श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 9 (राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga))

अध्याय 9 · श्लोक 28

राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 34 2 मिनट का पठन 105 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
शुभाशुभफलैरेवं मोक्ष्यसे कर्मबन्धनैः | संन्यासयोगयुक्तात्मा विमुक्तो मामुपैष्यसि || २८||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

8 पद
शुभ-अशुभ-फलैः
शुभ और अशुभ फलों से
एवम्
इस प्रकार
मोक्ष्यसे
तू मुक्त हो जाएगा
कर्म-बन्धनैः
कर्मों के बन्धनों से
संन्यास-योग-युक्त-आत्मा
संन्यासयोग से युक्त चित्त वाला
विमुक्तः
मुक्त होकर
माम्
मुझे
उपैष्यसि
प्राप्त होगा।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

इस प्रकार तू शुभाशुभ फलों वाले कर्म-बन्धनों से मुक्त हो जाएगा। संन्यासयोग से युक्त चित्त होकर मुक्त हो तू मुझे प्राप्त होगा।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

सब कर्म भगवान को अर्पित करने से फल-बन्धन नहीं रहता। यही सच्चा संन्यास (त्याग) है। इस प्रकार मुक्त होकर भक्त भगवान को प्राप्त होता है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

इस प्रकार तू शुभ और अशुभ फलों वाले कर्म-बन्धनों से मुक्त हो जाएगा। संन्यासयोग से युक्त चित्त होकर मुक्त होकर तू मुझे प्राप्त होगा।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

कर्मों को ईश्वर को अर्पित करना ही सच्चा संन्यास है। इससे कर्म बन्धन नहीं करते और साधक क्रमशः मोक्ष को प्राप्त होता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 9: राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga)
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श्लोक 28/34 82% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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