वैदिक नाद एवं मंत्र सागर सम्पूर्ण मंत्र संग्रह 108 जप काउंटर

सम्पूर्ण वैदिक मंत्र सूची एवं साधना निर्देशिका

सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।

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माता महालक्ष्मी 14

श्री सूक्तम पाठ: दरिद्रता निवारण एवं महालक्ष्मी की कृपा प्राप्ति

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

भावार्थ: हे जातवेद (अग्निदेव), आप मेरे लिए उन महालक्ष्मी को बुलाएं जो स्वर्ण के समान कांति वाली हैं, जो हरिणी (मनोहर) हैं, जिन्हो…

माता महालक्ष्मी 10

श्री महालक्ष्मी अष्टकम: अर्थ, स्तुति और स्थिर लक्ष्मी प्राप्ति विधि

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

भावार्थ: हे महामाये! श्रीपीठ पर स्थित और देवताओं द्वारा पूजित आपको नमस्कार है। शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली महालक्ष्मी! आपको म…

माता महालक्ष्मी 14

महालक्ष्मी बीज मंत्र: धन प्राप्ति और आर्थिक समृद्धि के उपाय

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौं ॐ ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौं ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ

भावार्थ: यह मंत्र महालक्ष्मी के बीज अक्षरों का समूह है। श्रीं धन, ह्रीं शक्ति, क्लीं आकर्षण और ऐं ज्ञान का प्रतीक है। यह मंत्र सा…

माता लक्ष्मी 12

लक्ष्मी बीज मंत्र: सुरेश वाडकर स्वर में अर्थ और जाप विधि

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौं ॐ ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौं ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ

भावार्थ: यह मंत्र माता लक्ष्मी के बीज अक्षरों का समूह है। 'श्रीं' धन और समृद्धि का प्रतीक है, 'ह्रीं' माया और शक्ति का, 'क्लीं' आ…

माता महालक्ष्मी 13

महालक्ष्मी बीज मंत्र: अर्थ, जाप विधि और आध्यात्मिक लाभ

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौं ॐ ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौं ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ

भावार्थ: यह बीज मंत्र महालक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों का आह्वान करता है। 'श्रीं' धन और समृद्धि का बीज है, 'ह्रीं' माया और शक्ति का…

माता महालक्ष्मी 11

कनकधारा स्तोत्र: अर्थ, लाभ और माता महालक्ष्मी की कृपा प्राप्ति विधि

अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम् । अङ्गीकृताखिलविभूतिरपाङ्गलीला माङ्गल्यदास्तु मम मङ्गलदेवतायाः ॥

भावार्थ: भगवान विष्णु के शरीर पर पुलकित (रोमांचित) आभूषणों के समान सुशोभित होने वाली, तमाल वृक्ष पर मंडराती हुई भंवरी के समान प्र…

माता महालक्ष्मी 121

Shri Suktam Path Ki Vidhi

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरससस्रजाम्। चन्द्रं हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

भावार्थ: हे जातवेद अग्नि! आप ऐसी सुवर्ण के समान कांति वाली, हरिणी, सोने और चांदी की मालाओं से अलंकृत, चंद्रमा के समान कांतिमान और…

माता महालक्ष्मी 125

श्री सूक्तम: ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् (16 ऋचाएं एवं अर्थ)

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

भावार्थ: हे जातवेद अग्नि देव! सोने के समान कांति वाली, हरिणी (मन को आकर्षित करने वाली), स्वर्ण और रजत की मालाओं से सुसज्जित, चंद्…

श्री लक्ष्मी नृसिंह 53

श्री लक्ष्मी नृसिंह करुणा मंत्र - ॐ श्रीं ह्रीं क्षौं श्रीं लक्ष्मी नृसिंहाय नमः तीव्र आर्थिक लाभ एवं सुरक्षा कवच

ॐ श्रीं ह्रीं क्षौं श्रीं लक्ष्मी नृसिंहाय नमः

भावार्थ: हे माता लक्ष्मी सहित नृसिंह भगवान! आपको मेरा बारंबार नमस्कार है। आप मुझे धन, ऐश्वर्य और सभी प्रकार की आपदाओं से सुरक्षा …

भगवती महालक्ष्मी (अष्टलक्ष्मी व त्रिगुणमयी स्वरूप) 68

श्री महालक्ष्मी बीज मंत्र - ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः धन-वैभव प्राप्ति विधान

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः॥

भावार्थ: परमब्रह्म स्वरूप (ॐ), समृद्धिदायिनी (श्रीं), माया व ब्रह्मांड ऊर्जा (ह्रीं) एवं दिव्य आकर्षण (क्लीं) रूपी महालक्ष्मी को …

माँ दुर्गा / महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती 79

माँ दुर्गा नवार्ण मंत्र - ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे सम्पूर्ण 9 शक्ति रहस्य व सिद्धि

माँ दुर्गा नवार्ण मंत्र - ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे सम्पूर्ण 9 शक्ति रहस्य व सिद्धि

भावार्थ: माँ दुर्गा के अत्यंत शक्तिशाली नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' का उद्गम, अर्थ, नौ अक्षरों का रहस्य, जा…

भगवान कुबेर देव एवं अष्ट लक्ष्मी 78

श्री कुबेर मंत्र - ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये नमः अष्ट लक्ष्मी व धन वृद्धि

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये नमः मम घर धन धान्य समृद्धि कुरु कुरु स्वाहा

भावार्थ: यक्षों के आधिपत्य, धन-धान্যের के स्वामी और विश्रवा के पुत्र भगवान कुबेर को मेरा बारम्बार नमस्कार है। वे हमारे जीवन में ध…

वैदिक मंत्र विज्ञान, साधना विधि एवं 108 जप रहस्य

सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।

1. नाद और ध्वनि तरंगों का प्रभाव

संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।

2. 108 बार जप का खगोलीय रहस्य

वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।

मंत्र जप के तीन प्रमुख प्रकार (Types of Mantra Japa)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

भक्तिलोक पर प्रस्तुत समस्त मंत्र एवं साधना सामग्री उपलब्ध सनातन धर्मग्रंथों एवं परंपराओं के संदर्भ पर आधारित संपादकीय रूप से तैयार की गई है।
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