Durga Bhajan Lyrics

संपूर्ण दुर्गा सप्तश्लोकी (Sampurna durga saptshloki Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

175 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

माँ दुर्गा की करुणा का सर्वोच्च स्तोत्र

माँ दुर्गा की आराधना से सभी संदेह और संकट दूर होते हैं। हर हृदय को शक्ति प्रदान करती हैं।

ॐ आह्लादिनी महादेवि अदृष्टा दृष्टा सुखदायी शरणगता भव दुर्गा भद्रकाली गगने गुनसंपन्न ह्रीं मं ह्लीं श्री पराक्रमा महाक्रिया तामिः शान्तिः मम ममता जय जय जय जय महाकाली दुष्टवैरिनाशिनि ज्वलित शरणं तष्ट बृषसुरिहा बाकाश्वर महादेव/दुर्गा भक्तिदायिनी सच्चिदानंद गूँजती/निकेली तीर/महामाँ साक्षात्कार/जय जय जय मातंगी सर्वे आदमी करो मूल रत्नकुंदल मिट्ठा हरा कनकवन बहुत महादेव विशाल ह्यांगार-कुमात मुचालनी जय जय महाकाली धरण-कतार आवाग/बापु संगुर दीदेंगे राज्ञी बृहत ब्राब्रली तामिः पुन अपने अदबासूँ
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

संपूर्ण दुर्गा सप्तश्लोकी देवी दुर्गा की विशेष स्तुति है, जिसमें उनकी अनेक विशेषताओं और शक्तियों का वर्णन किया गया है। यह स्त्रोत उन भक्तों के लिए है, जो माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं। इस स्तोत्र में माँ दुर्गा की विभिन्न रूपों के प्रति भक्ति और श्रद्धा प्रकट की गई है। यह बताया गया है कि जब भक्त सच्चे मन से माँ दुर्गा की पूजा करते हैं, तो वह उनके जीवन में आशीर्वाद बरसाती हैं। माँ दुर्गा को समर्पित यह स्तोत्र प्रत्येक संकट में उनकी शरण में आने की प्रेरणा देता है। इन्हें 'महाकाली', 'भद्रकाली', और 'आह्लादिनी' के रूप में वर्णित किया गया है। यह हर मानव को सूचित करता है कि माँ केवल रक्षा नहीं करतीं, बल्कि आंतरिक सुख और आनंद प्रदान करने में भी सक्षम हैं।

इस स्तोत्र की पंक्तियाँ भावनाओं से भरी हुई हैं। भक्त जब सूर्योदय या सूर्यास्त पर इसे गाते हैं, तब उनके हृदय में एक विशेष तृप्ति और शांति का अनुभव होता है। इनमें माँ दुर्गा की भक्ति की गहराई और उनकी अद्भुत करुणा को भावाकुलता से दर्शाया गया है। भक्त की ईमानदारी और प्रेम से अर्पित शब्दों के माध्यम से माँ दुर्गा अपने भक्तों की हर पुकार को सुनती हैं। इसका भावार्थ यह है कि जब हम अपनी समस्याओं को माँ के चरणों में समर्पित करते हैं, तब वह हमें अवश्य मार्गदर्शन करती हैं। इस प्रकार, भक्ति का मार्ग केवल समस्या के समाधान तक सीमित नहीं है, यह शांति के अनुभव की एक अन्यतम साधना है।

इस स्त्रोत के माध्यम से भक्ति मार्ग की भावना भी स्पष्ट होती है। भक्ति केवल भौतिक साधनों के इर्द-गिर्द नहीं घूमती, बल्कि यह आत्मिक जुड़ाव और परिश्रमी प्रयास का परिणाम होती है। जब भक्त माँ दुर्गा के प्रति अपनी शुद्ध निष्ठा व्यक्त करता है, तब यह उस ब्रह्मांड की ऊर्जाओं से जुड़ने का अनुभव है जो उसे उसके उद्देश्य की ओर अग्रसित करता है। यदि हम इस स्त्रोत का नियमित पाठ करें, तो हमारे समस्त कर्मों में सफलता और सुख की प्राप्ति होती है। घोषित किए गए शब्द हमें अपने भीतर के डर को पार करने और आंतरिक शक्ति को जागृत करने के लिए प्रेरित करते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

संपूर्ण दुर्गा सप्तश्लोकी का महत्व हिंदू धर्म में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां माता दुर्गा को शक्ति, साहस, और धैर्य की देवी माना जाता है। पुराणों में यह उल्लेखित है कि जब भी असुरों ने धरती पर आतंक फैलाया, तब देवी दुर्गा ने अपने विभिन्न रूपों में अवतार लिया और उन असुरों का नाश किया। रामायण और महाभारत में भी देवी दुर्गा की महिमा का वर्णन किया गया है। ये श्लोक उन भक्तों को सुरक्षा और शक्ति प्रदान करने के लिए एक अद्भुत साधना के रूप में कार्य करते हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। संपूर्ण दुर्गा सप्तश्लोकी का पाठ करने से मानसिक तनाव कम होता है और आध्यात्मिक शांति मिलती है। भक्ति के माध्यम से हम अपने हृदय की शुद्धता को बढ़ा सकते हैं। यह मानसिक प्रभाव से लेकर शारीरिक स्वास्थ्य तक कई सकारात्मक लाभ प्रदान करता है। नियमित रूप से chant करने से एकाग्रता, आत्मविश्वास और सच्चे सकारात्मक विचारों की वृद्धि होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस स्त्रोत का पाठ सुबह और शाम, विशेष रूप से नवरात्रि या शक्ति पर्वों पर करना शुभ होता है। पाठ करते समय ताजगी से भरा वातावरण होना चाहिए। एक दीया जलाना और माँ दुर्गा के प्रति सच्चे मन से श्रद्धा के साथ उपस्थित होना, इस पाठ की सच्ची आस्था को प्रकट करता है। सीधे बैठकर मन में श्रद्धा और समर्पण का भाव होना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

संपूर्ण दुर्गा सप्तश्लोकी का पाठ किस दिन करना चाहिए?

संपूर्ण दुर्गा सप्तश्लोकी का पाठ विशेष रूप से नवरात्रि या दुर्गा पूजा के समय करना शुभ होता है।

क्या इस स्तोत्र को एक बार पढ़ना पर्याप्त है?

नहीं, इस स्तोत्र का नियमित पाठ, विशेषकर श्रद्धापूर्वक, श्रद्धा और भक्ति के साथ करना उपकारक होता है।

क्या इस स्तोत्र का पाठ करने से संतान सुख मिलता है?

जी हाँ, माँ दुर्गा की कृपा से भक्तों को प्रतिज्ञा की जाती है कि वे संतान सुख और परिवार में समृद्धि प्राप्त करेंगे।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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