श्री शिव पंचाक्षर मंत्र - ॐ नमः शिवाय सम्पूर्ण 5 तत्वों का रहस्य एवं ध्यान विधि
भावार्थ: भगवान शिव के षडक्षर और पंचाक्षर मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' में सृष्टि के पाँचों महाभूतों (तत्वों) का रहस्य छिपा है। इसके नियमित…
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: भगवान शिव के षडक्षर और पंचाक्षर मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' में सृष्टि के पाँचों महाभूतों (तत्वों) का रहस्य छिपा है। इसके नियमित…
भावार्थ: हम भगवान शिव (तीन नेत्रों वाले त्रयम्बक) की पूजा करते हैं, जो हर कण में सुगंध (दिव्य ज्ञान और यश) फैलाते हैं और संपूर्ण …
भावार्थ: हम त्रिनेत्र भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो समस्त संसार के पालनहार, सुगंधित और पोषण करने वाले हैं। जिस प्रकार ककड़ी अपनी…
भावार्थ: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो हर श्वास में सुगंध फैलाते हैं और सम्पूर्ण जगत का पोषण करते हैं। जिस प…
भावार्थ: मैं भगवान शिव को नमस्कार करता हूँ, जो इस ब्रह्मांड के आराध्य और समस्त चेतना के केंद्र हैं।
भावार्थ: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो हर श्वास में सुगंध और जीवन शक्ति का संचार करते हैं तथा पोषण करते हैं।…
भावार्थ: मैं भगवान शिव को नमन करता हूँ, जो इस ब्रह्मांड के मूल और परम सत्य हैं।
भावार्थ: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो हर श्वास में सुगंध फैलाते हैं और हमारा पोषण करते हैं। जैसे ककड़ी पकने…
भावार्थ: समस्त गुरुओं को मेरा बारंबार नमस्कार है, जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं।
भावार्थ: मैं भगवान शिव को नमस्कार करता हूँ, जो इस ब्रह्मांड के कण-कण में व्याप्त हैं।
भावार्थ: हम भगवान शिव (त्र्यम्बक) की पूजा करते हैं, जो तीनों लोकों के स्वामी हैं, जो सुगंधित और संपूर्ण जगत का पोषण करने वाले हैं…
भावार्थ: जटाटवी - जटारूपी वन से; गलत् - बहने वाले; जल - जल के; प्रवाह - प्रवाह से; पावित - पवित्र हुए; स्थले - स्थल वाले (कंठ); ग…
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।