श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 9 (राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga))

अध्याय 9 · श्लोक 7

राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga) – मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, विस्तृत हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक व्याख्या।

कुल अध्याय श्लोक: 34 3 मिनट का पठन 149 पठन संपादकीय रूप से परीक्षित
मूल संस्कृत श्लोक (Original Sanskrit Text)
सर्वभूतानि कौन्तेय प्रकृतिं यान्ति मामिकाम् | कल्पक्षये पुनस्तानि कल्पादौ विसृजाम्यहम् || ७||

पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word-by-Word Meanings)

11 पद
सर्व-भूतानि
सम्पूर्ण प्राणी
कौन्तेय
हे कुन्तीपुत्र
प्रकृतिम्
प्रकृति में
यान्ति
चले जाते हैं
मामिकाम्
मेरी
कल्प-क्षये
कल्प के अन्त में
पुनः
फिर
तानि
उन्हें
कल्प-आदौ
कल्प के आरम्भ में
विसृजामि
उत्पन्न करता हूँ
अहम्
मैं।

श्लोक का भावार्थ (Verse Hindi Meaning)

हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning)

हे कौन्तेय! कल्प के अन्त में सब प्राणी मेरी प्रकृति में लीन हो जाते हैं और कल्प के आरम्भ में मैं उन्हें फिर से उत्पन्न करता हूँ।

दार्शनिक व्याख्या एवं गूढ़ रहस्य (Commentary)

यह श्लोक सृष्टि-चक्र का वर्णन करता है। कल्प का अर्थ ब्रह्मा का एक दिन (लगभग 4.32 अरब वर्ष) होता है। उसके अन्त में सृष्टि का संहार होता है, और फिर नई सृष्टि होती है। यह सब भगवान की इच्छा से होता है।

श्लोक का अर्थ / Meaning of the Verse

हे कुन्तीपुत्र अर्जुन! कल्प के अन्त में सम्पूर्ण प्राणी मेरी प्रकृति में लीन हो जाते हैं, और कल्प के आरम्भ में मैं उन्हें फिर से उत्पन्न करता हूँ।

आध्यात्मिक संदेश / Spiritual Message

सृष्टि का निर्माण और विनाश ईश्वर के अधीन है। यह चक्र अनादि काल से चल रहा है। साधक को इससे विरक्त होकर ईश्वर की अविनाशी सत्ता में आश्रय लेना चाहिए, जो इस चक्र से परे है।

गीता जीवन संदेश (Practical Life Application)

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रत्येक श्लोक केवल धार्मिक पाठ नहीं, अपितु जीवन के संघर्षों में सही निर्णय लेने, मन को शांत रखने और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का शाश्वत मार्गदर्शन है।

श्रीराम शास्त्री
संपादक व शोधकर्ता

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के शोधकर्ता। सनातन इतिहास एवं गीता दर्शन पर १०+ वर्षों का अनुसंधान।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ एवं प्राध्यापक। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक एवं शास्त्रसम्मत सत्यापनकर्ता।

अध्याय अवलोकन

अध्याय 9: राज विद्या राज गुह्य योग (Raja Vidya Raja Guhya Yoga)
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श्लोक 7/34 21% पूर्ण
सभी १८ अध्यायों की सूची
ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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