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साँवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी सेठाणी है (राधा-कृष्ण भजन) लिरिक्स | Sanwario Hai Seth Radha Krishna Bhajan Lyrics

382 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 साँवरियो है सेठ – म्हारी राधा जी सेठाणी है

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

(Sanwario Hai Seth – Mhari Radha Ji Sethani Hai) – Radha-Krishna Bhajan

🎵 तर्ज: “एक तेरा साथ हम को दो जहां से प्यारा है”

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: राधा-कृष्ण भजन / राजस्थानी लोक भजन
🎶 भाव: श्रद्धा, प्रेम, साम्राज्योपमा
📍 विशेषता: कृष्ण-राधा को सेठ-सेठाणी (व्यापारी-पत्नी) रूप में संबोधित करने वाला अद्भुत भजन
📀 प्रचलन: राजस्थानी भाषा में रचित, पूरे उत्तर भारत में राधा-कृष्ण भक्तों में अत्यधिक प्रिय

📜 भजन लिरिक्स (राजस्थानी-हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

साँवरियो है सेठ,
म्हारी राधा जी सेठाणी है।
साँवरियो है सेठ,
म्हारी राधा जी सेठाणी है,
ये सारी दुनिया जानी है॥

॥ अंतरा १ – राजाओं के राजा, महारानी की रानी ॥

राजाओं के राजा,
महारानी की रानी,
सिरमौर मुकुट राजे है।
दरबार निराला,
लगे जोड़ी प्यारी,
राधा के संग साजे है।
सोने पल में सेठ,
सोने पल में सेठ,
सोने पल में सेठाणी है,
ये सारी दुनिया जानी है॥

॥ अंतरा २ – भक्ताँ पे है राजी, करे घणो लाड़ ॥

साँवरिया राधा जी,
भक्ताँ पे है राजी,
करे घणो लाड़ है।
भंडार लुटावे है,
हर बात बनावे है,
भक्ताँ रा ठाठ है।
देवे छप्पर फाड़,
देवे छप्पर फाड़,
नहीं इनसो कोई दानी है,
ये सारी दुनिया जानी है॥

॥ अंतरा ३ – सुख-दुख में साथ, नरसी रो एक काम ॥

सुख-दुख में साँवरिया,
सुख-दुख में राधा जी,
सदा मेरे साथ है।
मेरी चिंता दूर करें,
मेरी विपदा दूर करें,
रख लेवे बात है।
नरसी रो तो एक काम,
नरसी रो तो एक काम,
बस एक हाजरी लगाणी है,
ये सारी दुनिया जानी है॥

साँवरियो है सेठ,
म्हारी राधा जी सेठाणी है।
साँवरियो है सेठ,
म्हारी राधा जी सेठाणी है,
ये तो जाने दुनिया सारी है॥

🎵 रचनाकार : लोक परम्परा (राजस्थानी भजन)

🗣️ भाषा: राजस्थानी-हिन्दी मिश्रित

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अद्भुत राजस्थानी भजन राधा-कृष्ण को सेठ (व्यापारी) और सेठाणी (व्यापारी पत्नी) के रूप में संबोधित करता है। “साँवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी सेठाणी है” – साँवरियो (श्याम सुंदर कृष्ण) सेठ हैं और राधा जी सेठाणी हैं। भक्त कहता है कि यह बात पूरी दुनिया जानती है।

पहले अंतरे में उनकी भव्यता का वर्णन है – वे “राजाओं के राजा, महारानी की रानी” हैं। उनका दरबार निराला है, और राधा के साथ उनकी जोड़ी अत्यंत प्यारी लगती है। “सोने पल में सेठ, सेठाणी” – वे स्वर्णिम हैं।

दूसरे अंतरे में उनके भक्तों पर अनुग्रह का वर्णन है – “भक्ताँ पे है राजी, करे घणो लाड़ है” (भक्तों पर राजी हैं, बहुत लाड़ करते हैं)। वे भंडार लुटाते हैं, भक्तों की हर बात बनाते हैं। “देवे छप्पर फाड़” – इतनी उदारता से देते हैं कि छप्पर फाड़कर दें। उनसे बढ़कर कोई दानी नहीं।

तीसरे अंतरे में भक्त की भावना है – “सुख-दुख में साँवरिया, सुख-दुख में राधा जी, सदा मेरे साथ है”। वे चिंता और विपदा दूर करते हैं। भक्त (नरसी) कहता है – मुझे तो केवल एक ही काम है, उनकी हाजरी (उपस्थिति) लगानी है।

यह भजन राधा-कृष्ण को अपने घर के स्वामी-स्वामिनी के रूप में स्थापित करता है, जो भक्तों की हर आवश्यकता पूरी करते हैं और सदा उनके साथ रहते हैं।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

सेठ-सेठाणी का संबोधन: इस भजन में कृष्ण-राधा को व्यापारी परिवार के मुखिया के रूप में दर्शाया गया है। “सेठ” का अर्थ है धनी व्यापारी, और “सेठाणी” उनकी धर्मपत्नी। यह भजन उनकी समृद्धि, उदारता और वैभव को दर्शाता है।

भक्तों की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति: “भंडार लुटावे है” और “देवे छप्पर फाड़” जैसी पंक्तियाँ राधा-कृष्ण की असीम दानशीलता और भक्तों पर कृपा का बखान करती हैं।

सुख-दुख में साथ का भाव: यह भजन सिखाता है कि राधा-कृष्ण सदा भक्तों के साथ हैं – सुख में भी और दुख में भी। उनकी उपस्थिति ही सबसे बड़ा आशीर्वाद है।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

राधा-कृष्ण ही इस संसार के सच्चे स्वामी हैं। उनकी कृपा से भक्त को सब कुछ मिलता है। उनकी हाजरी (सान्निध्य) ही सबसे बड़ी उपलब्धि है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन राधा-कृष्ण के प्रति भक्तों के समर्पण और विश्वास को व्यक्त करता है। वे न केवल देवता हैं, बल्कि हमारे अपने घर के स्वामी, मित्र और संरक्षक भी हैं।

🙏 राधे-राधे ।। जय श्री कृष्ण ।। साँवरियो सेठ की जय ।।

॥ इति राजस्थानी राधा-कृष्ण भजनम् ॥
॥ साँवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी सेठाणी है, ये सारी दुनिया जानी है ॥
श्रेणियां: radha bhajan

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा उपलब्ध प्रामाणिक स्रोतों के संदर्भ में समीक्षा एवं संपादन के बाद प्रकाशित किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

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