श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 9 (राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga))

अध्याय 9 · श्लोक 24

राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 34 3 मिनट का पठन 119 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
अहं हि सर्वयज्ञानां भोक्ता च प्रभुरेव च | न तु मामभिजानन्ति तत्त्वेनातश्च्यवन्ति ते || २४||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

16 पद
अहम्
मैं
हि
निश्चय ही
सर्व-यज्ञानाम्
सब यज्ञों का
भोक्ता
भोक्ता
च
और
प्रभु
स्वामी
एव
ही
च
भी
न
नहीं
तु
परन्तु
माम्
मुझे
अभिजानन्ति
जानते हैं
तत्त्वेन
तत्त्व से
अतः
इसलिए
च्यवन्ति
गिर जाते हैं
ते
वे।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

क्योंकि मैं ही सब यज्ञों का भोक्ता और प्रभु हूँ। परन्तु वे मुझे तत्त्व से नहीं जानते, इसलिए (स्वर्ग से) गिर जाते हैं।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

भगवान ही सब यज्ञों के फल के भोक्ता और स्वामी हैं। जो यह नहीं जानते, वे यज्ञों के सीमित फल (स्वर्ग) को भोगकर पुनः गिर जाते हैं।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

मैं ही समस्त यज्ञों का भोक्ता और स्वामी हूँ। परन्तु वे (देवताओं के उपासक) मुझे तत्त्व से नहीं जानते, इसलिए (स्वर्ग से) गिर जाते हैं।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

जब तक साधक को यह नहीं पता कि सब कुछ भगवान का है और वे ही अन्तिम फलदाता हैं, तब तक वह अस्थायी फलों में उलझा रहता है। भगवान का साक्षात् ज्ञान ही मुक्ति देता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 9: राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 24 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 24/34 71% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!