श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 9 (राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga))

अध्याय 9 · श्लोक 26

राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 34 3 मिनट का पठन 126 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति | तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः || २६||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

13 पद
पत्रम्
पत्ता
पुष्पम्
फूल
फलम्
फल
तोयम्
जल
यः
जो
मे
मुझे
भक्त्या
भक्ति से
प्रयच्छति
अर्पित करता है
तत्
उसे
अहम्
मैं
भक्ति-उपहृतम्
भक्तिपूर्वक अर्पित
अश्नामि
स्वीकार करता हूँ
प्रयत-आत्मनः
शुद्ध चित्त वाले (भक्त) का।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

जो कोई भक्ति से मुझे पत्र, पुष्प, फल या जल अर्पण करता है, उस प्रयतचित्त (शुद्ध हृदय) भक्त का वह भक्तिपूर्वक अर्पित किया हुआ पदार्थ मैं स्वीकार करता हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह अत्यन्त महत्वपूर्ण श्लोक है जो भक्ति की सरलता और सर्वसुलभता को दर्शाता है। भगवान को महँगे भोग नहीं, बल्कि प्रेमपूर्वक अर्पित किया हुआ तुच्छ से तुच्छ पदार्थ भी प्रिय है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

जो भक्त मुझे भक्तिपूर्वक पत्ता, फूल, फल या जल अर्पित करता है, उस शुद्ध चित्त वाले भक्त के उस प्रेम-पूर्वक अर्पित किए हुए पदार्थ को मैं स्वीकार करता हूँ।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

भगवान को हमारी सम्पत्ति नहीं, हमारा प्रेम चाहिए। सच्ची भक्ति में महँगे साधनों की आवश्यकता नहीं। सादा जीवन, शुद्ध हृदय और सरल प्रेम ही भगवान को सबसे अधिक प्रिय है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 9: राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga)
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श्लोक 26/34 76% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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