आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
प्रामाणिक मंदिर विवरण

चकवा महावीर मंदिर – भदोही: शक्ति, भक्ति और आस्था का प्रमुख केंद्र | Chakwa Mahavir Mandir Bhadohi: A Sacred Abode of Devotion and Power

313 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 23 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Mahavir आराध्य देव
6 AM - 9 PM दर्शन समय
आरती समय आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Mahavir
स्थान / पता Chakwa Mahavir Mandir, Chakwa, Bhadohi, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 चकवा महावीर मंदिर – भदोही

शक्ति, साहस और भक्ति का अद्वितीय धाम (Chakwa Mahavir Mandir, Bhadohi)

भदोही जिले के चकवा गाँव में स्थित एक प्राचीन एवं प्रसिद्ध हनुमान मंदिर

🌟 परिचय: चकवा महावीर मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

भदोही जिले के चकवा गाँव में स्थित चकवा महावीर मंदिर भगवान हनुमान (महावीर) को समर्पित एक अत्यंत पवित्र एवं शक्तिपीठ है। यह मंदिर न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए भी आस्था, शक्ति और साहस का प्रमुख केंद्र है।

यहाँ की वास्तुकला, शांत वातावरण और नियमित रूप से होने वाली आरती, हनुमान चालीसा का पाठ, भजन-कीर्तन तथा प्रवचन मन को शांति और आत्मबल से भर देते हैं। विशेष रूप से हनुमान जयंती, मंगलवार और शनिवार के दिन यहाँ भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है।

मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, बुरी शक्तियों से रक्षा होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। यह स्थान अपने आप में एक तपोभूमि के समान है, जहाँ भगवान हनुमान की कृपा साक्षात् अनुभव की जा सकती है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

चकवा महावीर मंदिर उत्तर प्रदेश के भदोही जिले (संत रविदास नगर) के चकवा गाँव में स्थित है। भदोही अपनी कालीन उद्योग और धार्मिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, और यह मंदिर जिले का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: वाराणसी (काशी) – लगभग 45 किमी, प्रयागराज – लगभग 100 किमी
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन भदोही रेलवे स्टेशन (BDOY) है, जो कई एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों से जुड़ा है। वाराणसी जंक्शन (BSB) लगभग 45 किमी दूर है।
  • सड़क मार्ग: चकवा सड़क मार्ग द्वारा भदोही, वाराणसी, प्रयागराज और आसपास के शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन की बसें और निजी टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 50 किमी की दूरी पर स्थित है।
🗺️

चकवा, भदोही, उत्तर प्रदेश

भदोही से दूरी: ~12 किमी
वाराणसी से दूरी: ~45 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

चकवा महावीर मंदिर का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल कभी घने जंगलों से घिरा हुआ था जहाँ संत-महात्मा तपस्या किया करते थे। एक प्राचीन कथा के अनुसार, एक महान संत को यहाँ भगवान हनुमान ने स्वप्न में दर्शन दिए और उनकी एक अद्भुत मूर्ति स्थापित करने का आदेश दिया। संत ने यहाँ खुदाई करवाई तो एक दिव्य एवं चमत्कारी प्रतिमा प्राप्त हुई, जो आज मंदिर के गर्भगृह में विराजमान है।

यह मूर्ति भगवान हनुमान को "महावीर" स्वरूप में दर्शाती है, जो अत्यंत प्रभावशाली और भक्तों के हृदय में आस्था जगाने वाली है। समय के साथ, स्थानीय लोगों और राजाओं के सहयोग से इस मंदिर का विस्तार हुआ और यह क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया।

यहाँ पर आज भी प्राचीन काल की कई धार्मिक परंपराएँ निभाई जाती हैं, जो इसकी गौरवशाली विरासत को दर्शाती हैं।

🕊️

"भगवान हनुमान की यह मूर्ति अत्यंत प्राचीन एवं चमत्कारी मानी जाती है।"

मान्यता: यहाँ आकर सच्चे मन से हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोबल बढ़ता है।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 मनमोहक मूर्तियाँ और नक्काशी

चकवा महावीर मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में निर्मित है, जिसमें सुंदर नक्काशी, भव्य गुंबद और चित्रकारी देखने को मिलती है। गर्भगृह में भगवान हनुमान की भव्य मूर्ति विराजमान हैं, जिनके साथ भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी की भी प्रतिमाएँ स्थापित हैं।

🎨 भित्ति चित्र और सजावट

मंदिर की दीवारों पर रामायण के प्रसंगों और हनुमान जी के जीवन की लीलाओं को दर्शाने वाले रंगीन चित्र बने हैं, जो भक्तों को भक्ति-भावना से सराबोर कर देते हैं। विशेष अवसरों पर मंदिर को फूलों और विद्युत सज्जा से सजाया जाता है।

🌳 शांत परिसर और वाटिका

मंदिर का विशाल प्रांगण हरियाली से परिपूर्ण है। यहाँ एक सुंदर वाटिका है, जहाँ भक्त बैठकर ध्यान, भजन और रामायण पाठ का आनंद ले सकते हैं। परिसर में स्थित पीपल का वृक्ष विशेष आकर्षण का केंद्र है, जहाँ मान्यताओं के अनुसार भगवान हनुमान का वास माना जाता है।

🧘 भक्ति, योग और सत्संग का केंद्र

चकवा महावीर मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

🎵

हनुमान चालीसा & भजन-कीर्तन

प्रतिदिन शाम को हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु सामूहिक रूप से भाग लेते हैं।

📖

रामायण एवं भागवत कथा

वर्ष में कई बार रामायण पाठ और भागवत कथा का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता करते हैं।

🧘‍♀️

योग और ध्यान

प्रातःकाल मंदिर परिसर में योग और ध्यान शिविर लगाए जाते हैं, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

ये सभी क्रियाएँ भक्तों को आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं, जिससे उनका जीवन आनंदमय हो जाता है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • रोग निवारण: कई भक्तों ने अनुभव किया है कि यहाँ पूजा-अर्चना करने और चरणामृत ग्रहण करने से असाध्य रोगों में भी राहत मिलती है।
  • बाधाओं का नाश: मान्यता है कि यहाँ विधि-विधान से पूजा करने से सभी प्रकार की बाधाएँ, शनि दोष और काल सर्प दोष दूर होते हैं।
  • शक्ति और साहस की प्राप्ति: सच्चे मन से महावीर की आराधना करने से भक्तों को शारीरिक और मानसिक शक्ति मिलती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: यहाँ नियमित सत्संग और भजन-कीर्तन से भक्ति में रुचि बढ़ती है और आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • नेगेटिव एनर्जी से मुक्ति: मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक प्रभावों को दूर करती है और मन को शुद्ध करती है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🎂

हनुमान जयंती

भगवान हनुमान के जन्मोत्सव पर यहाँ भव्य झाँकियाँ, रात्रि जागरण, सुंदरकांड का पाठ और महाभोग का आयोजन होता है। हजारों भक्त यहाँ दर्शन करने आते हैं।

🌸

राम नवमी

भगवान श्री राम के प्राकट्योत्सव पर मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है। इस दिन विशेष अभिषेक और श्रृंगार किया जाता है।

🪔

दीपावली (शनिवार विशेष)

दीपावली के दिन मंदिर में भव्य आरती और दीपदान का आयोजन होता है।

📿

प्रति मंगलवार और शनिवार

ये दिन भगवान हनुमान को समर्पित होते हैं। इन दिनों विशेष पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ और भंडारे का आयोजन किया जाता है।

🏮

श्रीरामचरितमानस पाठ

वर्ष में एक बार सात दिवसीय श्रीरामचरितमानस पाठ का आयोजन किया जाता है, जो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • भदोही शहर: अपने हस्तनिर्मित कालीनों और गुलाबी नगर के रूप में प्रसिद्ध। (लगभग 12 किमी)
  • गोपीगंज, वाराणसी: प्राचीन शिव मंदिर और गौरीशंकर मंदिर के लिए प्रसिद्ध। (लगभग 35 किमी)
  • सारनाथ: बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र, अशोक स्तंभ और संग्रहालय। (लगभग 50 किमी)
  • वाराणसी (काशी): विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, संगम। (लगभग 45 किमी)
  • रामनगर किला: वाराणसी के समीप स्थित ऐतिहासिक दुर्ग। (लगभग 50 किमी)
📌 यात्रा टिप: वाराणसी की यात्रा के दौरान आप चकवा महावीर मंदिर, भदोही की यात्रा भी आसानी से कर सकते हैं। यहाँ से वाराणसी, सारनाथ और भदोही के अन्य दर्शनीय स्थल एक ही दिन में देखे जा सकते हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

चकवा में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे मंदिर परिसर में भ्रमण और धार्मिक क्रियाएँ सुखद रहती हैं।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • हनुमान जयंती (मार्च-अप्रैल): यदि आप त्योहारी धूम देखना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है।
  • शाम की आरती (लगभग 7:00 बजे) में शामिल हों, यह अत्यंत मनमोहक होती है।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजनालय उपलब्ध हैं।
  • फोटोग्राफी की अनुमति के लिए मंदिर प्रशासन से अनुमति लें।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का "बूंदी के लड्डू" प्रसिद्ध है, अवश्य ग्रहण करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: चकवा महावीर मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के चकवा गाँव में स्थित है। भदोही शहर से लगभग 12 किलोमीटर और वाराणसी से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता यहाँ की प्राचीन हनुमान मूर्ति, भव्य वास्तुकला, और यहाँ आयोजित होने वाले हनुमान चालीसा पाठ, सुंदरकांड एवं भागवत कथा हैं। साथ ही, यह स्थान अपनी शांत वाटिका और भक्ति-भावना के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। हनुमान जयंती और मंगलवार/शनिवार के दिन यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: चकवा में कुछ धर्मशालाएँ और निजी होटल उपलब्ध हैं। बेहतर आवास के लिए भदोही या वाराणसी जाना अधिक सुविधाजनक रहता है। मंदिर परिसर के पास शुद्ध शाकाहारी भोजन की दुकानें मौजूद हैं।

प्रश्न 6: चकवा कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: निकटतम रेलवे स्टेशन भदोही (BDOY) है, जो कई ट्रेनों से जुड़ा है। सड़क मार्ग से भदोही, वाराणसी, प्रयागराज से बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप विशेष पूजा, अभिषेक, हनुमान चालीसा पाठ या सुंदरकांड का आयोजन करवा सकते हैं।

📝 चकवा महावीर मंदिर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

चकवा महावीर मंदिर, भदोही का एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ शक्ति, भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्तों को भगवान हनुमान की कृपा से आत्मबल और साहस प्रदान करता है।

यहाँ की भव्य मूर्तियाँ, मनमोहक आरतियाँ, और नियमित रूप से होने वाले सत्संग एवं भजन-कीर्तन हर किसी को भक्ति-रस में डुबो देते हैं। चाहे आप सच्चे भक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

भदोही की पवित्र भूमि पर स्थित यह मंदिर उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो भगवान हनुमान की अनन्य भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना रखते हैं।

🙏 जय श्री राम ।। जय हनुमान ।।

🕊️ चकवा महावीर मंदिर – भदोही
शक्ति, भक्ति और साहस का साक्षात् धाम

सनातन संस्कृति के विभिन्न त्यौहारों, व्रत और व्रत कथाओं की सटीक जानकारी के लिए हमारे सनातन कैलेंडर २०२६ का अवलोकन करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 23 Mar 2026

दर्शनार्थियों के अनुभव (0)

अपना दर्शन अनुभव व समीक्षा साझा करें

विवरण कॉपी कर लिया गया है!
(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { if (body.contains(typingIndicator)) { body.removeChild(typingIndicator); } const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } } if (document.readyState === 'loading') { document.addEventListener('DOMContentLoaded', initChatbot); } else { initChatbot(); } })(); �थ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } let voiceCounter = 0; window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; utterance.onend = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { body.removeChild(typingIndicator); const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } });