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प्रामाणिक मंदिर विवरण

बाबा बड़े शिव धाम, गोपीगंज - Baba Bade Shiv Dham, Gopiganj: A Confluence of Spiritual Peace and Grandeur

307 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 22 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Shiva आराध्य देव
6 AM - 9 PM दर्शन समय
आरती समय आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Shiva
स्थान / पता Baba Bade Shiv Dham, Gopiganj, Bhadohi, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🕉️ बाबा बड़े शिव धाम, गोपीगंज

आध्यात्मिक शांति और भव्यता का अद्भुत संगम (Baba Bade Shiv Dham, Gopiganj)

उत्तर प्रदेश के गोपीगंज में स्थित एक दिव्य आध्यात्मिक केंद्र

🌟 परिचय: बाबा बड़े शिव धाम का आध्यात्मिक महत्व

उत्तर प्रदेश के गोपीगंज में स्थित बाबा बड़े शिव धाम न केवल एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, बल्कि आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत केंद्र भी है। यह मंदिर अपने भव्य वास्तुकला, शांत वातावरण और हरियाली से घिरे विशाल परिसर के लिए प्रसिद्ध है।

यह स्थान भक्तों और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहाँ का शांत वातावरण, हरे-भरे पेड़-पौधे, और प्राकृतिक सुंदरता मन को मोह लेती है। मंदिर परिसर की सबसे खास विशेषता यहाँ का शांत तालाब है, जो कमल के फूलों और कछुओं से सुशोभित है, जो इस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ा देता है।

प्राचीन काल से जुड़ी किवदंतियों और पौराणिक कथाओं से जुड़ा यह मंदिर गहन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह केवल पूजा का स्थान ही नहीं, बल्कि योग, ध्यान और मंत्रोच्चार जैसी आध्यात्मिक क्रियाओं का भी केंद्र है, जो भक्तों और आगंतुकों को एक समग्र अनुभव प्रदान करता है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

बाबा बड़े शिव धाम उत्तर प्रदेश के गोपीगंज में स्थित है। गोपीगंज भदोही जिले (पूर्व में संत रविदास नगर) का एक प्रमुख शहर है और यह क्षेत्र अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: वाराणसी (काशी) और प्रयागराज (इलाहाबाद) के मध्य में स्थित।
  • रेल मार्ग: गोपीगंज का अपना रेलवे स्टेशन है, जो दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेलमार्ग से जुड़ा है। कई प्रमुख ट्रेनें यहाँ रुकती हैं, जिससे यह आसानी से पहुंचा जा सकता है।
  • सड़क मार्ग: गोपीगंज सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। वाराणसी, इलाहाबाद, भदोही और आस-पास के शहरों से बसें और टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 40-50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
🗺️

गोपीगंज, भदोही, उत्तर प्रदेश

वाराणसी से दूरी: ~45 किमी
प्रयागराज से दूरी: ~100 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

बाबा बड़े शिव धाम का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है। स्थानीय किवदंतियों और मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल सदियों से तपस्या और साधना का केंद्र रहा है। ऐसा माना जाता है कि प्राचीन काल में ऋषि-मुनि इस क्षेत्र में गंगा नदी के समीप तपस्या करते थे और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने यहाँ दर्शन दिए थे।

एक प्रचलित कथा के अनुसार, इस स्थान पर भगवान शिव का एक स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ था। समय के साथ, यह स्थल स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र बन गया और धीरे-धीरे एक भव्य मंदिर के रूप में विकसित हुआ। मंदिर का नाम "बाबा बड़े शिव धाम" इसलिए पड़ा क्योंकि यहाँ के शिवलिंग को विशाल और "बड़े" स्वरूप में पूजा जाता है।

हालाँकि मंदिर के पुनर्निर्माण और विस्तार का कार्य आधुनिक काल में हुआ, लेकिन इसकी जड़ें प्राचीन हैं और यह स्थल सदियों से भक्तों की आस्था का प्रतीक रहा है। मंदिर परिसर में आज भी वह प्राचीन शिवलिंग विद्यमान है, जिसके दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं।

🕉️

"प्राचीन काल से जुड़ी है यहाँ की कथा"

मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती है।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 नंदी जी की भव्य प्रतिमा

बाबा बड़े शिव धाम की वास्तुकला का सबसे प्रमुख आकर्षण यहाँ स्थापित नंदी जी की विशाल और भव्य प्रतिमा है। भगवान शिव के वाहन और परम भक्त नंदी की यह प्रतिमा मंदिर की शोभा बढ़ाती है। इसकी भव्यता और कलात्मक नक्काशी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

🌿 हरा-भरा और स्वच्छ परिसर

मंदिर का विशाल परिसर हरियाली से घिरा हुआ है। यहाँ के सुंदर बगीचे, लॉन और अच्छी तरह से बनाए गए रास्ते एक शांत और स्वच्छ वातावरण प्रदान करते हैं। मंदिर प्रशासन द्वारा साफ-सफाई और परिसर के रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

🪷 कमल तालाब

मंदिर परिसर के भीतर स्थित शांत तालाब इस स्थान की सुंदरता में चार चाँद लगाता है। यह तालाब कमल के फूलों से सुशोभित रहता है, जिससे इसका वातावरण और भी पवित्र और मनमोहक हो जाता है। तालाब में कछुए भी देखे जा सकते हैं, जो बच्चों और आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होते हैं। तालाब के किनारे बैठकर ध्यान लगाने या बस शांति से समय बिताने का अनुभव अद्वितीय है।

🧘 योग, ध्यान और आध्यात्मिक केंद्र

बाबा बड़े शिव धाम केवल पूजा-अर्चना का ही स्थान नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक साधना का एक जीवंत केंद्र भी है। मंदिर के शांत और पवित्र वातावरण में नियमित रूप से योग, ध्यान और मंत्रोच्चार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

🧘‍♂️

योग शिविर

यहाँ नियमित रूप से योग शिविर आयोजित किए जाते हैं, जहाँ अनुभवी योग गुरु शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए विभिन्न आसन और प्राणायाम सिखाते हैं।

🧠

ध्यान साधना

मंदिर का शांत वातावरण ध्यान के लिए अत्यंत उपयुक्त है। नियमित ध्यान सत्र आयोजित किए जाते हैं, जहाँ भक्त मौन बैठकर आत्मचिंतन और गहन ध्यान का अभ्यास करते हैं।

🔊

मंत्रोच्चार

सुबह-शाम मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। "ॐ नमः शिवाय" का सामूहिक जाप परिसर को भक्तिमय और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।

ये आध्यात्मिक क्रियाएं आगंतुकों को एक समग्र अनुभव प्रदान करती हैं, जो उन्हें उनके भीतर की शांति से जोड़ती हैं और उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • मनोकामना पूर्ति: ऐसी मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने और जल चढ़ाने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
  • संतान सुख की प्राप्ति: जो दंपत्ति संतान की कामना करते हैं, वे यहाँ आकर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
  • रोग निवारण: मान्यता है कि यहाँ के पवित्र जल और भगवान शिव के आशीर्वाद से कई असाध्य रोग ठीक हो जाते हैं।
  • सकारात्मक ऊर्जा: मंदिर का शांत और स्वच्छ वातावरण नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और मन को सकारात्मकता से भर देता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: यहाँ नियमित रूप से होने वाले योग और ध्यान कार्यक्रम आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वालों के लिए विशेष लाभकारी हैं।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🕉️

महाशिवरात्रि

यहाँ का सबसे बड़ा और भव्य त्योहार। रात्रि जागरण, भव्य श्रृंगार, जलाभिषेक, और भजन-कीर्तन का आयोजन। दूर-दूर से भक्त यहाँ आते हैं।

🌿

श्रावण मास

सावन के पूरे महीने में यहाँ शिव भक्तों का तांता लगा रहता है। प्रत्येक सोमवार को विशेष पूजा और कांवड़ यात्रा का आयोजन होता है।

🌕

कार्तिक पूर्णिमा

इस दिन विशेष पूजा और दीपदान का आयोजन होता है। मंदिर को भव्य रूप से सजाया जाता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • सीता समाहित स्थल (भदोही): गंगा तट पर स्थित यह स्थल, जहाँ माता सीता धरती में समाई थीं और 110 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा स्थित है। यहाँ से लगभग 30-35 किमी दूर।
  • सेमराध नाथ धाम (भदोही): कुएं में स्थित अनोखा शिव मंदिर, जहाँ प्रकाश पुंज से शिवलिंग प्रकट हुए थे। यहाँ से लगभग 25-30 किमी दूर।
  • वाराणसी (काशी): विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती, और सारनाथ देखने योग्य। लगभग 45 किमी दूर।
  • चुनार किला: मिर्जापुर जिले में स्थित ऐतिहासिक किला, लगभग 60 किमी दूर।
  • रामनगर का किला: वाराणसी के पास स्थित ऐतिहासिक किला और संग्रहालय।
  • भदोही शहर: अपने हथकरघा और कालीन उद्योग के लिए प्रसिद्ध भदोही शहर भी देखने योग्य है।
📌 यात्रा टिप: आप एक ही यात्रा में बाबा बड़े शिव धाम (गोपीगंज), सेमराध नाथ धाम और सीता समाहित स्थल (भदोही) तीनों के दर्शन कर सकते हैं, क्योंकि ये सभी एक-दूसरे से 30-40 किमी के दायरे में स्थित हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

यहाँ यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना और ठंडा रहता है, जिससे मंदिर परिसर में घूमना, तालाब के किनारे बैठना और ध्यान करना सुखद होता है।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • श्रावण मास (जुलाई-अगस्त): यदि आप त्योहारी धूम देखना चाहें तो सावन का महीना सबसे अच्छा है, हालांकि भीड़ अधिक होती है।

📝 यात्रा सुझाव

  • सुबह जल्दी या शाम के समय दर्शन करना अधिक उपयुक्त रहता है।
  • तालाब के किनारे कुछ समय अवश्य बिताएं और कमल के फूलों और कछुओं का आनंद लें।
  • मंदिर परिसर में योग और ध्यान सत्रों के बारे में जानकारी प्राप्त करें और उनमें भाग लें।
  • पूजा सामग्री मंदिर परिसर के बाहर आसानी से मिल जाती है।
  • स्वच्छता बनाए रखने में मंदिर प्रशासन का सहयोग करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: बाबा बड़े शिव धाम कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के गोपीगंज (जिला भदोही) में स्थित है। यह वाराणसी से लगभग 45 किमी और प्रयागराज से लगभग 100 किमी दूर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता इसका शांत और हरा-भरा परिसर, नंदी जी की भव्य प्रतिमा, और कमल के फूलों और कछुओं से सुशोभित तालाब है। यह योग और ध्यान का भी केंद्र है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। महाशिवरात्रि और श्रावण मास में यहाँ विशेष आयोजन होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ योग और ध्यान की सुविधा उपलब्ध है?

उत्तर: हां, मंदिर परिसर में नियमित रूप से योग, ध्यान और मंत्रोच्चार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

प्रश्न 6: क्या यहाँ रुकने की व्यवस्था है?

उत्तर: गोपीगंज में कुछ धर्मशालाएं और होटल उपलब्ध हैं। बेहतर आवास के लिए आप वाराणसी में भी ठहर सकते हैं।

प्रश्न 7: गोपीगंज कैसे पहुंचा जा सकता है?

उत्तर: गोपीगंज रेलवे स्टेशन प्रमुख ट्रेनों से जुड़ा है। सड़क मार्ग द्वारा भी यह वाराणसी और इलाहाबाद से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

📝 बाबा बड़े शिव धाम की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

बाबा बड़े शिव धाम, गोपीगंज एक ऐसा स्थल है जहाँ आध्यात्मिकता, प्रकृति और भव्यता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह केवल एक मंदिर ही नहीं, बल्कि एक ऐसा आध्यात्मिक केंद्र है जहाँ आकर मन को शांति, शरीर को ऊर्जा और आत्मा को संतुष्टि मिलती है।

यहाँ का शांत तालाब, कमल के फूल, कछुए, और हरियाली से भरा परिसर मन को मोह लेता है। नंदी जी की भव्य प्रतिमा और नियमित रूप से होने वाले योग-ध्यान के कार्यक्रम इसे एक अद्वितीय स्थान बनाते हैं। चाहे आप भगवान शिव के भक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या बस एक शांतिप्रिय पर्यटक, यह स्थान आपको एक समग्र और अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

वाराणसी और प्रयागराज के मध्य स्थित यह धाम उन सभी के लिए एक आदर्श यात्रा स्थल है जो भीड़-भाड़ से दूर, एक शांत और पवित्र वातावरण में भगवान शिव के दर्शन करना चाहते हैं और अपने आंतरिक स्व से जुड़ना चाहते हैं।

🙏 ॐ नमः शिवाय ।। हर हर महादेव ।।

🕉️ बाबा बड़े शिव धाम, गोपीगंज
आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत केंद्र

देवादिदेव महादेव के अन्य १२ ज्योतिर्लिंगों और शिव आराधना मंत्रों के लिए शिव पुराण का पाठ अवश्य करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 22 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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