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प्रामाणिक मंदिर विवरण

शंकर विमान मंडपम, प्रयागराज – Shankar Viman Mandapam, Prayagraj: A Sacred Tribute to Adi Shankaracharya at Triveni Sangam

182 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 22 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Adi Shankaracharya आराध्य देव
6:00 AM – 12:00 PM, 4:00 PM – 8:00 PM दर्शन समय
आरती समय आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Adi Shankaracharya
दर्शन समय 6:00 AM – 12:00 PM, 4:00 PM – 8:00 PM
स्थान / पता Triveni Bandh, Daraganj, Prayagraj, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🕉️ शंकर विमान मंडपम, प्रयागराज

आदि शंकराचार्य को समर्पित त्रिवेणी संगम की अद्भुत धरोहर (Shankar Viman Mandapam, Prayagraj)

त्रिवेणी बंध, दारागंज – प्रयागराज का प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र

🌟 परिचय: आदि शंकराचार्य की स्मृति में बना दिव्य मंडपम

प्रयागराज के पवित्र त्रिवेणी संगम के समीप, दारागंज क्षेत्र में स्थित शंकर विमान मंडपम (आदि शंकराचार्य मंदिर) एक अद्वितीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्थल है। यह मंदिर आदि गुरु शंकराचार्य को समर्पित है, जिन्होंने अद्वैत वेदांत का प्रचार किया और भारत की आध्यात्मिक एकता को स्थापित किया।

यह मंडपम अपनी दक्षिण भारतीय शैली की विमान वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, जो उत्तर भारत में एक अनूठा उदाहरण है। त्रिवेणी संगम के निकट होने के कारण यहाँ आने वाले श्रद्धालु पहले संगम स्नान करते हैं, फिर यहाँ शंकराचार्य के दर्शन कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करते हैं।

यह स्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह योग, ध्यान और वैदिक अध्ययन का भी केंद्र है। मंडपम के भीतर शांत वातावरण, संगम का मनोरम दृश्य और वैदिक मंत्रों की गूंज भक्तों को एक अलौकिक अनुभव प्रदान करती है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

शंकर विमान मंडपम प्रयागराज के दारागंज क्षेत्र में, त्रिवेणी बंध (Triveni Bandh) के पास स्थित है। यह स्थान त्रिवेणी संगम से मात्र कुछ ही दूरी पर है, जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का मिलन होता है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: प्रयागराज (पूर्व में इलाहाबाद) स्वयं एक प्रमुख धार्मिक नगरी है।
  • रेल मार्ग: प्रयागराज जंक्शन (प्रयागराज रेलवे स्टेशन) देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है। यहाँ से दारागंज के लिए टैक्सी या ऑटो आसानी से मिल जाते हैं (लगभग 6-7 किमी की दूरी)।
  • सड़क मार्ग: प्रयागराज सड़क मार्ग द्वारा भी अच्छी तरह जुड़ा है। वाराणसी, लखनऊ, कानपुर आदि से नियमित बसें उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज एयरपोर्ट (बमरौली) है, जो शहर से लगभग 12-15 किमी दूर है।
🗺️

त्रिवेणी बंध, दारागंज, प्रयागराज

त्रिवेणी संगम से दूरी: ~500 मीटर
प्रयागराज जंक्शन से: ~6 किमी

📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आदि शंकराचार्य का संबंध

आदि शंकराचार्य (788-820 ई.) ने भारत भर में चार मठों की स्थापना की और अद्वैत वेदांत का प्रचार किया। मान्यता है कि उन्होंने प्रयागराज (तब इलाहाबाद) का दौरा किया और यहाँ त्रिवेणी संगम पर स्नान कर वेदांत पर व्याख्यान दिए। इस स्थान को उनके स्मरण में बाद में एक मंडपम के रूप में विकसित किया गया।

वर्तमान शंकर विमान मंडपम का निर्माण आधुनिक काल में हुआ, लेकिन इसकी डिजाइन दक्षिण भारतीय विमान शैली में है, जो आदि शंकराचार्य के दक्षिण भारत से गहरे संबंध को दर्शाती है। मंदिर का गर्भगृह शंकराचार्य की प्रतिमा को समर्पित है, और यहाँ उनके जीवन और दर्शन पर आधारित चित्रण भी हैं।

स्थानीय मान्यता है कि यहाँ पूजा-अर्चना करने और आदि शंकराचार्य के दर्शन करने से ज्ञान, भक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह स्थल विशेष रूप से वेदांत के अध्येताओं और आध्यात्मिक साधकों के लिए महत्वपूर्ण है।

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"अद्वैत के प्रणेता, भारत की आध्यात्मिक एकता के सूत्रधार"

मान्यता: इस मंडपम में सच्चे मन से अद्वैत मंत्रों का जाप करने से आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है।

🏛️ विमान शैली की भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 द्रविड़ शैली का विमान मंडपम

शंकर विमान मंडपम की सबसे खास विशेषता इसकी द्रविड़ (दक्षिण भारतीय) वास्तुकला है। मंदिर का शिखर (विमान) कई स्तरों में बना हुआ है, जो दक्षिण के मंदिरों की याद दिलाता है। प्रवेश द्वार पर राजगोपुरम शैली का द्वार है, जिस पर सुंदर नक्काशी की गई है।

🌊 त्रिवेणी संगम का अद्भुत दृश्य

मंडपम के ऊपरी भाग से त्रिवेणी संगम का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। यहाँ से गंगा-यमुना के मिलन और सरस्वती की अदृश्य धारा का अहसास होता है। संध्या समय यहाँ से सूर्यास्त का दृश्य अत्यंत आकर्षक होता है।

📜 वेदांत अध्ययन केंद्र

मंडपम के भीतर एक छोटा ग्रंथालय और अध्ययन कक्ष है, जहाँ आदि शंकराचार्य के ग्रंथ (विवेकचूड़ामणि, भाष्य आदि) रखे गए हैं। यहाँ आध्यात्मिक साधक आकर अद्वैत दर्शन का अध्ययन कर सकते हैं।

🧘 योग, ध्यान और वैदिक साधना का केंद्र

शंकर विमान मंडपम केवल दर्शन का स्थान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना का सजीव केंद्र है। यहाँ नियमित रूप से वेदांत वार्ता, योग शिविर और ध्यान सत्र आयोजित किए जाते हैं।

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योग शिविर

प्रातःकाल में योगासन और प्राणायाम के सत्र आयोजित होते हैं, जिसमें स्थानीय लोग और पर्यटक सहभागिता करते हैं।

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ध्यान साधना

संगम के शांत वातावरण में ध्यान करने का अनुभव अद्वितीय है। मंडपम में नियमित ध्यान सत्र आयोजित किए जाते हैं।

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वैदिक मंत्रोच्चार

यहाँ प्रतिदिन सुबह-शाम वैदिक मंत्रों का उच्चारण और शंकराचार्य की स्तुति की जाती है। “ॐ नमः शिवाय” और “नारायणं पद्मभुवं…” का जाप परिसर को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • ज्ञान की प्राप्ति: यहाँ आदि शंकराचार्य के दर्शन और उनके ग्रंथों के अध्ययन से आत्मज्ञान और विद्या में वृद्धि होती है।
  • संगम स्नान का पुण्य: पहले त्रिवेणी संगम में स्नान, फिर यहाँ दर्शन करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • मोक्ष की कामना: प्रयागराज को “तीर्थराज” कहा गया है। यहाँ स्थित इस मंदिर में पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति के मार्ग खुलते हैं।
  • शांति और सकारात्मकता: यहाँ की शांति और वैदिक वातावरण मन को स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
  • साधना का विशेष स्थान: जो लोग अद्वैत वेदांत में रुचि रखते हैं, उनके लिए यह एक प्रमुख साधना स्थल है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

📿

शंकर जयंती

आदि शंकराचार्य के जन्मोत्सव (वैशाख शुक्ल पंचमी) पर विशेष पूजा, भजन और वेदांत वार्ता का आयोजन होता है।

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कुंभ / अर्धकुंभ

प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान यहाँ लाखों श्रद्धालु संगम स्नान के बाद दर्शन के लिए आते हैं। मंडपम विशेष रूप से सजाया जाता है।

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महाशिवरात्रि

यद्यपि मंदिर आदि शंकराचार्य को समर्पित है, फिर भी शिवरात्रि पर विशेष पूजा और जागरण का आयोजन किया जाता है, क्योंकि शंकराचार्य शिव के भक्त थे।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल (प्रयागराज)

  • त्रिवेणी संगम: गंगा, यमुना और सरस्वती का पवित्र संगम। यहाँ स्नान और नौका विहार का अद्भुत अनुभव।
  • अक्षयवट वृक्ष: संगम के समीप स्थित प्राचीन वट वृक्ष, जिसके बारे में मान्यता है कि यह अविनाशी है।
  • आलोपी देवी मंदिर: शक्तिपीठों में से एक, प्रयागराज में स्थित।
  • हनुमान मंदिर (संगम के पास): विश्व प्रसिद्ध लेटे हुए हनुमान जी का मंदिर।
  • प्रयागराज किला (अकबर का किला): ऐतिहासिक किला, जिसमें अशोक स्तंभ और पातालपुरी मंदिर है।
  • आनंद भवन: नेहरू-गांधी परिवार का ऐतिहासिक घर, अब संग्रहालय।
  • थॉमस चर्च / ऑल सेंट्स कैथेड्रल: अंग्रेजी काल की स्थापत्य कला का नमूना।
📌 यात्रा टिप: शंकर विमान मंडपम के दर्शन के बाद त्रिवेणी संगम, अक्षयवट और हनुमान मंदिर की यात्रा अवश्य करें। ये सभी स्थल पैदल या ऑटो से आसानी से पहुँचे जा सकते हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

प्रयागराज की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है। कुंभ मेले के दौरान (हर 12 वर्ष में) यहाँ विशेष भीड़ होती है, लेकिन यह अनुभव अद्वितीय होता है।

  • शरद ऋतु (अक्टूबर-नवंबर): सर्दी की शुरुआत, यात्रा के लिए आदर्श।
  • माघ मेला (जनवरी-फरवरी): यदि आप स्नान पर्व देखना चाहें, तो यह समय उपयुक्त है।

📝 यात्रा सुझाव

  • सुबह जल्दी संगम स्नान करें, फिर मंडपम के दर्शन करें।
  • मंडपम के ऊपरी भाग से संगम का दृश्य अवश्य देखें।
  • यहाँ आयोजित वेदांत वार्ता या ध्यान सत्र में भाग लें (यदि समय हो)।
  • मंदिर परिसर में फोटोग्राफी की अनुमति लें (कुछ क्षेत्रों में प्रतिबंध हो सकता है)।
  • स्वच्छता बनाए रखें और प्लास्टिक का उपयोग कम करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: शंकर विमान मंडपम कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह प्रयागराज के दारागंज क्षेत्र में, त्रिवेणी बंध (Triveni Bandh) के पास स्थित है। त्रिवेणी संगम से यह लगभग 500 मीटर की दूरी पर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर का निर्माण कब हुआ था?

उत्तर: वर्तमान संरचना आधुनिक काल में बनाई गई है, लेकिन यह स्थान आदि शंकराचार्य से जुड़ा हुआ है। इसे द्रविड़ विमान शैली में बनाया गया है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन का समय क्या है?

उत्तर: मंदिर प्रातः 6:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुला रहता है।

प्रश्न 5: क्या यहाँ ध्यान या योग की सुविधा उपलब्ध है?

उत्तर: हाँ, यहाँ प्रातःकाल योग सत्र और नियमित ध्यान सत्र आयोजित किए जाते हैं। विशेष कार्यक्रमों की जानकारी मंदिर प्रशासन से प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न 6: क्या यहाँ रुकने की व्यवस्था है?

उत्तर: प्रयागराज में कई होटल, धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। कुंभ काल में विशेष व्यवस्था की जाती है।

प्रश्न 7: क्या यहाँ से त्रिवेणी संगम का दृश्य दिखता है?

उत्तर: हाँ, मंडपम के ऊपरी भाग से संगम का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है, विशेषकर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय।

📝 शंकर विमान मंडपम की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

शंकर विमान मंडपम, प्रयागराज केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन और अद्वैत वेदांत की जीवंत धरोहर है। यहाँ आदि शंकराचार्य के जीवन और शिक्षाओं को समझने का अवसर मिलता है। त्रिवेणी संगम के सान्निध्य में स्थित यह मंडपम आध्यात्मिक साधकों, विद्यार्थियों और शांति चाहने वालों के लिए एक आदर्श स्थल है।

यहाँ की द्रविड़ शैली की वास्तुकला, शांत वातावरण, और वैदिक मंत्रों की गूंज मन को गहराई से छूती है। यदि आप प्रयागराज आते हैं, तो संगम स्नान के साथ-साथ इस अद्भुत मंडपम के दर्शन अवश्य करें। यह यात्रा आपको ज्ञान, भक्ति और आंतरिक शांति का अद्वितीय अनुभव प्रदान करेगी।

🙏 ॐ नमः शिवाय ।। शंकराय शिवरूपाय ।।

🕉️ शंकर विमान मंडपम, प्रयागराज
त्रिवेणी संगम के पवित्र तट पर आदि गुरु की स्मृति

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प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 22 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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