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प्रामाणिक मंदिर विवरण

संगम मंदिर, त्रिवेणी संगम, प्रयागराज - Sangam Mandir, Triveni Sangam, Prayagraj: The Sacred Confluence of Three Holy Rivers

542 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 22 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Triveni Sangam आराध्य देव
6 AM - 9 PM दर्शन समय
आरती समय आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Triveni Sangam
स्थान / पता Triveni Sangam, Prayagraj, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🕉️ संगम मंदिर, त्रिवेणी संगम, प्रयागराज

पवित्र नदियों का दिव्य संगम (Sangam Mandir, Triveni Sangam, Prayagraj)

गंगा, यमुना और सरस्वती का अद्भुत मिलन स्थल

🌟 परिचय: त्रिवेणी संगम का आध्यात्मिक महत्व

प्रयागराज (पूर्व नाम इलाहाबाद) में स्थित त्रिवेणी संगम हिंदू धर्म का सबसे पवित्र स्थल है, जहाँ तीन प्रमुख नदियाँ – गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती – मिलती हैं। यहाँ स्थित संगम मंदिर इस पवित्र भूमि पर स्थित एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। मान्यता है कि यहाँ स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

यह स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ हर 12 वर्षों पर लगने वाला कुंभ मेला विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन है, जहाँ लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान करने आते हैं। इसके अलावा अर्धकुंभ और माघ मेले का भी यहाँ विशेष महत्व है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

संगम मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में, त्रिवेणी संगम के तट पर स्थित है। यह स्थल शहर के मध्य से लगभग 7-8 किलोमीटर दूर है और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

  • रेल मार्ग: प्रयागराज जंक्शन (प्रयागराज रेलवे स्टेशन) एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है, जो देश के सभी बड़े शहरों से जुड़ा है। स्टेशन से संगम तक टैक्सी, ऑटो या स्थानीय बसें आसानी से मिल जाती हैं।
  • सड़क मार्ग: प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ा हुआ है। लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, दिल्ली आदि से नियमित बसें चलती हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज एयरपोर्ट (बमरौली) है, जो शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर है। यहाँ से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता आदि के लिए नियमित उड़ानें हैं।
  • स्थानीय परिवहन: शहर से संगम तक ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ई-रिक्शा आसानी से उपलब्ध हैं। पर्यटक नाव से भी संगम तक पहुँच सकते हैं।
🗺️

त्रिवेणी संगम, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

प्रयागराज जंक्शन से दूरी: ~7 किमी
वाराणसी से दूरी: ~120 किमी
लखनऊ से दूरी: ~200 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पुराणों के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश से चार बूँदें पृथ्वी पर गिरी थीं, जिनमें से एक यहीं प्रयाग में गिरी। तभी से यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है। यहाँ तीनों नदियों का संगम होता है – गंगा (भागीरथी), यमुना (कालिंदी) और अदृश्य सरस्वती। मान्यता है कि सरस्वती नदी भूमिगत होकर यहाँ प्रकट होती हैं।

एक अन्य कथा के अनुसार, प्रयाग को "तीर्थराज" (तीर्थों का राजा) कहा जाता है। ऋग्वेद में भी प्रयाग का उल्लेख मिलता है। प्राचीन काल में यह स्थल ऋषियों की तपोभूमि रहा है। मुगल काल में अकबर ने यहाँ एक विशाल किला बनवाया, जिसके अंदर अक्षयवट (अमर वृक्ष) स्थित है। संगम मंदिर आधुनिक काल में बना है, लेकिन यहाँ की पूजा-परंपरा सदियों पुरानी है।

🕊️

"त्रिवेणी संगम – जहाँ पाप धुलते हैं और मोक्ष मिलता है"

मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से स्नान करने से सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।

🏛️ संगम मंदिर और उसकी विशेषताएं

🙏 मंदिर की वास्तुकला

संगम मंदिर त्रिवेणी संगम के तट पर स्थित एक सुंदर मंदिर है। इसकी वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में बनी है। मंदिर में गंगा, यमुना और सरस्वती की प्रतिमाएँ स्थापित हैं, जिनकी पूजा की जाती है। मंदिर परिसर में कई छोटे-बड़े मंदिर भी हैं, जिनमें भगवान शिव, देवी दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ विराजमान हैं।

🌊 अक्षयवट (अमर वृक्ष)

संगम के निकट स्थित अक्षयवट एक अत्यंत प्राचीन बरगद का वृक्ष है। पौराणिक मान्यता है कि यह वृक्ष अविनाशी है और इसकी पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। अकबर के किले के अंदर स्थित इस वृक्ष के दर्शन के लिए विशेष अनुमति लेनी पड़ती है।

🪔 नौका विहार और घाट

संगम पर नौका विहार का विशेष आनंद लिया जा सकता है। यहाँ के घाटों पर स्नान, पूजा और दान का बहुत महत्व है। शाम के समय घाटों पर आरती होती है, जिसमें शामिल होना अद्भुत अनुभव होता है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख मेले और त्योहार

🏺

कुंभ मेला

हर 12 वर्षों में लगने वाला विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन। करोड़ों श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए आते हैं। अगला कुंभ 2025 में है।

🌙

अर्धकुंभ मेला

हर 6 वर्षों पर आयोजित होने वाला यह मेला भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। लाखों श्रद्धालु यहाँ स्नान करते हैं।

☀️

माघ मेला

प्रत्येक वर्ष जनवरी-फरवरी में लगने वाला यह मेला पूरे माघ मास चलता है। यहाँ स्नान और दान का विशेष महत्व है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • त्रिवेणी स्नान: संगम में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • पितरों का उद्धार: यहाँ पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • ग्रह दोष निवारण: यहाँ विशेष पूजा और दान से ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
  • तीर्थराज प्रयाग: प्रयाग को "तीर्थराज" कहा जाता है – अर्थात सभी तीर्थों का राजा।
  • अक्षयवट की पूजा: इस अमर वृक्ष के दर्शन और पूजन से अक्षय पुण्य मिलता है।
  • योग और ध्यान: संगम का शांत वातावरण ध्यान साधना के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • अल्फ्रेड पार्क (कंपनी गार्डन): शहर का सुंदर उद्यान, जहाँ ऐतिहासिक थोर्नहिल मेमोरियल है।
  • इलाहाबाद किला: अकबर द्वारा 1583 में बनवाया गया विशाल किला। किले के अंदर अक्षयवट और पातालपुरी मंदिर स्थित हैं।
  • आनंद भवन: नेहरू-गांधी परिवार का ऐतिहासिक घर, जो अब एक संग्रहालय है।
  • हनुमान मंदिर: प्रयागराज का प्रसिद्ध लेटे हुए हनुमान जी का मंदिर, जहाँ हर मंगलवार को विशेष भीड़ होती है।
  • शंकर विमान मंडपम: एक विशाल मंदिर परिसर, जो प्रयागराज के पास स्थित है।
  • मिंटो पार्क: यमुना नदी के किनारे स्थित सुंदर पार्क, जहाँ से संगम का दृश्य दिखता है।
  • स्वराज भवन: नेहरू परिवार की पुरानी हवेली, जो अब एक स्मारक संग्रहालय है।
📌 यात्रा टिप: यदि आप कुंभ या अर्धकुंभ के समय यात्रा कर रहे हैं, तो पहले से आवास बुक कर लें और भीड़ का ध्यान रखें। सामान्य दिनों में संगम के दर्शन और नौका विहार का विशेष आनंद लिया जा सकता है।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

यहाँ यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है। माघ मेले (जनवरी-फरवरी) के समय यहाँ विशेष आयोजन होते हैं, लेकिन भीड़ अधिक होती है।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • माघ मास (जनवरी-फरवरी): यदि आप त्योहारी धूम देखना चाहें तो यह सबसे अच्छा समय है।

📝 यात्रा सुझाव

  • सुबह जल्दी स्नान करने से विशेष लाभ होता है।
  • नौका लेकर संगम के मध्य तक जाएं और वहाँ स्नान करें।
  • स्थानीय पुजारियों से पूजा और पिंडदान करवा सकते हैं।
  • धूप-छाँव में घूमने के लिए टोपी, छाता और पानी साथ रखें।
  • स्वच्छता बनाए रखें और प्लास्टिक का उपयोग न करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: त्रिवेणी संगम कहाँ स्थित है?

उत्तर: त्रिवेणी संगम उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में स्थित है, जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती नदियाँ मिलती हैं।

प्रश्न 2: संगम में स्नान का क्या महत्व है?

उत्तर: पौराणिक मान्यता है कि यहाँ स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह स्थान हिंदुओं के लिए अत्यंत पवित्र है।

प्रश्न 3: क्या संगम मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर और संगम घाटों पर कोई प्रवेश शुल्क नहीं है। हालाँकि, किले के अंदर स्थित अक्षयवट के दर्शन के लिए किले का टिकट लेना पड़ता है।

प्रश्न 4: संगम यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त है। माघ मेले (जनवरी-फरवरी) के दौरान यहाँ विशेष आयोजन होते हैं।

प्रश्न 5: प्रयागराज कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: प्रयागराज रेल, सड़क और हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यहाँ का रेलवे स्टेशन प्रमुख ट्रेनों से जुड़ा है, और हवाई अड्डा शहर से 12 किमी दूर है।

प्रश्न 6: क्या संगम पर नौका विहार की सुविधा है?

उत्तर: हाँ, घाटों से नौकाएँ आसानी से मिल जाती हैं, जो आपको संगम के मध्य तक ले जाती हैं।

प्रश्न 7: क्या यहाँ ठहरने की व्यवस्था है?

उत्तर: प्रयागराज में होटल, धर्मशालाएँ और सरकारी अतिथि गृह उपलब्ध हैं। मेले के समय अस्थायी शिविर भी लगाए जाते हैं।

📝 संगम यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

त्रिवेणी संगम और संगम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं हैं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और इतिहास का अद्वितीय केंद्र हैं। यहाँ की पवित्रता, शांति और दिव्य वातावरण हर व्यक्ति को आत्मिक शांति प्रदान करता है।

यहाँ स्नान, पूजा, ध्यान और अक्षयवट के दर्शन का अनुभव जीवन भर याद रहता है। चाहे आप श्रद्धालु हों, इतिहास प्रेमी हों या साधक, संगम की यात्रा आपको एक समग्र और अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगी।

🙏 गंगे च यमुने चैव सरस्वति नदि त्रयम् । सन्निधानं कुरुष्वेदं त्रिवेणी संगमे सदा ॥

हर हर गंगे । हर हर यमुने । हर हर सरस्वति ॥

🕉️ त्रिवेणी संगम, प्रयागराज
तीर्थराज प्रयाग – जहाँ मिलती है पवित्रता, शांति और मोक्ष

सनातन संस्कृति के विभिन्न त्यौहारों, व्रत और व्रत कथाओं की सटीक जानकारी के लिए हमारे सनातन कैलेंडर २०२६ का अवलोकन करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 22 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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