श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 9 (राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga))

अध्याय 9 · श्लोक 33

राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 34 2 मिनट का पठन 109 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
किं पुनर्ब्राह्मणाः पुण्या भक्ता राजर्षयस्तथा | अनित्यमसुखं लोकमिमं प्राप्य भजस्व माम् || ३३||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

14 पद
किम्
क्या
पुनः
फिर
ब्राह्मणाः
ब्राह्मण
पुण्याः
पुण्यात्मा
भक्ताः
भक्त
राजर्षयः
राजर्षि
तथा
तथा
अनित्यम्
अनित्य
असुखम्
दुःखमय
लोकम्
लोक
इमम्
इस
प्राप्य
पाकर
भजस्व
भज
माम्
मुझे।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

तो फिर पुण्यात्मा ब्राह्मण और भक्त राजर्षि तो कहना ही क्या? इस अनित्य और दुःखमय संसार को प्राप्त करके तू मेरा भजन कर।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यदि नीच योनि के लोग भी भगवान को प्राप्त हो जाते हैं, तो फिर ब्राह्मण और राजर्षि जैसे उच्च अधिकारियों के लिए तो यह और भी सरल है। अतः अर्जुन को भी भजन करना चाहिए।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

फिर पुण्यात्मा ब्राह्मण और भक्त राजर्षियों की तो बात ही क्या? इस अनित्य और दुःखमय संसार को प्राप्त करके तू मेरा भजन कर।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

मानव-जीवन दुर्लभ और क्षणभंगुर है। इसे पाकर सबसे उत्तम कार्य है भगवान की भक्ति करना। यही जीवन की सार्थकता है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 9: राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga)
वर्तमान में आप श्लोक संख्या 33 का अध्ययन कर रहे हैं।
श्लोक 33/34 97% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
श्लोक कॉपी कर लिया गया है!