आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
प्रामाणिक मंदिर विवरण

चिन्मय मिशन मंदिर, रसूलाबाद घाट: आध्यात्मिक शांति और वेदांत ज्ञान का केंद्र - Chinmaya Mission Temple, Rasulabad Ghat: A Center for Spiritual Peace and Vedantic Wisdom

186 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 22 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Ram आराध्य देव
5:00 AM - 12:00 PM, 4:00 PM - 8:00 PM दर्शन समय
Ganga Aarti at Rasulabad Ghat: Sunset Time (Approx. 6:00-7:00 PM) आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Ram
दर्शन समय 5:00 AM - 12:00 PM, 4:00 PM - 8:00 PM
आरती समय Ganga Aarti at Rasulabad Ghat: Sunset Time (Approx. 6:00-7:00 PM)
स्थान / पता Chinmaya Mission Temple, Rasulabad Ghat, Prayagraj, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🕉️ चिन्मय मिशन मंदिर, रसूलाबाद घाट

आध्यात्मिक शांति और वेदांत ज्ञान का अद्भुत संगम (Chinmaya Mission Temple, Rasulabad Ghat)

प्रयागराज के पवित्र गंगा तट पर स्थित एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र

🌟 परिचय: चिन्मय मिशन मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

संगम नगरी प्रयागराज के पवित्र रसूलाबाद घाट पर स्थित चिन्मय मिशन मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि वेदांत दर्शन, योग और आध्यात्मिक ज्ञान का एक जीवंत केंद्र है। यह मंदिर आध्यात्मिक गुरु स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाओं से प्रेरित है और सनातन धर्म के गहन दर्शन को सरल भाषा में समझाने का कार्य करता है।

रसूलाबाद घाट पर गंगा नदी के शांत और पवित्र वातावरण में स्थित यह मंदिर, भक्तों और जिज्ञासुओं को आत्म-साक्षात्कार के पथ पर अग्रसर करता है। यहाँ का वातावरण ध्यान, मनन और चिंतन के लिए अत्यंत उपयुक्त है। गंगा की लहरों की ध्वनि और मंदिर के शांत वातावरण में बैठकर मन को अद्भुत शांति का अनुभव होता है।

चिन्मय मिशन की स्थापना स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती द्वारा की गई थी, जिन्होंने गीता, उपनिषद और वेदांत के जटिल ग्रंथों को सरल और रोचक बनाकर आम जनता तक पहुँचाया। यह मंदिर उसी परंपरा का एक प्रकाश स्तंभ है, जहाँ नियमित रूप से प्रवचन, योग सत्र, और बाल-विहार जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

चिन्मय मिशन मंदिर, प्रयागराज के रसूलाबाद घाट पर स्थित है। रसूलाबाद घाट गंगा नदी के तट पर स्थित एक प्राचीन और प्रसिद्ध घाट है, जो शहर के मुख्य भाग से सुलभ रूप से जुड़ा हुआ है।

  • निकटतम प्रमुख स्थान: रसूलाबाद घाट, गंगा तट, प्रयागराज।
  • रेल मार्ग: प्रयागराज जंक्शन (प्रयागराज रेलवे स्टेशन) सबसे निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन है, जो देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है। स्टेशन से मंदिर लगभग 5-6 किमी की दूरी पर है।
  • सड़क मार्ग: प्रयागराज शहर सड़क मार्ग द्वारा उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों से अच्छी तरह जुड़ा है। ऑटो, टैक्सी और सिटी बसें आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज हवाई अड्डा (बमरौली) है, जो शहर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
🗺️

रसूलाबाद घाट, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

प्रयागराज जंक्शन से दूरी: ~5-6 किमी
गंगा तट: पवित्र नदी के तट पर स्थित

📜 मंदिर का इतिहास और स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाएं

चिन्मय मिशन की स्थापना 1953 में स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती (बालकृष्ण मेनन) द्वारा की गई थी। उनका जीवन एक साधारण व्यक्ति से एक महान आध्यात्मिक गुरु बनने की अद्भुत यात्रा है। केरल में जन्मे और लंदन में पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त करने वाले बालकृष्ण मेनन, स्वामी शिवानंद के संपर्क में आने के बाद सन्यासी बन गए और वेदांत के प्रचार-प्रसार में अपना जीवन समर्पित कर दिया।

प्रयागराज का यह केंद्र उनकी शिक्षाओं का एक प्रतिबिंब है। यहाँ का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि व्यक्ति के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित करना है। मंदिर में स्थित सुंदर मूर्तियाँ, शांत प्रांगण, और पुस्तकालय इसे एक अद्वितीय आध्यात्मिक स्थल बनाते हैं।

स्वामी चिन्मयानंद ने "गीता ज्ञान यज्ञ" की परंपरा शुरू की, जिसमें वे शहर-दर-शहर जाकर भगवद्गीता पर प्रवचन देते थे। यह परंपरा आज भी चिन्मय मिशन के सभी केंद्रों पर नियमित रूप से जारी है।

🙏

"हर मनुष्य में ईश्वर का अंश है, बस उसे पहचानने की आवश्यकता है।"
- स्वामी चिन्मयानंद

यह मंदिर स्वामीजी के उस मूल मंत्र "प्रेम और सेवा" के सिद्धांत को आगे बढ़ाता है।

🏛️ मंदिर की वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 भगवान श्रीराम और माता सीता की प्रतिमा

मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की सुंदर प्रतिमाएं स्थापित हैं। ये प्रतिमाएं अपनी कलात्मक सुंदरता और भव्यता के लिए प्रसिद्ध हैं। भक्त यहाँ आकर श्रद्धापूर्वक दर्शन करते हैं और परम शांति का अनुभव करते हैं।

🌿 गंगा तट पर स्थिति

रसूलाबाद घाट पर स्थित होने के कारण मंदिर की स्थिति अत्यंत मनोरम है। गंगा नदी के शांत जल और घाट की प्राचीन छटा मंदिर की सुंदरता में चार चाँद लगाती है। यहाँ सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य अद्भुत होता है।

📚 पुस्तकालय और अध्ययन केंद्र

मंदिर परिसर में एक समृद्ध पुस्तकालय है, जहाँ स्वामी चिन्मयानंद और अन्य आध्यात्मिक गुरुओं की सैकड़ों पुस्तकें, गीता, उपनिषद और वेदांत पर गहन साहित्य उपलब्ध है। यह स्थान ज्ञान-साधकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।

🧘 योग, ध्यान और आध्यात्मिक कार्यक्रम

चिन्मय मिशन मंदिर नियमित रूप से विभिन्न आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जो सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए खुले हैं।

🧘‍♂️

ध्यान शिविर

प्रतिदिन सुबह और शाम को नियमित ध्यान सत्र आयोजित किए जाते हैं। यहाँ ध्यान की विभिन्न विधियाँ सिखाई जाती हैं, जो मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक हैं।

📖

गीता ज्ञान यज्ञ

समय-समय पर भगवद्गीता पर आधारित प्रवचन और ज्ञान यज्ञ आयोजित किए जाते हैं। ये प्रवचन जीवन के व्यावहारिक पहलुओं पर केंद्रित होते हैं।

👧

बाल विहार

बच्चों के लिए विशेष रूप से "बाल विहार" कार्यक्रम चलाया जाता है, जहाँ उन्हें संस्कार, नैतिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति से जोड़ा जाता है।

इन कार्यक्रमों के माध्यम से मंदिर न केवल आध्यात्मिक उन्नति के अवसर प्रदान करता है, बल्कि सामुदायिक सेवा और सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देता है।

🪔 रसूलाबाद घाट की गंगा आरती: एक अद्भुत अनुभव

चिन्मय मिशन मंदिर के समीप रसूलाबाद घाट पर प्रतिदिन शाम को गंगा आरती का आयोजन होता है। यह आरती अपने भव्य स्वरूप और आध्यात्मिक अनुभव के लिए प्रसिद्ध है।

  • समय: प्रतिदिन सूर्यास्त के समय (मौसम के अनुसार लगभग 6:00-7:00 बजे)
  • विशेषता: बड़े-बड़े दीपक, मंत्रोच्चार, और भजन-कीर्तन के बीच गंगा मैया की आरती की जाती है।
  • अनुभव: गंगा के पवित्र जल में दीप प्रवाहित करना और आरती में सम्मिलित होना अद्भुत शांति और आनंद का अनुभव देता है।

यह आरती प्रयागराज के अन्य घाटों की आरती की तरह ही भव्य और आकर्षक होती है। कई पर्यटक और श्रद्धालु विशेष रूप से इस आरती में सम्मिलित होने के लिए यहाँ आते हैं।

🪔

गंगा आरती, रसूलाबाद घाट

शाम का समय: सूर्यास्त के पश्चात
दीपदान: मोक्ष की प्राप्ति हेतु

🏞️ प्रयागराज के अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थल

  • त्रिवेणी संगम: गंगा, यमुना और सरस्वती का पवित्र संगम। यहाँ स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
  • अक्षयवट: प्राचीन बरगद का पेड़, जिसका उल्लेख महाभारत और रामायण में मिलता है।
  • आल्फ्रेड पार्क: प्रयागराज का ऐतिहासिक पार्क, जहाँ चंद्रशेखर आज़ाद ने शहीदी प्राप्त की थी।
  • आनंद भवन: नेहरू-गांधी परिवार का ऐतिहासिक घर, जो अब एक संग्रहालय है।
  • इलाहाबाद किला: सम्राट अकबर द्वारा निर्मित विशाल किला, जो संगम के तट पर स्थित है।
  • हनुमान मंदिर (संगम तट): लेटे हुए हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर।
  • पातालपुरी मंदिर: भूमिगत मंदिर, जो संगम क्षेत्र में स्थित है।
📌 यात्रा टिप: चिन्मय मिशन मंदिर के दर्शन के बाद आप रसूलाबाद घाट की गंगा आरती देख सकते हैं, और फिर संगम स्नान और अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा कर सकते हैं। सभी स्थल एक-दूसरे से 3-8 किमी के दायरे में स्थित हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

प्रयागराज की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना और ठंडा रहता है, जिससे धार्मिक स्थलों का भ्रमण सुखद होता है।

  • माघ मेला (जनवरी-फरवरी): यदि आप विशाल धार्मिक आयोजन देखना चाहें तो माघ मेले का समय सबसे उत्तम है, लेकिन भीड़ अत्यधिक होती है।
  • कुंभ मेला: प्रत्येक 12 वर्ष में लगने वाला विश्व प्रसिद्ध कुंभ मेला भी दर्शनीय है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर के ध्यान और प्रवचन सत्रों की समय-सारिणी पहले से जान लें।
  • गंगा आरती में सम्मिलित होने के लिए शाम 5:30 बजे तक घाट पर पहुँच जाएँ।
  • संगम स्नान के लिए सुबह का समय सबसे उपयुक्त है।
  • गर्मियों में यात्रा से बचें, क्योंकि तापमान बहुत अधिक हो जाता है।
  • मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: चिन्मय मिशन मंदिर, प्रयागराज कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह मंदिर प्रयागराज के रसूलाबाद घाट पर स्थित है, जो गंगा नदी के तट पर है। यह प्रयागराज जंक्शन से लगभग 5-6 किमी दूर है।

प्रश्न 2: मंदिर में किन देवताओं की पूजा होती है?

उत्तर: मुख्य रूप से भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की प्रतिमाएँ स्थापित हैं। यहाँ वेदांत दर्शन और गीता का विशेष महत्व है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है। यह सभी के लिए खुला है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन का समय क्या है?

उत्तर: मंदिर प्रतिदिन सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुला रहता है। ध्यान और प्रवचन के समय अलग-अलग हो सकते हैं।

प्रश्न 5: गंगा आरती किस समय होती है?

उत्तर: रसूलाबाद घाट पर गंगा आरती प्रतिदिन सूर्यास्त के समय (लगभग 6:00-7:00 बजे, मौसम के अनुसार) होती है।

प्रश्न 6: क्या यहाँ रुकने की व्यवस्था है?

उत्तर: मंदिर परिसर में अतिथि गृह की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही, प्रयागराज शहर में कई होटल और धर्मशालाएँ भी हैं।

प्रश्न 7: क्या यहाँ योग और ध्यान की सुविधा उपलब्ध है?

उत्तर: हाँ, मंदिर परिसर में नियमित योग और ध्यान सत्र आयोजित किए जाते हैं। प्रवचन और ज्ञान यज्ञ भी नियमित रूप से होते हैं।

📝 चिन्मय मिशन मंदिर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

चिन्मय मिशन मंदिर, रसूलाबाद घाट, प्रयागराज एक ऐसा स्थल है जहाँ गंगा की पवित्र धारा और वेदांत का गहन ज्ञान एक साथ मिलते हैं। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक विश्वविद्यालय है, जहाँ व्यक्ति अपने भीतर के देवत्व को पहचानना सीखता है।

रसूलाबाद घाट की शांत गंगा लहरें, मंदिर का शांत वातावरण, नियमित ध्यान सत्र और प्रवचन — यह सब मिलकर एक अद्भुत अनुभव का निर्माण करते हैं। यहाँ आकर मन को गहरी शांति मिलती है, जीवन के गहन प्रश्नों के उत्तर मिलते हैं, और आत्म-साक्षात्कार की ओर यात्रा प्रारंभ होती है।

चाहे आप ज्ञान की खोज में हों, योग और ध्यान के अभ्यासी हों, या गंगा तट पर शांति की तलाश में हों, चिन्मय मिशन मंदिर आपको एक समग्र और अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

🙏 हरि ॐ तत् सत् ।। जय श्री राम ।।

🕉️ चिन्मय मिशन मंदिर, रसूलाबाद घाट
ज्ञान, भक्ति और सेवा का अद्वितीय केंद्र

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प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 22 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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