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प्रामाणिक मंदिर विवरण

प्राचीन शिव मंदिर – ज्ञानपुर: आस्था, इतिहास और भोलेनाथ की अमर लीला का पवित्र धाम | Prachin Shiv Mandir Gyanpur: A Sacred Abode of Lord Shiva

315 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 23 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Shiva आराध्य देव
6 AM - 9 PM दर्शन समय
आरती समय आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Shiva
स्थान / पता Prachin Shiv Mandir, Gyanpur, Bhadohi, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 प्राचीन शिव मंदिर – ज्ञानपुर

भोलेनाथ की कृपा और प्राचीन गौरव का साक्षात् धाम (Prachin Shiv Mandir, Gyanpur)

ज्ञानपुर, भदोही (संत रविदास नगर) में स्थित एक अति प्राचीन एवं चमत्कारी शिव मंदिर

🌟 परिचय: प्राचीन शिव मंदिर, ज्ञानपुर का आध्यात्मिक महत्व

उत्तर प्रदेश के भदोही (संत रविदास नगर) जिले के ऐतिहासिक नगर ज्ञानपुर में स्थित प्राचीन शिव मंदिर भगवान शंकर को समर्पित एक अत्यंत पवित्र, प्रतिष्ठित और चमत्कारी धार्मिक स्थल है। यह मंदिर न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए भी आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है।

यहाँ की प्राचीन वास्तुकला, शिव भक्ति से ओतप्रोत वातावरण, और नियमित रूप से होने वाली रुद्राभिषेक, जलाभिषेक तथा भजन-कीर्तन मन को शांति और आनंद से भर देते हैं। विशेष रूप से श्रावण मास, महाशिवरात्रि, और सावन सोमवार के अवसर पर यहाँ आयोजित होने वाले उत्सव अद्वितीय होते हैं, जब हजारों की संख्या में भक्त जल चढ़ाने आते हैं।

मान्यता है कि इस प्राचीन शिवलिंग पर सच्चे मन से जल चढ़ाने और पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, रोगों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह स्थान अपने आप में एक तपोभूमि के समान है, जहाँ भगवान शंकर की अमर लीला साक्षात् अनुभव की जा सकती है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

प्राचीन शिव मंदिर उत्तर प्रदेश के भदोही (संत रविदास नगर) जिले के ज्ञानपुर नगर में स्थित है। ज्ञानपुर एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र है, जो प्राचीन काल से ही धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: वाराणसी (बनारस) – लगभग 55 किमी, प्रयागराज (इलाहाबाद) – लगभग 120 किमी
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन ज्ञानपुर रोड (जीएनपी) है, जो कई पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों से जुड़ा है। प्रमुख ट्रेनों के लिए वाराणसी जंक्शन (बीएसबी) और भदोही स्टेशन भी निकट हैं।
  • सड़क मार्ग: ज्ञानपुर सड़क मार्ग द्वारा वाराणसी, प्रयागराज, जौनपुर, और आसपास के शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन की बसें और निजी टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (VNS) है, जो लगभग 65 किमी की दूरी पर स्थित है।
🗺️

ज्ञानपुर, भदोही, उत्तर प्रदेश

वाराणसी से दूरी: ~55 किमी
प्रयागराज से दूरी: ~120 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ज्ञानपुर का यह प्राचीन शिव मंदिर सैकड़ों वर्षों से भक्तों की आस्था का केंद्र रहा है। स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास पौराणिक काल से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि यह स्थल कभी महर्षियों और ऋषियों की तपोस्थली रहा है। एक मान्यता के अनुसार, यहाँ पर स्वयं भगवान शंकर ने किसी महान संत को दर्शन देकर इस स्थान पर शिवलिंग की स्थापना का आदेश दिया था।

यहाँ स्थापित शिवलिंग अत्यंत प्राचीन और स्वयंभू (प्राकट्य) माना जाता है। मूर्ति की विशेषता यह है कि यह हमेशा शीतल और दिव्य आभा से युक्त रहती है। समय के साथ, स्थानीय राजाओं और श्रद्धालुओं ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया, जिससे यह अपनी प्राचीनता के साथ-साथ भव्यता भी धारण कर सका।

यहाँ आज भी प्राचीन काल की कई धार्मिक परंपराएँ निभाई जाती हैं, जो इसकी गौरवशाली विरासत को दर्शाती हैं।

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"यह स्वयंभू शिवलिंग अत्यंत प्राचीन एवं चमत्कारी माना जाता है।"

मान्यता: यहाँ आकर भगवान शंकर का सच्चे मन से जलाभिषेक करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 प्राचीन शिवलिंग और मंदिर संरचना

प्राचीन शिव मंदिर, ज्ञानपुर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में निर्मित है, जिसमें सुंदर नक्काशी, भव्य शिखर और विशाल प्रांगण देखने को मिलता है। गर्भगृह में प्राचीन स्वयंभू शिवलिंग विराजमान हैं, जिनके साथ माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की भी सुंदर प्रतिमाएँ स्थापित हैं।

🎨 नंदी की विशाल प्रतिमा

मंदिर के प्रवेश द्वार पर भगवान शंकर के वाहन नंदी की एक भव्य और विशाल प्रतिमा स्थापित है, जो अपनी ही एक अलग पहचान रखती है। यहाँ के शिल्प और नक्काशी दर्शनीय हैं।

🌳 शांत परिसर और प्राकृतिक सुंदरता

मंदिर का विशाल प्रांगण हरियाली से परिपूर्ण है। यहाँ एक सुंदर वाटिका है, जहाँ भक्त बैठकर ध्यान और भजन का आनंद ले सकते हैं। परिसर में स्थित प्राचीन वट वृक्ष भी अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए जाना जाता है।

🧘 भक्ति, योग और सत्संग का केंद्र

प्राचीन शिव मंदिर, ज्ञानपुर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

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भजन-कीर्तन

प्रतिदिन शाम को भजन और शिव स्तुति का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु भोलेनाथ के मधुर नामों का सामूहिक रूप से गान करते हैं।

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शिव पुराण कथा

वर्ष में कई बार शिव पुराण, स्कन्द पुराण की कथा का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता करते हैं।

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योग और ध्यान

प्रातःकाल मंदिर परिसर में योग और ध्यान शिविर लगाए जाते हैं, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

ये सभी क्रियाएँ भक्तों को आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं, जिससे उनका जीवन आनंदमय हो जाता है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • मनोवांछित फल की प्राप्ति: सच्चे मन से यहाँ जल चढ़ाने और रुद्राभिषेक कराने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  • रोग निवारण: कई भक्तों ने अनुभव किया है कि यहाँ पूजा-अर्चना करने और भस्म (विभूति) ग्रहण करने से असाध्य रोगों में भी राहत मिलती है।
  • ग्रह दोषों से मुक्ति: यहाँ का शिवलिंग ग्रहों के अशुभ प्रभाव को शांत करने के लिए प्रसिद्ध है।
  • नेगेटिव एनर्जी से मुक्ति: मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक प्रभावों को दूर करती है और मन को शुद्ध करती है।
  • मोक्षदायिनी स्थली: यह स्थान पौराणिक कथाओं में वर्णित है और यहाँ अंतिम संस्कार से जुड़ी मान्यताएँ भी प्रचलित हैं।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

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महाशिवरात्रि

भगवान शंकर का यह सबसे बड़ा पर्व यहाँ अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है। रात्रि जागरण, रुद्राभिषेक और महाआरती का आयोजन होता है। हजारों भक्त यहाँ दर्शन करने आते हैं।

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श्रावण मास

सावन के महीने में हर सोमवार को यहाँ विशेष जलाभिषेक और कांवड़ यात्रा का आयोजन होता है। पूरा मंदिर परिसर भक्तों से पट जाता है।

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सोमवार व्रत और अभिषेक

प्रत्येक सोमवार को यहाँ विशेष पूजा का आयोजन होता है। हजारों भक्त दूर-दूर से सोमवार के दिन यहाँ दर्शन करने आते हैं।

🪔

कार्तिक पूर्णिमा

इस दिन मंदिर में दीपदान और विशेष आरती का आयोजन होता है।

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शिव पुराण सप्ताह

वर्ष में एक बार सात दिवसीय शिव पुराण कथा का आयोजन किया जाता है, जो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • वाराणसी (बनारस): काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, सारनाथ, गंगा आरती। (लगभग 55 किमी)
  • प्रयागराज (इलाहाबाद): त्रिवेणी संगम, अल्फ्रेड पार्क, हनुमान मंदिर, आनंद भवन। (लगभग 120 किमी)
  • ज्ञानपुर का प्राचीन किला: ज्ञानपुर शहर में ही एक प्राचीन किला भी है, जो इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
  • संत रविदास मंदिर, सीर गोवर्धनपुर: संत रविदास की जन्मस्थली, जो भदोही जिले में ही स्थित है। (लगभग 30 किमी)
  • जौनपुर: ऐतिहासिक शाही किला, अटाला मस्जिद, और यमुना नदी के घाट। (लगभग 45 किमी)
📌 यात्रा टिप: वाराणसी या प्रयागराज की यात्रा करते हुए आप ज्ञानपुर के इस प्राचीन शिव मंदिर के दर्शन भी आसानी से कर सकते हैं। यहाँ से वाराणसी, संत रविदास नगर और जौनपुर एक ही दिन में देखे जा सकते हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

ज्ञानपुर में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है। यदि आप भोलेनाथ की विशेष कृपा और उत्सवी धूम देखना चाहते हैं, तो श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) और महाशिवरात्रि (फरवरी-मार्च) का समय सर्वोत्तम है।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • श्रावण मास और महाशिवरात्रि: यदि आप त्योहारी धूम देखना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर प्रातः 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है।
  • शाम की महाआरती (लगभग 7:30 बजे) में शामिल हों, यह अत्यंत मनमोहक होती है।
  • सावन सोमवार और महाशिवरात्रि पर भारी भीड़ रहती है, समय का ध्यान रखें।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजनालय और प्रसाद की व्यवस्था है।
  • फोटोग्राफी की अनुमति के लिए मंदिर प्रशासन से अनुमति लें।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का "भस्म (विभूति)" और "बेलपत्र" प्रसिद्ध है, अवश्य ग्रहण करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: प्राचीन शिव मंदिर, ज्ञानपुर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के भदोही (संत रविदास नगर) जिले के ज्ञानपुर नगर में स्थित है। वाराणसी शहर से लगभग 55 किलोमीटर की दूरी पर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता यहाँ का प्राचीन स्वयंभू शिवलिंग, भव्य वास्तुकला, और यहाँ आयोजित होने वाले भजन-कीर्तन एवं शिव पुराण कथा हैं। साथ ही, यह स्थान अपनी शांत वाटिका और भक्ति-भावना के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। श्रावण मास और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: ज्ञानपुर में कुछ धर्मशालाएँ और निजी होटल उपलब्ध हैं। बेहतर आवास के लिए वाराणसी या प्रयागराज जाना अधिक सुविधाजनक रहता है। मंदिर परिसर के पास शुद्ध शाकाहारी भोजन की दुकानें मौजूद हैं।

प्रश्न 6: ज्ञानपुर कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन (जीएनपी) कई ट्रेनों से जुड़ा है। सड़क मार्ग से वाराणसी, प्रयागराज, जौनपुर, और आसपास के शहरों से बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप विशेष रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, या सत्संग का आयोजन करवा सकते हैं।

📝 प्राचीन शिव मंदिर, ज्ञानपुर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

प्राचीन शिव मंदिर, ज्ञानपुर भदोही (संत रविदास नगर) का एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ आस्था, इतिहास और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्तों को भगवान शंकर की अमर लीला में डूबने का अवसर भी देता है।

यहाँ की प्राचीन शिवलिंग, भव्य आरतियाँ, और नियमित रूप से होने वाले सत्संग एवं भजन-कीर्तन हर किसी को भक्ति-रस में डुबो देते हैं। चाहे आप सच्चे भक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

भदोही (संत रविदास नगर) की पवित्र भूमि पर स्थित यह मंदिर उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो भगवान शंकर की अनन्य भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना रखते हैं।

ॐ नमः शिवाय ।। हर हर महादेव ।।

🕉️ प्राचीन शिव मंदिर – ज्ञानपुर, भदोही
आस्था, इतिहास और भोलेनाथ की अमर लीला का पवित्र धाम

देवादिदेव महादेव के अन्य १२ ज्योतिर्लिंगों और शिव आराधना मंत्रों के लिए शिव पुराण का पाठ अवश्य करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 23 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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