आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
प्रामाणिक मंदिर विवरण

भारद्वाज आश्रम, बालसन चौराहा, प्रयागराज - Bhardwaj Ashram, Balsan Chauraha, Prayagraj: A Sacred Hermitage of Sage Bharadwaj

410 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 22 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Bharadwaj आराध्य देव
6 AM - 9 PM दर्शन समय
आरती समय आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Bharadwaj
स्थान / पता Bhardwaj Ashram, Balsan Chauraha, Prayagraj, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🕉️ भारद्वाज आश्रम, बालसन चौराहा, प्रयागराज

महर्षि भारद्वाज की तपोभूमि – जहाँ स्वयं प्रभु श्रीराम ने दिए थे दर्शन (Bhardwaj Ashram, Prayagraj: Where Lord Rama once visited)

प्रयागराज के बालसन चौराहा पर स्थित प्राचीन आश्रम, जो वेदों, रामायण और आयुर्वेद से जुड़ा है

🌟 परिचय: भारद्वाज आश्रम का ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व

प्रयागराज (इलाहाबाद) के हृदय स्थल बालसन चौराहा पर स्थित भारद्वाज आश्रम एक प्राचीन तपोस्थली है, जहाँ महर्षि भारद्वाज ने कठोर तपस्या की थी। यह स्थल न केवल वैदिक ऋषियों की साधना भूमि है, बल्कि रामायण काल में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी के आगमन से भी पावन हुआ।

यह आश्रम आज भी अपने शांत वातावरण, प्राचीन वट वृक्ष, पवित्र कुएँ और ध्यान केंद्र के लिए जाना जाता है। यहाँ की हरियाली, ऋषि‑मुनियों की तपस्या की गूंज और त्रिवेणी संगम की निकटता इसे एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है।

भारद्वाज आश्रम केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह आयुर्वेद, योग और वेदों के अध्ययन का भी एक प्राचीन केंद्र रहा है। महर्षि भारद्वाज को आयुर्वेद के जनकों में से एक माना जाता है, और उनके ग्रंथ 'भारद्वाज संहिता' का आयुर्वेदिक चिकित्सा में बड़ा योगदान है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

भारद्वाज आश्रम उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में बालसन चौराहा के पास स्थित है। यह स्थान संगम क्षेत्र से लगभग 5–6 किलोमीटर की दूरी पर है और शहर के मुख्य मार्गों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: प्रयागराज स्वयं एक प्रमुख नगर है। वाराणसी, लखनऊ और कानपुर से सड़क एवं रेल मार्ग द्वारा सीधा संपर्क है।
  • रेल मार्ग: प्रयागराज जंक्शन (स्टेशन कोड: PRYJ) और प्रयाग (इलाहाबाद) जंक्शन (ALD) देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़े हैं। आश्रम स्टेशन से लगभग 5–6 किमी दूर है, टैक्सी या ऑटो से 15–20 मिनट में पहुँचा जा सकता है।
  • सड़क मार्ग: प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्गों (NH 19, NH 30) से जुड़ा है। बस स्टैंड से आश्रम लगभग 6 किमी दूर है।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज हवाई अड्डा (IXD) है, जो शहर से लगभग 12–14 किमी दूर है। वहाँ से टैक्सी/ऑटो द्वारा आश्रम आसानी से पहुँचा जा सकता है।
🗺️

बालसन चौराहा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

त्रिवेणी संगम से दूरी: ~5 किमी
प्रयागराज जंक्शन से दूरी: ~6 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारद्वाज आश्रम का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है। जब प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान प्रयागराज पहुँचे, तो उन्होंने सबसे पहले महर्षि भारद्वाज के आश्रम में आश्रय लिया। ऋषि भारद्वाज ने उनका अतिथि सत्कार किया और भविष्य की यात्रा के लिए मार्गदर्शन दिया। यह घटना वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकाण्ड में विस्तार से वर्णित है।

कहा जाता है कि महर्षि भारद्वाज ने इसी स्थान पर कठोर तपस्या करके वेदों और आयुर्वेद का गहन ज्ञान प्राप्त किया था। उनके शिष्य परंपरा में कई महान ऋषि हुए। आश्रम के प्रांगण में आज भी एक प्राचीन वट वृक्ष है, जिसके नीचे महर्षि ने तप किया था।

कालांतर में यह स्थान साधकों और संतों की तपोभूमि बना रहा। मुगल काल और ब्रिटिश काल में भी यह आश्रम अपनी धार्मिक पहचान बनाए रखने में सफल रहा। आज यहाँ एक आधुनिक मंदिर भी बन चुका है, जहाँ महर्षि भारद्वाज, भगवान राम और हनुमान जी की मूर्तियाँ विराजमान हैं।

🕊️

'जहाँ प्रभु राम ने लिया था आश्रय, वही भारद्वाज आश्रम'

मान्यता: यहाँ सच्चे मन से भगवान राम और ऋषि भारद्वाज की आराधना करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख‑शांति आती है।

🏛️ आश्रम की मुख्य विशेषताएं और दर्शनीय स्थल

🌳 प्राचीन वट वृक्ष और तपोस्थली

आश्रम के मध्य स्थित वट वृक्ष सैकड़ों वर्ष पुराना है। ऐसी मान्यता है कि महर्षि भारद्वाज ने इसी वृक्ष के नीचे तपस्या की थी। वृक्ष के चारों ओर एक वेदिका बनी है, जहाँ भक्त पूजा‑अर्चना करते हैं। यह स्थान ध्यान और मौन साधना के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

🙏 मंदिर परिसर और मूर्तियाँ

आश्रम परिसर में एक भव्य मंदिर है, जिसमें महर्षि भारद्वाज, भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की सुंदर प्रतिमाएँ स्थापित हैं। यहाँ नियमित रूप से भजन‑कीर्तन, रामायण पाठ और वैदिक अनुष्ठान होते हैं।

💧 पवित्र कुआँ (भारद्वाज कुंड)

आश्रम में एक प्राचीन कुआँ है, जिसे भारद्वाज कुंड कहा जाता है। मान्यता है कि यहाँ का जल महर्षि की तपस्या से पवित्र हुआ था। श्रद्धालु यहाँ स्नान करते हैं और जल ग्रहण करते हैं।

📚 वैदिक पाठशाला और आयुर्वेद केंद्र

आश्रम परिसर में एक वैदिक पाठशाला संचालित होती है, जहाँ बच्चों और वयस्कों को वेद, उपनिषद और संस्कृत सिखाई जाती है। साथ ही, महर्षि भारद्वाज की आयुर्वेद परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यहाँ एक आयुर्वेदिक औषधालय भी है, जहाँ निःशुल्क या नाममात्र शुल्क पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है।

🧘 योग, ध्यान और आध्यात्मिक केंद्र

भारद्वाज आश्रम केवल एक दर्शन स्थल नहीं है, बल्कि यह योग और ध्यान का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ का शांत वातावरण और सात्विक ऊर्जा साधकों को गहन ध्यान में सहायता करती है।

🧘‍♂️

योग शिविर

प्रतिदिन सुबह योग कक्षाएँ आयोजित की जाती हैं। विशेष अवसरों पर निःशुल्क योग शिविर और प्राणायाम सत्र लगाए जाते हैं।

🧠

ध्यान साधना

वट वृक्ष के नीचे और मंदिर के पीछे शांत स्थान पर साधक मौन ध्यान कर सकते हैं। हर रविवार को सामूहिक ध्यान सत्र आयोजित किया जाता है।

🔊

वेद मंत्रोच्चार

शाम के समय वैदिक मंत्रों का पाठ और भजन संध्या होती है। 'ॐ भूर्भुवः स्वः' और राम रक्षा स्तोत्र का नियमित जाप किया जाता है।

ये सभी गतिविधियाँ आगंतुकों को आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • रामायण से जुड़ाव: भगवान राम के पदचिह्नों से पवित्र यह स्थान राम भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • विद्या की प्राप्ति: महर्षि भारद्वाज विद्या के देवता माने जाते हैं। यहाँ पूजा करने से विद्या और बुद्धि में वृद्धि होती है।
  • आयुर्वेदिक चिकित्सा: आश्रम के औषधालय में प्राकृतिक चिकित्सा उपलब्ध है, जो शारीरिक और मानसिक रोगों में लाभकारी है।
  • साधना स्थली: यहाँ थोड़े समय का ध्यान भी गहरी एकाग्रता प्रदान करता है।
  • पितृ तर्पण: कुछ विद्वानों के अनुसार यहाँ पिंडदान और तर्पण का भी विशेष महत्व है, क्योंकि आश्रम संगम के समीप है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🎭

रामनवमी

चैत्र मास में रामनवमी के दिन भव्य शोभायात्रा, रामायण पाठ और भंडारे का आयोजन होता है।

📖

गुरु पूर्णिमा

ऋषि परंपरा के सम्मान में गुरु पूर्णिमा पर विशेष अनुष्ठान और सत्संग का आयोजन किया जाता है।

🪔

दीपावली एवं संगम परिक्रमा

दीपावली पर मंदिर को दीपों से सजाया जाता है। संगम परिक्रमा के दौरान भारद्वाज आश्रम एक प्रमुख पड़ाव होता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • त्रिवेणी संगम: गंगा, यमुना और सरस्वती का पवित्र संगम, लगभग 5 किमी दूर। यहाँ माघ मेले का विशेष महत्व है।
  • अल्फ्रेड पार्क (चंद्रशेखर आज़ाद पार्क): प्रयागराज का ऐतिहासिक पार्क, जहाँ शहीदों की यादें हैं।
  • इलाहाबाद किला: अशोक स्तंभ और अक्षय वट सहित प्राचीन किला, संगम के किनारे स्थित।
  • हनुमान मंदिर (संगम के पास): लेटे हुए हनुमान जी का विश्व प्रसिद्ध मंदिर।
  • आनंद भवन: नेहरू‑गांधी परिवार का ऐतिहासिक घर, अब एक संग्रहालय।
  • थॉमस चर्च और पुरानी पुलिस लाइन: ब्रिटिश काल की वास्तुकला के नमूने।
  • शूलटैंक पार्क: प्रयागराज का मनोरंजन पार्क, परिवार के साथ घूमने लायक।
📌 यात्रा टिप: भारद्वाज आश्रम के दर्शन के बाद आप संगम स्नान, अक्षय वट और हनुमान मंदिर की यात्रा एक ही दिन में कर सकते हैं। सभी स्थान 5–7 किमी के दायरे में हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

प्रयागराज की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है। माघ मेला (जनवरी‑फरवरी) के समय यहाँ विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं, लेकिन भीड़ अधिक होती है।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर‑फरवरी): आदर्श समय।
  • माघ मेला / कुंभ मेला: यदि आप मेले का अनुभव लेना चाहें, तो यह समय अद्वितीय है, लेकिन यात्रा की योजना पहले से बना लें।

📝 यात्रा सुझाव

  • सुबह जल्दी (6–8 बजे) या शाम (4–6 बजे) दर्शन करना अधिक सुखद रहता है।
  • वट वृक्ष के नीचे कुछ समय बैठकर ध्यान करें।
  • आश्रम के आयुर्वेदिक औषधालय के बारे में जानकारी लें और यदि आवश्यक हो तो परामर्श लें।
  • पूजा सामग्री (फूल, नारियल, रोली) मंदिर परिसर के बाहर उपलब्ध है।
  • स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: भारद्वाज आश्रम कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर के बालसन चौराहा पर स्थित है। संगम से लगभग 5 किलोमीटर दूर है।

प्रश्न 2: क्या यहाँ प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: नहीं, आश्रम में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है। दान स्वैच्छिक है।

प्रश्न 3: यहाँ का इतिहास क्या है?

उत्तर: यह महर्षि भारद्वाज की तपोस्थली है। रामायण काल में भगवान श्रीराम ने यहाँ आश्रय लिया था।

प्रश्न 4: क्या यहाँ भोजन और आवास की सुविधा है?

उत्तर: आश्रम में कभी‑कभी भंडारे का आयोजन होता है, पर स्थायी भोजनालय नहीं है। आवास के लिए प्रयागराज में कई धर्मशालाएँ और होटल उपलब्ध हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ योग या ध्यान में भाग ले सकते हैं?

उत्तर: हाँ, प्रतिदिन सुबह योग कक्षाएँ और साप्ताहिक ध्यान सत्र आयोजित किए जाते हैं। सभी के लिए निःशुल्क हैं।

प्रश्न 6: गुरु पूर्णिमा पर कोई विशेष कार्यक्रम होता है?

उत्तर: हाँ, गुरु पूर्णिमा पर विशेष पूजा, सत्संग और वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है।

प्रश्न 7: प्रयागराज कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: रेल, सड़क और वायु मार्ग से प्रयागराज अच्छी तरह जुड़ा है। निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज हवाई अड्डा (IXD) है।

📝 भारद्वाज आश्रम की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

भारद्वाज आश्रम सिर्फ एक दर्शन स्थल नहीं, बल्कि वैदिक संस्कृति, योग और आयुर्वेद का जीवंत उदाहरण है। यहाँ की शांति, प्राचीनता और रामायण से जुड़ाव हर यात्री को अद्वितीय अनुभव प्रदान करता है।

बालसन चौराहा पर स्थित यह आश्रम प्रयागराज के प्रमुख धार्मिक सर्किट का अभिन्न अंग है। संगम स्नान के पश्चात यहाँ आकर वट वृक्ष के नीचे ध्यान लगाने, महर्षि भारद्वाज की पूजा करने और आयुर्वेदिक ज्ञान का लाभ लेने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

चाहे आप आध्यात्मिक साधक हों, रामायण के अनुरागी हों, या प्रयागराज के ऐतिहासिक धरोहरों को जानने के इच्छुक, भारद्वाज आश्रम आपको एक गहन और अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

🙏 जय श्री राम ।। हरि ॐ तत् सत् ।।

🕉️ भारद्वाज आश्रम, बालसन चौराहा, प्रयागराज
वैदिक ऋषि की तपोभूमि – रामायण की अमिट छाप

सनातन संस्कृति के विभिन्न त्यौहारों, व्रत और व्रत कथाओं की सटीक जानकारी के लिए हमारे सनातन कैलेंडर २०२६ का अवलोकन करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 22 Mar 2026

दर्शनार्थियों के अनुभव (0)

अपना दर्शन अनुभव व समीक्षा साझा करें

विवरण कॉपी कर लिया गया है!
(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { if (body.contains(typingIndicator)) { body.removeChild(typingIndicator); } const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } } if (document.readyState === 'loading') { document.addEventListener('DOMContentLoaded', initChatbot); } else { initChatbot(); } })(); �थ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } let voiceCounter = 0; window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; utterance.onend = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { body.removeChild(typingIndicator); const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } });