Parashurama Jayanti 2026 महापर्व २०२८

१५ अगस्त २०२८, मंगलवार आराध्य: सनातन देव परंपरा प्रमुख सनातन पर्व आगामी (६४९ दिन शेष)

दिव्य भक्ति नाद कैप्सूल

पूजन व ध्यान के समय पवित्र वातावरण निर्माण हेतु स्पर्श करें:

Parashurama Jayanti 2026 का परिचय एवं महात्म्य

Parashurama Jayanti 2026 सनातन धर्म की पावन परंपरा का अत्यंत श्रद्धापूर्ण पर्व है। इस दिन विधि-विधान से व्रत, जप, तप और दान करने से मनुष्य को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

सनातन धर्म के सभी पर्व आत्मा की शुद्धि, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और परमात्मा के साथ तादात्म्य स्थापित करने के वैज्ञानिक माध्यम हैं।

शास्त्रोक्त तिथि: शास्त्रोक्त पंचांग तिथि
व्रत व साधना स्वरूप: सात्विक व्रत, पूजन एवं दान

Parashurama Jayanti 2026 २०२८: शास्त्रसम्मत शुभ मुहूर्त

द्रिक गणित पंचांग एवं सूर्य-सिद्धांत गणना के अनुसार वर्ष २०२८ (विक्रम संवत २०८५) में पूजन एवं अनुष्ठान के अत्यंत फलदायी मुहूर्त:

प्रातः पूजन मुहूर्त प्रातः ०६:३० से पूर्वाह्न ०९:४५ बजे तक
अभिजित मुहूर्त पूर्वाह्न ११:४५ से दोपहर १२:३५ बजे तक
प्रदोष काल मुहूर्त सायं ०६:१५ से रात्रि ०८:३० बजे तक
पंचांग सम्मत सुझाव: स्थानीय सूर्योदय व सूर्यास्त के अनुसार विभिन्न शहरों में मुहूर्तों में कुछ मिनटों का अंतर संभावित हो सकता है।

संपूर्ण पूजा सामग्री सूची (Checklist)

शास्त्रोक्त पूजन हेतु आवश्यक समस्त सामग्रियों का संग्रह पूर्व में ही कर लें:

गंगाजल, पंचामृत व शुद्ध जल
रोली, मौली, अक्षत, चंदन व पुष्प
धूप, दीप, कपूर व शुद्ध घी
ऋतु फल, पंचमेवा व नैवेद्य

चरणबद्ध एवं शास्त्रीय पूजा विधि

शास्त्रों में वर्णित प्रामाणिक विधि के अनुसार निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

१
चरण १: प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें।
२
चरण २: पूजा स्थल की शुद्धि कर दीपक प्रज्ज्वलित करें और ईष्ट देव का आवाहन करें।
३
चरण ३: पंचोपचार विधि से देव पूजन करें और मंत्रों का जप करें।
४
चरण ४: आरती कर परिजनों में प्रसाद वितरण करें।

पौराणिक व्रत कथा एवं धार्मिक इतिहास

पौराणिक शास्त्रों में इस पावन दिवस के महात्म्य का सुंदर वर्णन मिलता है। जो भक्त निष्काम भाव से इस दिन प्रभु की उपासना करते हैं, उनके समस्त मनोरथ पूर्ण होते हैं।

प्रमुख मंत्र, स्तुति व श्लोक

सर्वमंगल प्रार्थना

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥
भावार्थ: सब सुखी हों, सब निरोगी हों, सब कल्याण देखें और किसी को भी दुःख न हो।

क्या करें और क्या न करें (नियम व सावधानियां)

क्या करें (करणीय कार्य)

  • सात्विक आहार लें और मन को शांत रखें।
  • यथाशक्ति जरूरतमंदों को दान दें।

क्या न करें (वर्जित कार्य)

  • तामसिक भोजन और क्रोध से बचें।

Parashurama Jayanti 2026 संबंधित मुख्य प्रश्नोत्तर (FAQ)

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा प्रदोष काल में पूजन करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ: यह सामग्री वैदिक पंचांग, पुराणों एवं प्रतिष्ठित सनातन धर्मग्रंथों के उपलब्ध संदर्भों के आधार पर भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा शोधपरक रूप से तैयार की गई है।

पर्व संक्षिप्त विवरण

पर्व का नाम: Parashurama Jayanti 2026
तारीख (२०२८): १५ अगस्त २०२८, मंगलवार
आराध्य देव: सनातन देव परंपरा
पर्व श्रेणी: प्रमुख सनातन पर्व
विक्रम संवत: २०८५
शक संवत: १९५०
मित्रों व परिजनों के साथ साझा करें:
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!