सनातन हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष परंपरा में तिथि (Tithi) का स्थान अत्यंत पावन एवं आधारभूत है। सूर्य और चंद्रमा के मध्य 12 अंश (Degrees) की कोणीय दूरी को एक 'तिथि' कहा जाता है। चंद्रमा की कलाओं के घटने और बढ़ने के आधार पर मास को दो पक्षों—शुक्ल पक्ष (चंद्रमा की वृद्धि) और कृष्ण पक्ष (चंद्रमा का क्षय) में विभाजित किया गया है। आज 2 नवंबर 2026 को अष्टमी (कृष्ण पक्ष) है, जो 01:45 PM तक प्रभावी रहेगी।
वैदिक पंचांग सिद्धांत : तिथि का महत्व
"तिथेस्तु श्रियमाप्नोति वारादायुष्यवर्धनम्। नक्षत्राद्धरते पापं योगाद्रोगनिवारणम्॥"
अर्थात: पंचांग में तिथि का श्रवण व ज्ञान करने से लक्ष्मी (धन व ऐश्वर्य) की प्राप्ति होती है, वार से आयु की वृद्धि होती है, नक्षत्र से पापों का क्षय होता है और योग से रोगों का निवारण होता है।
1. आज की तिथि का पौराणिक स्वरूप एवं महत्व
अष्टमी तिथि शक्ति संचय की प्रधान तिथि है। दुर्गाष्टमी, श्री कृष्ण जन्माष्टमी और काल भैरवाष्टमी इसी दिन मनाई जाती हैं।
वैदिक शास्त्रों के अनुसार आज की अष्टमी तिथि के स्वामी माँ दुर्गा एवं भगवान शिव/भैरव हैं। इस तिथि की संज्ञानुसार इसे 'जया (Jaya)' संज्ञक माना जाता है। जब जातक इस तिथि पर संबंधित देवता का ध्यान, स्तुति, मंत्र जप और अर्चन करता है, तो उसे असुर शक्ति नाश, भय मुक्ति, आत्मबल एवं सर्वसिद्धि की प्राप्ति होती है।
2. आज की तिथि में सरल पूजा एवं साधना विधान
आज की तिथि का पूर्ण आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने के लिए शास्त्रों में निम्नलिखित दैनिक पूजा विधान का निर्देश दिया गया है:
- प्रातःकाल स्नान व आचमन: ब्रह्म मुहूर्त (04:56 AM से 05:44 AM) अथवा सूर्योदय के समय स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
- सूर्य देव को अर्घ्य: तांबे के पात्र में जल, अक्षत, रोली और लाल पुष्प डालकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान सूर्य नारायण को 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' बोलते हुए अर्घ्य दें।
- अधिष्ठाता देव का पूजन: माँ महागौरी/दुर्गा को लाल चुनरी, धूप, दीप व हलवा-चना का भोग लगाएं और दुर्गा चालीसा पढ़ें।
- सिद्ध मंत्र जप: आज के पावन बीज मंत्र 'ॐ दुं दुर्गायै नमः | ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गतिनाशिन्यै महामायायै स्वाहा' का कम से कम 108 बार रुद्राक्ष या तुलसी की माला से जप करें।
- आरती एवं क्षमा प्रार्थना: पूजन के उपरांत कर्पूर जलाकर आरती करें तथा अनजाने में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा याचना करें।
3. आज का दान एवं शुभ संकल्प (Recommended Donation)
आज का पावन दान:
चावल, दूध, श्वेत वस्त्र, मिश्री व चांदी का दान करें। आज का शुभ अंक 2 है।
4. भोजन नियम एवं वर्जित पदार्थ (Dietary Dos & Don'ts)
आज का त्याज्य (अभक्ष्य) भोजन नियम:
नारियल का फल खाना वर्जित है क्योंकि इसे बुद्धि नाश कारक माना गया है।
5. आज की तिथि में क्या करें और क्या न करें (Dos and Don'ts)
क्या करें (शुभ कर्म):
- अभिजित मुहूर्त (11:42 AM से 12:26 PM) में नए कार्यों का संकल्प व शुभारंभ करें।
- दान-पुण्य: निर्धनों, ब्राह्मणों अथवा गौमाता को अन्न, फल या जल का दान करें।
- आज के देवता माँ दुर्गा एवं भगवान शिव/भैरव की स्तुति व आरती का गान करें।
- घर के मुख्य द्वार पर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
क्या न करें (वर्जित कर्म):
- राहुकाल (06:32 AM से 07:55 AM) के समय कोई भी नवीन व्यापार, गृह प्रवेश या महत्वपूर्ण सौदा न करें।
- दिशाशूल दिशा (पूर्व) में बिना आवश्यक उपाय (दर्पण (शीशा) देखकर अथवा दूध का घूंट पीकर निकलें।) के लंबी यात्रा से बचें।
- क्रोध, कलह, असत्य भाषण और तामसिक भोजन का पूर्ण परित्याग करें।
- किसी भी जीव अथवा प्रकृति को कष्ट पहुँचाने वाले कार्यों से बचें।
6. विक्रम संवत एवं मास का शास्त्रीय संदर्भ
वर्तमान में विक्रम संवत 2083 तथा शक संवत 1948 गतिमान है। उत्तर भारतीय पूर्णिमान्त कैलेंडर के अनुसार अभी कार्तिक मास तथा दक्षिण भारतीय अमान्त कैलेंडर के अनुसार आश्विन मास चल रहा है।
सूर्य देव अभी तुला (Libra) में तथा चंद्र देव कर्क (Cancer) में भ्रमण कर रहे हैं। इस ग्रह गोचर का जातक के मानसिक एवं आध्यात्मिक जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।