डूब चलो दिन माई डूब चलो दिन (Doob Chal Din Mai Lyrics in Hindi) -
डूब चलो दिन माई डूब चलो दिन
सांझ भई मन्दिर में डूब चलो दिन।।
काहे के मैया दिवला बनो है
काहे के डारि डोर मोरी मैया
डुब चलो दिन माई डुब चलो दिन।।
सोने के मैया दिवला बनो है
रुबा की डारि डोर मोरी मैया
डुब चलो दिन माई डुब चलो दिन।।
कौना सुहागन दिवरा जरावे
कौना ने डारि डोर मोरी मैया
डुब चलो दिन माई डुब चलो दिन।।
सीता सुहागन दिवरा जरावे
रामा ने डारि डोर मोरी मैया
डुब चलो दिन माई डुब चलो दिन।।
काहाँ बनी मोरी माई की मढ़ैया
कौन है रखवारी मोरी मैया
डुब चलो दिन माई डुब चलो दिन।।
ऊँची पहड़िया बनी माई की मढ़ैया
लंगुरे है रखवारी मोरी माँ
डूब चलो दिन माई डुब चलो दिन।।
कुमर सुमर माई तोरे जस गावे
मैया लगा दो पार मोरी मैया
डुब चलो दिन माई डुब चलो दिन
डुब चलो दिन माई डूब चलो दिन
सांझ भई मन्दिर में डूब चलो दिन।।
*** Singer : Rakesh Tiwari ***
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन " डूब चलो दिन माई डूब चलो दिन (Doob Chal Din Mai Lyrics in Hindi) - Maa Durga Bhajan by Rakesh Tiwari - Bhaktilok " जगत जननी की कृपा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माता के ममतामयी और दुष्टनाशिनी रूप का वर्णन करती है।
भजन का मूल स्वर माता के प्रति समर्पण का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी मां उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।
मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। देवी भजनों के संकीर्तन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार तथा नौकरी में उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
माता की पूजा के लिए शुक्रवार, अष्टमी तिथि और नवरात्रि का काल सर्वोत्तम है। पूजा स्थान पर लाल फूल, धूप-दीप अर्पित कर मां के सामने घी का अखण्ड ज्योत जलाएं और भक्तिभाव से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से कब करना चाहिए?
यद्यपि नियमित संकीर्तन उत्तम है, किन्तु शुक्रवार के दिन और शारदीय व चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के भजन असीम सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।
देवी पूजा में किस रंग के वस्त्रों का उपयोग करना शुभ माना जाता है?
माता दुर्गा और शक्ति स्वरूपा देवी पूजा में लाल, पीले अथवा नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।
क्या देवी उपासना से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं?
हाँ, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें