श्री सूक्तम पाठ: दरिद्रता निवारण एवं महालक्ष्मी की कृपा प्राप्ति
भावार्थ: हे जातवेद (अग्निदेव), आप मेरे लिए उन महालक्ष्मी को बुलाएं जो स्वर्ण के समान कांति वाली हैं, जो हरिणी (मनोहर) हैं, जिन्हो…
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
अपनी अभीष्ट साधना एवं आवश्यकतानुसार अभीष्ट मंत्र श्रेणी का चयन करें।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: हे जातवेद (अग्निदेव), आप मेरे लिए उन महालक्ष्मी को बुलाएं जो स्वर्ण के समान कांति वाली हैं, जो हरिणी (मनोहर) हैं, जिन्हो…
भावार्थ: हे महामाये! श्रीपीठ पर स्थित और देवताओं द्वारा पूजित आपको नमस्कार है। शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली महालक्ष्मी! आपको म…
भावार्थ: यह मंत्र महालक्ष्मी के बीज अक्षरों का समूह है। श्रीं धन, ह्रीं शक्ति, क्लीं आकर्षण और ऐं ज्ञान का प्रतीक है। यह मंत्र सा…
भावार्थ: यह मंत्र माता लक्ष्मी के बीज अक्षरों का समूह है। 'श्रीं' धन और समृद्धि का प्रतीक है, 'ह्रीं' माया और शक्ति का, 'क्लीं' आ…
भावार्थ: यह बीज मंत्र महालक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों का आह्वान करता है। 'श्रीं' धन और समृद्धि का बीज है, 'ह्रीं' माया और शक्ति का…
भावार्थ: भगवान विष्णु के शरीर पर पुलकित (रोमांचित) आभूषणों के समान सुशोभित होने वाली, तमाल वृक्ष पर मंडराती हुई भंवरी के समान प्र…
भावार्थ: हे जातवेद अग्नि! आप ऐसी सुवर्ण के समान कांति वाली, हरिणी, सोने और चांदी की मालाओं से अलंकृत, चंद्रमा के समान कांतिमान और…
भावार्थ: हे जातवेद अग्नि देव! सोने के समान कांति वाली, हरिणी (मन को आकर्षित करने वाली), स्वर्ण और रजत की मालाओं से सुसज्जित, चंद्…
भावार्थ: हे माता लक्ष्मी सहित नृसिंह भगवान! आपको मेरा बारंबार नमस्कार है। आप मुझे धन, ऐश्वर्य और सभी प्रकार की आपदाओं से सुरक्षा …
भावार्थ: परमब्रह्म स्वरूप (ॐ), समृद्धिदायिनी (श्रीं), माया व ब्रह्मांड ऊर्जा (ह्रीं) एवं दिव्य आकर्षण (क्लीं) रूपी महालक्ष्मी को …
भावार्थ: माँ दुर्गा के अत्यंत शक्तिशाली नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' का उद्गम, अर्थ, नौ अक्षरों का रहस्य, जा…
भावार्थ: यक्षों के आधिपत्य, धन-धान্যের के स्वामी और विश्रवा के पुत्र भगवान कुबेर को मेरा बारम्बार नमस्कार है। वे हमारे जीवन में ध…
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।