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प्रामाणिक मंदिर विवरण

श्री जैन मंदिर – भदोही रेलवे स्टेशन क्षेत्र: अहिंसा, साधना और शांति का प्रमुख धाम | Shri Jain Mandir Bhadohi Railway Station Area: A Sacred Pilgrimage of Peace and Non-Violence

187 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 23 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Mahavir Swami आराध्य देव
सुबह 6:00 से दोपहर 12:00, शाम 4:00 से रात 8:00 बजे तक दर्शन समय
सुबह 7:00 बजे और शाम 7:00 बजे आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Mahavir Swami
दर्शन समय सुबह 6:00 से दोपहर 12:00, शाम 4:00 से रात 8:00 बजे तक
आरती समय सुबह 7:00 बजे और शाम 7:00 बजे
स्थान / पता Jain Mandir, Bhadohi Railway Station Area, Bhadohi, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 श्री जैन मंदिर – भदोही रेलवे स्टेशन क्षेत्र

अहिंसा, साधना और शांति का प्रमुख धाम (Shri Jain Mandir, Bhadohi Railway Station Area)

भदोही जिले के रेलवे स्टेशन क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन एवं प्रसिद्ध जैन मंदिर

🌟 परिचय: श्री जैन मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में रेलवे स्टेशन क्षेत्र के समीप स्थित श्री जैन मंदिर जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक अत्यंत पवित्र और प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। यह मंदिर अपनी प्राचीन मूर्तियों, शांत वातावरण और धार्मिक साधना के लिए जाना जाता है।

यहाँ तीर्थंकरों की सुंदर प्रतिमाएँ स्थापित हैं, जो अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के पाँच महाव्रतों का संदेश देती हैं। मंदिर परिसर में नियमित रूप से प्रातः और सायं आरती, प्रवचन और ध्यान साधना का आयोजन होता है। भक्त यहाँ आकर मन की शांति और आत्मिक उन्नति का अनुभव करते हैं।

स्थानीय मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह स्थान जैन धर्म की महान परंपराओं को संजोए हुए है और हर वर्ग के श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

यह मंदिर उत्तर प्रदेश के भदोही जिले (जिसे संत रविदास नगर भी कहा जाता है) में रेलवे स्टेशन क्षेत्र के निकट स्थित है। भदोही कारपेट नगरी के रूप में प्रसिद्ध है और यहाँ आने वाले श्रद्धालु आसानी से इस मंदिर तक पहुँच सकते हैं।

  • निकटतम प्रमुख शहर: वाराणसी (लगभग 45 किमी), इलाहाबाद (प्रयागराज) (लगभग 120 किमी)
  • रेल मार्ग: मंदिर भदोही रेलवे स्टेशन (BHB) से मात्र कुछ ही दूरी पर स्थित है। स्टेशन से पैदल या ऑटो द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। भदोही स्टेशन वाराणसी-मुगलसराय मार्ग पर स्थित है, जिससे कई प्रमुख ट्रेनें यहाँ रुकती हैं।
  • सड़क मार्ग: भदोही सड़क मार्ग द्वारा वाराणसी, प्रयागराज, जौनपुर आदि शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन की बसें और निजी टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 50 किमी की दूरी पर है।
🗺️

भदोही रेलवे स्टेशन क्षेत्र, उत्तर प्रदेश

वाराणसी से दूरी: ~45 किमी
प्रयागराज से दूरी: ~120 किमी

📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और महत्व

श्री जैन मंदिर, भदोही का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना है। मान्यता है कि यह स्थान कभी जैन मुनियों की तपोभूमि रहा है। प्राचीन काल में एक श्रावक (जैन अनुयायी) को स्वप्न में तीर्थंकरों की प्रतिमाएँ प्राप्त हुईं, जिन्हें यहाँ स्थापित किया गया। समय के साथ यह मंदिर जैन समुदाय के लिए एक प्रमुख धार्मिक केंद्र बन गया।

यहाँ की मूल प्रतिमा भगवान महावीर स्वामी की है, जिन्हें 24वें तीर्थंकर के रूप में पूजा जाता है। साथ ही, अन्य तीर्थंकरों की भी मनमोहक मूर्तियाँ विराजमान हैं। मंदिर की वास्तुकला में जैन शैली की बारीक नक्काशी देखने को मिलती है, जो इसकी प्राचीनता और कलात्मक धरोहर को दर्शाती है।

आज भी यहाँ प्राचीन काल से चली आ रही परंपराओं का निर्वहन किया जाता है, जिसमें विशेष पूजा, प्रतिष्ठा समारोह और सामूहिक साधना शामिल हैं।

🕊️

"अहिंसा परमो धर्मः – यहाँ की प्रतिमाएँ इसी महामंत्र की गवाह हैं।"

मान्यता: यहाँ आकर तीर्थंकरों के दर्शन एवं सच्चे मन से ध्यान करने से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और आत्मशुद्धि होती है।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 मनमोहक प्रतिमाएँ और नक्काशी

यह जैन मंदिर पारंपरिक जैन शैली में निर्मित है। गर्भगृह में भगवान महावीर स्वामी की सफेद संगमरमर की प्रतिमा विराजमान है, जो अत्यंत शांत और आकर्षक है। अन्य तीर्थंकरों – ऋषभदेव, अजितनाथ, पार्श्वनाथ आदि – की भी सुंदर मूर्तियाँ स्थापित हैं।

🎨 चित्रकारी और शिल्पकला

मंदिर की दीवारों पर तीर्थंकरों के जीवन चरित्र और जैन धर्म के प्रतीकों का अद्भुत चित्रण है। संगमरमर की जालियाँ, स्तंभों पर की गई नक्काशी और मंडप की सुंदरता दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

🌳 शांत परिसर और ध्यान स्थल

मंदिर का प्रांगण हरियाली से परिपूर्ण है। यहाँ एक विशाल ध्यान कक्ष है, जहाँ भक्त मौन साधना और प्राणायाम कर सकते हैं। परिसर में स्थित वटवृक्ष के नीचे प्राचीन पत्थर की चौकियाँ ध्यान के लिए आदर्श हैं।

🧘 साधना, ध्यान और प्रवचन का केंद्र

श्री जैन मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना का जीवंत केंद्र है। यहाँ नियमित रूप से:

🕉️

प्रातः साधना

प्रतिदिन प्रातः 6:00 बजे से 7:30 बजे तक सामूहिक ध्यान, मंत्रोच्चार और पूजा का आयोजन होता है।

📖

प्रवचन एवं सत्संग

प्रत्येक शाम को जैन आगमों पर आधारित प्रवचन होते हैं, जिनमें अहिंसा, अपरिग्रह और आत्म-शुद्धि का संदेश दिया जाता है।

🧘‍♀️

प्रेक्षा ध्यान शिविर

समय-समय पर प्रेक्षा ध्यान एवं आत्म-साक्षात्कार शिविर आयोजित किए जाते हैं, जो मानसिक शांति के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

इन सभी गतिविधियों का उद्देश्य साधकों को आंतरिक शांति, सकारात्मकता और जैन दर्शन की गहराई से अवगत कराना है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • अहिंसा का संदेश: यह मंदिर अहिंसा के प्रति जागरूकता का प्रतीक है। यहाँ सभी जीवों के प्रति करुणा भाव रखने की प्रेरणा मिलती है।
  • आत्मशुद्धि और कर्म निर्जरा: मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से पूजा और तप करने से पापों का नाश होता है और आत्मा शुद्ध होती है।
  • सिद्ध क्षेत्र: यह स्थान कई साधकों की तपस्थली रही है, अतः इसे सिद्ध क्षेत्र माना जाता है।
  • व्यापार और समृद्धि: भदोही कारपेट व्यापार के लिए प्रसिद्ध है। व्यापारी वर्ग यहाँ आकर विशेष पूजा कर व्यवसाय में उन्नति की कामना करता है।
  • मनोवांछित फल: कहा जाता है कि नवकार मंत्र का विधिवत जाप करने से सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🧘

महावीर जयंती

भगवान महावीर के जन्मोत्सव पर यहाँ भव्य झाँकियाँ, रथ यात्रा और सामूहिक पूजा का आयोजन होता है। हजारों भक्त सहभागिता करते हैं।

🪔

दीपावली (जैन नववर्ष)

जैन समुदाय के लिए दीपावली भगवान महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाई जाती है। यहाँ विशेष पूजा, दीपदान और प्रवचन होते हैं।

🌿

पर्यूषण पर्व

आठ दिवसीय यह महापर्व क्षमावाणी के साथ समाप्त होता है। इस दौरान सामूहिक प्रवचन, उपवास और प्रतिक्रमण का विशेष महत्व है।

🍃

अक्षय तृतीया

इस दिन भगवान ऋषभदेव ने आहार ग्रहण किया था। मंदिर में विशेष अभिषेक और अन्नकूट का आयोजन होता है।

📿

नवकार महामंत्र जाप

प्रत्येक मास की पूर्णिमा को सामूहिक नवकार मंत्र जाप और ध्यान शिविर आयोजित किया जाता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • वाराणसी (काशी): विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, सारनाथ – लगभग 45 किमी दूर।
  • श्रृंगवेरपुर धाम: भगवान राम की अयोध्या वापसी के समय यहाँ के राजा निषादराज से भेंट हुई थी। (लगभग 60 किमी)
  • प्रयागराज (त्रिवेणी संगम): लगभग 120 किमी दूर, कुंभनगरी के दर्शन।
  • जौनपुर: ऐतिहासिक शाही किला, अटाला मस्जिद, जामी मस्जिद (लगभग 60 किमी)
  • भदोही के अन्य जैन मंदिर: आसपास के गाँवों में भी कई प्राचीन जैन मंदिर हैं, जिनका धार्मिक महत्व है।
📌 यात्रा टिप: वाराणसी और प्रयागराज की यात्रा के दौरान श्री जैन मंदिर, भदोही रेलवे स्टेशन क्षेत्र में अवश्य दर्शन करें। यह मार्ग पर स्थित एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक स्थल है।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

भदोही में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे मंदिर परिसर में ध्यान और भ्रमण सुखद रहता है।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • महावीर जयंती (मार्च-अप्रैल) और पर्यूषण (अगस्त-सितंबर): यदि आप त्योहारी धूम देखना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर सुबह 6:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुला रहता है।
  • शाम की आरती (लगभग 7:00 बजे) में शामिल हों, यह अत्यंत मनमोहक होती है।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजनालय (जैन भोजनालय) उपलब्ध हैं।
  • फोटोग्राफी की अनुमति के लिए मंदिर प्रशासन से अनुमति लें।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का "नवकार मंत्र लिखित पवित्र सूत्र" प्रसिद्ध है, अवश्य ग्रहण करें।
  • धार्मिक पुस्तकों और साहित्य की दुकान मंदिर के प्रांगण में उपलब्ध है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: श्री जैन मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में रेलवे स्टेशन क्षेत्र के निकट स्थित है। भदोही रेलवे स्टेशन (BHB) से पैदल दूरी पर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: यहाँ भगवान महावीर स्वामी की प्राचीन एवं मनमोहक प्रतिमा है, साथ ही शांत वातावरण, प्रेक्षा ध्यान केंद्र और नियमित प्रवचन इसकी विशेषताएँ हैं।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। महावीर जयंती और पर्यूषण के अवसर पर विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: भदोही में कई धर्मशालाएँ और निजी होटल उपलब्ध हैं। मंदिर परिसर के पास शुद्ध जैन भोजन की दुकानें मौजूद हैं। बेहतर आवास के लिए वाराणसी भी निकट है।

प्रश्न 6: भदोही कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: भदोही रेलवे स्टेशन (BHB) कई ट्रेनों से जुड़ा है। सड़क मार्ग से वाराणसी, प्रयागराज, और आसपास के शहरों से बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप विशेष अभिषेक, स्नात्र पूजा या प्रतिक्रमण का आयोजन करवा सकते हैं।

📝 श्री जैन मंदिर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

श्री जैन मंदिर, भदोही रेलवे स्टेशन क्षेत्र जैन धर्म के अनुयायियों और आध्यात्मिक साधकों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ है। यहाँ की शांति, प्राचीन प्रतिमाएँ और नियमित साधना सभी को अद्भुत आंतरिक शांति प्रदान करती हैं।

यह स्थान न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अहिंसा, संयम और आत्म-शुद्धि के संदेश को भी जीवंत रखता है। चाहे आप जैन धर्म को मानने वाले हों या केवल शांति की खोज में हों, यह मंदिर आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

भदोही की कारपेट नगरी में स्थित यह मंदिर सभी के लिए समान रूप से आकर्षण का केंद्र है। यहाँ की प्रेक्षा ध्यान शिविर, प्रवचन और सामूहिक पूजा साधकों को जीवन की सच्ची दिशा दिखाती है।

🙏 नमो अरिहंताणं, नमो सिद्धाणं, नमो आयरियाणं, नमो उवज्झायाणं, नमो लोए सव्व साहूणं ।।

🕊️ श्री जैन मंदिर – भदोही रेलवे स्टेशन क्षेत्र
अहिंसा, साधना और शांति का प्रमुख धाम

सनातन संस्कृति के विभिन्न त्यौहारों, व्रत और व्रत कथाओं की सटीक जानकारी के लिए हमारे सनातन कैलेंडर २०२६ का अवलोकन करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 23 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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