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प्रामाणिक मंदिर विवरण

तिलंगेश्वरनाथ मंदिर – भदोही: भगवान शिव का प्राचीन एवं भव्य धाम | Tilangeshwarnath Mandir Bhadohi: A Sacred Shiva Temple

166 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 23 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Tilangeshwarnath आराध्य देव
5:00 AM – 12:00 PM, 4:00 PM – 9:00 PM दर्शन समय
शाम: 7:00 PM (आरती), सोमवार: विशेष अभिषेक आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Tilangeshwarnath
दर्शन समय 5:00 AM – 12:00 PM, 4:00 PM – 9:00 PM
आरती समय शाम: 7:00 PM (आरती), सोमवार: विशेष अभिषेक
स्थान / पता Tilangeshwarnath Mandir, Bhadohi, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 तिलंगेश्वरनाथ मंदिर – भदोही

भगवान शिव की तपोभूमि, जहाँ हर बोल "हर हर महादेव" (Tilangeshwarnath Mandir, Bhadohi)

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में स्थित एक अति प्राचीन शिव मंदिर

🌟 परिचय: तिलंगेश्वरनाथ मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले (जिसे संत रविदास नगर के नाम से भी जाना जाता है) में स्थित तिलंगेश्वरनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन, ऐतिहासिक और आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए भी श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है।

यहाँ की पवित्रता, शिवलिंग की दिव्यता, और नियमित रूप से होने वाली रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, एवं महाशिवरात्रि के भव्य आयोजन मन को अद्भुत शांति और ऊर्जा प्रदान करते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और उन्हें आध्यात्मिक सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

यह स्थान अपने आप में एक तपोवन के समान है, जहाँ भोलेनाथ की उपासना से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

तिलंगेश्वरनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के मुख्यालय भदोही नगर में स्थित है। भदोही, जिसे पूर्व में संत रविदास नगर कहा जाता था, वाराणसी से लगभग 45 किमी और इलाहाबाद (प्रयागराज) से लगभग 120 किमी दूर है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: वाराणसी (काशी) – लगभग 45 किमी
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन भदोही (स्टेशन कोड: BOY) है, जो दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, वाराणसी आदि प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
  • सड़क मार्ग: भदोही राष्ट्रीय राजमार्ग NH 19 (पुराना NH 2) से जुड़ा है। वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ से नियमित बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 50 किमी दूर है।
🗺️

भदोही, उत्तर प्रदेश

वाराणसी से दूरी: ~45 किमी
प्रयागराज से दूरी: ~120 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

तिलंगेश्वरनाथ मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार, प्राचीन काल में यह क्षेत्र तपस्या और साधना का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। एक मान्यता है कि यहाँ पर एक महान ऋषि ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने उन्हें दर्शन दिए और इस स्थान पर स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजमान हो गए।

इस शिवलिंग को "तिलंगेश्वरनाथ" कहा जाने लगा, क्योंकि यहाँ के राजा तिलंग ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। समय के साथ, विभिन्न राजवंशों (जैसे गहड़वाल, मुगलकाल में भी स्थानीय सामंतों) ने मंदिर का संरक्षण किया। आज भी यह मंदिर अपनी प्राचीनता और शिल्पकला के लिए जाना जाता है।

कहा जाता है कि इस मंदिर में स्थित शिवलिंग पर प्रतिदिन जल चढ़ाने से भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

🕉️

"यह शिवलिंग अत्यंत प्राचीन एवं स्वयंभू माना जाता है।"

मान्यता: यहाँ आकर भगवान शिव का सच्चे मन से स्मरण करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 मनमोहक शिवलिंग और नक्काशी

तिलंगेश्वरनाथ मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय नागर शैली में निर्मित है, जिसमें सुंदर नक्काशी, भव्य शिखर और विशाल प्रांगण देखने को मिलता है। गर्भगृह में भगवान शिव का प्राचीन शिवलिंग विराजमान है, जिस पर चांदी का मुकुट और बेलपत्र-धतूरे की सजावट अद्भुत लगती है।

🎨 भित्ति चित्र और मूर्तियाँ

मंदिर की दीवारों पर शिव-पुराण की विभिन्न कथाओं, जैसे समुद्र मंथन, त्रिपुरासुर वध आदि के दृश्य उत्कीर्ण हैं। परिसर में भगवान गणेश, माता पार्वती, और नंदी की सुंदर प्रतिमाएँ स्थापित हैं।

🌳 शांत वाटिका और यज्ञशाला

मंदिर का विशाल प्रांगण हरियाली से परिपूर्ण है। यहाँ एक सुंदर वाटिका और भव्य यज्ञशाला है, जहाँ समय-समय पर हवन-यज्ञ और रुद्राभिषेक का आयोजन होता है।

🧘 भक्ति, योग और सत्संग का केंद्र

तिलंगेश्वरनाथ मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

🔱

रुद्राभिषेक

प्रत्येक सोमवार और श्रावण मास में विशेष रुद्राभिषेक का आयोजन होता है, जिसमें हजारों भक्त शामिल होते हैं।

📿

शिव महापुराण कथा

वर्ष में कई बार शिव महापुराण की कथा का आयोजन किया जाता है, जिसमें भक्त बड़ी संख्या में सहभागिता करते हैं।

🧘‍♂️

ध्यान एवं योग

प्रातःकाल मंदिर परिसर में योग और ध्यान शिविर लगाए जाते हैं, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

ये सभी क्रियाएँ भक्तों को आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं, जिससे उनका जीवन आनंदमय हो जाता है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • कष्ट निवारण: मान्यता है कि यहाँ विधि-विधान से जलाभिषेक करने से सभी प्रकार के कष्ट, रोग और शोक दूर हो जाते हैं।
  • मनोवांछित फल की प्राप्ति: सच्चे मन से शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और जल चढ़ाने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  • आध्यात्मिक उन्नति: यहाँ नियमित सत्संग और शिव भजन से भक्ति में रुचि बढ़ती है और आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • विवाह में सुख-शांति: इस मंदिर में विशेष पूजा करवाने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और अड़चनें दूर होती हैं।
  • नेगेटिव एनर्जी से मुक्ति: मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक प्रभावों को दूर करती है और मन को शुद्ध करती है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🕉️

महाशिवरात्रि

भगवान शिव का सबसे बड़ा पर्व। यहाँ रात्रि जागरण, महारुद्राभिषेक, और भव्य शोभायात्रा का आयोजन होता है। हजारों भक्त दर्शन करने आते हैं।

🌿

श्रावण मास

पूरे सावन माह में यहाँ विशेष जलाभिषेक और कांवड़ यात्रा का आयोजन होता है। मंदिर परिसर भक्तों से भरा रहता है।

🎨

होली / रंगभरी एकादशी

यहाँ होली पर भगवान शिव का विशेष श्रृंगार और भक्तों द्वारा अबीर-गुलाल के साथ उत्सव मनाया जाता है।

🪔

कार्तिक पूर्णिमा

इस दिन मंदिर में दीपदान और विशेष आरती का आयोजन होता है।

📿

शिव महापुराण सप्ताह

वर्ष में एक बार सात दिवसीय शिव पुराण कथा का आयोजन किया जाता है, जो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • वाराणसी (काशी): विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, भारत माता मंदिर, सारनाथ – लगभग 45 किमी।
  • प्रयागराज (इलाहाबाद): त्रिवेणी संगम, अल्फ्रेड पार्क, हनुमान मंदिर, आनंद भवन – लगभग 120 किमी।
  • भदोही के अन्य मंदिर: ज्ञानेश्वर महादेव मंदिर, माँ विन्ध्यवासिनी मंदिर, और संत रविदास जी की जन्मस्थली (सीर गोवर्धनपुर) भदोही में ही स्थित हैं।
  • चुनारगढ़ किला: ऐतिहासिक चुनार किला, जो भदोही से लगभग 30 किमी दूर है।
  • मिर्जापुर: विन्ध्याचल धाम, आसफ़ किला, और सीता कुंड – लगभग 60 किमी।
📌 यात्रा टिप: वाराणसी या प्रयागराज की यात्रा के साथ तिलंगेश्वरनाथ मंदिर, भदोही को अवश्य शामिल करें। यहाँ से संत रविदास जी की जन्मस्थली और चुनारगढ़ किला एक ही दिन में देखे जा सकते हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

भदोही में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे मंदिर परिसर में भ्रमण और धार्मिक क्रियाएँ सुखद रहती हैं।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • श्रावण मास (जुलाई-अगस्त): यदि आप शिव भक्ति की धूम देखना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।
  • महाशिवरात्रि (फरवरी-मार्च): विशेष उत्सव के लिए इस समय आएँ।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है।
  • शाम की आरती (लगभग 7:00 बजे) में शामिल हों, यह अत्यंत मनमोहक होती है।
  • सोमवार के दिन विशेष जलाभिषेक होता है, जल चढ़ाने के लिए सुबह जल्दी पहुँचें।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजनालय उपलब्ध हैं।
  • प्रसाद के रूप में यहाँ का "भांग" (धार्मिक परंपरा में) और बेलपत्र विशेष रूप से चढ़ाए जाते हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: तिलंगेश्वरनाथ मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के मुख्यालय भदोही नगर में स्थित है। वाराणसी से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता यहाँ का प्राचीन स्वयंभू शिवलिंग, भव्य वास्तुकला, और यहाँ आयोजित होने वाले रुद्राभिषेक एवं शिव महापुराण कथा हैं। साथ ही, यह स्थान अपनी शांत वाटिका और शिव भक्ति के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। श्रावण मास और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: भदोही में कई धर्मशालाएँ और निजी होटल उपलब्ध हैं। बेहतर आवास के लिए वाराणसी भी निकट है। मंदिर परिसर के पास शुद्ध शाकाहारी भोजन की दुकानें मौजूद हैं।

प्रश्न 6: भदोही कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: भदोही रेलवे स्टेशन (BOY) प्रमुख ट्रेनों से जुड़ा है। सड़क मार्ग से वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ से नियमित बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप विशेष रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, या सत्संग का आयोजन करवा सकते हैं।

📝 तिलंगेश्वरनाथ मंदिर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

तिलंगेश्वरनाथ मंदिर, भदोही उत्तर प्रदेश का एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ शिव भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्तों को भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त करने का अवसर भी देता है।

यहाँ का प्राचीन शिवलिंग, भव्य रुद्राभिषेक, और नियमित रूप से होने वाले सत्संग एवं शिव भजन हर किसी को भक्ति-रस में डुबो देते हैं। चाहे आप सच्चे भक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

भदोही की पवित्र भूमि पर स्थित यह मंदिर उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो भगवान शंकर की अनन्य भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना रखते हैं।

🙏 हर हर महादेव ।। ॐ नमः शिवाय ।।

🕉️ तिलंगेश्वरनाथ मंदिर – भदोही
शिव भक्ति, संस्कृति और शांति का साक्षात् धाम

सनातन संस्कृति के विभिन्न त्यौहारों, व्रत और व्रत कथाओं की सटीक जानकारी के लिए हमारे सनातन कैलेंडर २०२६ का अवलोकन करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 23 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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