भक्त निश्चिन्त होकर भक्ति में लग सकता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 9: राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga)
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श्लोक 22/34 65% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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