वैदिक नाद एवं मंत्र सागर सम्पूर्ण मंत्र संग्रह 108 जप काउंटर

सम्पूर्ण वैदिक मंत्र सूची एवं साधना निर्देशिका

सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।

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भगवान शिव 12

महामृत्युंजय मंत्र: अर्थ, महत्व, विधि और अकाल मृत्यु से रक्षा

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

भावार्थ: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सभी का पोषण करते हैं। जैसे एक पका हुआ खरबूजा अपनी बेल …

भगवान रुद्र / शिव 7

रुद्र सूक्तम एवं चमकम्: अर्थ, महत्व और संपूर्ण पाठ विधि

ॐ नमो भगवते रुद्राय। नमस्ते रुद्र मन्यव उत त इषवे नमः।

भावार्थ: हे रुद्र! आपके क्रोध को नमस्कार है और आपके बाणों को भी नमस्कार है। यह मंत्र भगवान शिव के रौद्र और सौम्य दोनों रूपों की स…

भगवान शिव (अघोर रूप) 8

अघोरोद्धार सिद्ध मंत्र: अर्थ, भय मुक्ति और गुप्त साधना विधि

ॐ अघोरेभ्यो अथघोरेभ्यो घोर घोरतरेभ्यः। सर्वेभ्यः सर्व शर्वेभ्यो नमस्ते अस्तु रुद्र रूपेभ्यः॥

भावार्थ: हे भगवान रुद्र! जो अघोर (शांत और सौम्य) हैं, जो अति अघोर (प्रलयकारी) हैं, और जो उन दोनों के बीच के घोर-घोरतर स्वरूप हैं,…

भगवान शिव (महामृत्युंजय) 11

महामृत्युंजय मंत्र: 108 बार जाप विधि, अर्थ और अद्भुत लाभ

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

भावार्थ: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सभी का पोषण करते हैं। जैसे एक पका हुआ खरबूजा अपनी बेल …

भगवान शिव 9

महामृत्युंजय मंत्र 108 बार जाप करने से क्या होता है: लाभ और विधि

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

भावार्थ: हम भगवान शिव की पूजा करते हैं, जिनके तीन नेत्र हैं, जो सुगंधित हैं और जो सभी प्राणियों का पोषण करते हैं। जैसे एक पका हुआ…

भगवान शिव 9

महामृत्युंजय मंत्र: अर्थ, महत्व और 108 बार जाप की विधि

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

भावार्थ: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और जो समस्त संसार का पोषण करते हैं। जैसे एक पका हुआ खरबूज…

भगवान शिव 8

शिव तांडव स्तोत्र: अर्थ, महत्व और संपूर्ण पाठ विधि

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥

भावार्थ: जिनके जटा रूपी वन से बहने वाली जल की धारा ने स्थल को पवित्र कर दिया है, जिनके गले में विशाल सर्पों की माला लटक रही है, ज…

भगवान रुद्र / शिव 7

श्री रुद्र सूक्तम एवं चमकम्: अर्थ, महत्व और संपूर्ण पाठ विधि

ॐ नमो भगवते रुद्राय। नमस्ते रुद्र मन्यव उतोत इषवे नमः।

भावार्थ: हे रुद्र! आपके क्रोध को नमस्कार है, आपके बाणों को नमस्कार है। आप समस्त जगत के स्वामी हैं।

भगवान शिव (दक्षिणामूर्ति) 24

श्री दक्षिणामूर्ति मंत्र: ज्ञान, मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग

ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये मह्यं मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा।

भावार्थ: हे भगवान दक्षिणामूर्ति! आप मुझे मेधा (धारण शक्ति) और प्रज्ञा (विवेक) प्रदान करें।

भगवान शिव (महामृत्युंजय) 63

श्री महामृत्युंजय त्रयोदशाक्षर मंत्र - ॐ हौं जूं सः माम् पालय पालय सः जूं हौं अमोघ आयु रक्षा और आरोग्य महामंत्र

ॐ हौं जूं सः माम् पालय पालय सः जूं हौं

भावार्थ: हे सर्वव्यापिन् और त्रयोदशाक्षर रूपी प्राणस्वरूप शिव! आप मेरी रक्षा करें, मेरी रक्षा करें।

भगवान शिव 80

महामृत्युंजय मंत्र: अर्थ, महत्व और जाप विधि

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

भावार्थ: हम त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो संपूर्ण सृष्टि के सुगंध और पोषण के दाता हैं। जिस प्रकार ककड़ी अपनी डंठल …

भगवान शिव (महाकाल) 59

श्री महामृत्युंजय त्रयक्षर रक्षा मंत्र - ॐ हौं जूं सः मृत्यंजयय नमः अमोघ स्वास्थ्य एवं दीर्घायु साधना विधि

ॐ हौं जूं सः मृत्यंजयय नमः

भावार्थ: हे मृत्यु को जीतने वाले भगवान शिव! आपको मेरा बारंबार नमस्कार है। आप मुझे आरोग्य, दीर्घायु और भवबंधन से मुक्ति प्रदान करे…

वैदिक मंत्र विज्ञान, साधना विधि एवं 108 जप रहस्य

सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।

1. नाद और ध्वनि तरंगों का प्रभाव

संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।

2. 108 बार जप का खगोलीय रहस्य

वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।

मंत्र जप के तीन प्रमुख प्रकार (Types of Mantra Japa)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

भक्तिलोक पर प्रस्तुत समस्त मंत्र एवं साधना सामग्री उपलब्ध सनातन धर्मग्रंथों एवं परंपराओं के संदर्भ पर आधारित संपादकीय रूप से तैयार की गई है।
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