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प्रामाणिक मंदिर विवरण

रामेश्वर मंदिर, दारागंज, प्रयागराज - Rameshwar Mandir, Daraganj, Prayagraj: A Sacred Abode of Lord Shiva Near the Holy Triveni Sangam

185 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 22 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Shiva आराध्य देव
05:00 AM - 12:00 PM, 04:00 PM - 09:00 PM दर्शन समय
Morning Aarti: 06:00 AM, Evening Aarti: 07:00 PM आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Shiva
दर्शन समय 05:00 AM - 12:00 PM, 04:00 PM - 09:00 PM
आरती समय Morning Aarti: 06:00 AM, Evening Aarti: 07:00 PM
स्थान / पता Rameshwar Mandir, Daraganj, Near Nagvasuki Mandir, Prayagraj, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🕉️ रामेश्वर मंदिर, दारागंज, प्रयागराज

त्रिवेणी संगम के समीप भगवान शिव का पावन धाम (Rameshwar Mandir, Daraganj, Prayagraj)

प्रयागराज के दारागंज क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन और आस्था का प्रमुख केंद्र

🌟 परिचय: रामेश्वर मंदिर का धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व

प्रयागराज के प्राचीन दारागंज क्षेत्र में स्थित रामेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पवित्र धार्मिक स्थल है। यह मंदिर न केवल अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि प्रसिद्ध नागवासुकी मंदिर के निकट होने के कारण भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष स्थान रखता है।

ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना प्रभु श्रीराम ने लंका विजय के पश्चात भगवान शिव की आराधना हेतु की थी। यही कारण है कि इसे "रामेश्वर" (राम के ईश्वर – शिव) के नाम से जाना जाता है। प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम के निकट स्थित यह मंदिर साधकों और भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।

यहाँ का वातावरण अत्यंत शांत और भक्तिमय है। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भगवान शिव की उपस्थिति का अहसास होता है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से की गई मन्नत अवश्य पूर्ण होती है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

रामेश्वर मंदिर प्रयागराज शहर के प्राचीन मोहल्ले दारागंज में स्थित है। यह क्षेत्र प्रसिद्ध नागवासुकी मंदिर के पास है, जो स्वयं एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। संगम तट से यह मंदिर लगभग 2-3 किलोमीटर की दूरी पर है।

  • रेल मार्ग: प्रयागराज जंक्शन (पुराना नाम इलाहाबाद जंक्शन) सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन है। यहाँ से टैक्सी या ऑटो द्वारा मंदिर पहुँचा जा सकता है। प्रयागराज रमबाग स्टेशन भी निकट है।
  • सड़क मार्ग: प्रयागराज शहर सड़क मार्ग से देश के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। दारागंज पहुँचने के लिए सिटी बसें, ऑटो-रिक्शा और टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज हवाई अड्डा (बमरौली) है, जो शहर से लगभग 15-18 किलोमीटर दूर है। यहाँ से टैक्सी द्वारा दारागंज पहुँचा जा सकता है।
🗺️

दारागंज, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

संगम से दूरी: ~2.5 किमी
प्रयागराज जंक्शन से: ~4 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

रामेश्वर मंदिर का इतिहास रामायण काल से जुड़ा हुआ है। प्रचलित कथा के अनुसार, जब भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त की और रावण का वध किया, तब ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने भगवान शिव की आराधना करने का निर्णय लिया। प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम के निकट उन्होंने शिवलिंग स्थापित कर पूजा-अर्चना की। यही शिवलिंग आज "रामेश्वर" के नाम से प्रसिद्ध है।

एक अन्य मान्यता के अनुसार, इस स्थान पर भगवान राम ने वनवास के दौरान भी कुछ समय बिताया था और यहाँ शिव की उपासना की थी। बाद में स्थानीय राजाओं और भक्तों ने इस स्थल पर एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया। समय के साथ मंदिर का जीर्णोद्धार होता रहा और आज यह प्रयागराज के प्रमुख शिव मंदिरों में से एक है।

मंदिर के निकट ही नागवासुकी मंदिर स्थित है, जो नाग देवता को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि इन दोनों मंदिरों के दर्शन एक साथ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

🕉️

"प्रभु श्रीराम द्वारा स्थापित यह शिवलिंग आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।"

मान्यता: यहाँ जलाभिषेक करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और पितृदोष से मुक्ति मिलती है।

🏛️ वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 प्राचीन शिवलिंग

रामेश्वर मंदिर का मुख्य आकर्षण यहाँ का प्राचीन शिवलिंग है, जिसे भगवान राम द्वारा स्थापित माना जाता है। यह शिवलिंग मध्यम आकार का है और इस पर सदैव जलधारा प्रवाहित होती रहती है। भक्त यहाँ बेलपत्र, दूध, जल और भांग-धतूरा चढ़ाकर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।

🏛️ मंदिर की संरचना

मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में है। गर्भगृह में शिवलिंग विराजमान हैं, जबकि मंडप में भगवान गणेश, माता पार्वती और नंदी जी की प्रतिमाएँ स्थापित हैं। मंदिर के शिखर पर त्रिशूल और ध्वजा अंकित है, जो दूर से ही दिखाई देता है।

🌿 शांत परिसर एवं नागवासुकी मंदिर की निकटता

मंदिर परिसर अपेक्षाकृत छोटा लेकिन अत्यंत स्वच्छ और सुव्यवस्थित है। यहाँ बैठने की व्यवस्था है। विशेष बात यह है कि यह मंदिर नागवासुकी मंदिर से मात्र कुछ मीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे भक्त एक ही यात्रा में दोनों प्रमुख धामों के दर्शन कर सकते हैं।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • पापों का नाश: यहाँ स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • संगम स्नान के बाद अनिवार्य दर्शन: प्रयागराज आने वाले श्रद्धालु संगम में पवित्र स्नान के बाद रामेश्वर मंदिर और नागवासुकी मंदिर के दर्शन अवश्य करते हैं।
  • मनोकामना पूर्ति: यहाँ 21 दिनों तक नियमित जलाभिषेक करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, ऐसी श्रद्धालुओं की आस्था है।
  • पितृदोष निवारण: यहाँ पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को मुक्ति मिलती है और पितृदोष समाप्त होता है।
  • नाग दोष शांति: नागवासुकी मंदिर की निकटता के कारण, यहाँ नाग पंचमी और अन्य अवसरों पर विशेष पूजा होती है जिससे नाग दोष शांत होता है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🕉️

महाशिवरात्रि

यहाँ का सबसे भव्य उत्सव। रात्रि जागरण, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और भंडारे का आयोजन होता है।

🌿

श्रावण मास

सावन के प्रत्येक सोमवार को विशेष पूजा और जलाभिषेक के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है। कांवड़ यात्रा का भी यह प्रमुख पड़ाव है।

🐍

नाग पंचमी

नागवासुकी मंदिर के निकट होने के कारण यहाँ नाग पंचमी पर विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • नागवासुकी मंदिर: रामेश्वर मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित यह मंदिर नाग देवता को समर्पित है और अत्यंत प्राचीन माना जाता है।
  • त्रिवेणी संगम: गंगा, यमुना और सरस्वती का पवित्र संगम, जहाँ स्नान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • अलोपी देवी मंदिर: प्रयागराज की प्रसिद्ध शक्तिपीठ, जहाँ माता सती की उंगली गिरी थी।
  • आनंद भवन: नेहरू-गांधी परिवार का ऐतिहासिक घर, जो अब एक संग्रहालय है।
  • हनुमान मंदिर (संगम के पास): लेटे हुए हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर, जहाँ गंगा जल से अभिषेक होता है।
  • किला (प्रयागराज किला): अशोक स्तंभ और अक्षयवट के लिए प्रसिद्ध ऐतिहासिक किला।
  • शंकर विमान मंडपम: एक भव्य मंदिर परिसर जो संगम के समीप स्थित है।
📌 यात्रा टिप: रामेश्वर मंदिर और नागवासुकी मंदिर के दर्शन एक साथ करें, फिर संगम स्नान करें और अन्य आस-पास के मंदिरों के दर्शन करें। सुबह का समय यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त है।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

प्रयागराज में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं, जब मौसम सुहावना होता है। कुंभ/अर्धकुंभ के अवसर पर यहाँ विशेष आयोजन होते हैं, लेकिन भीड़ अधिक होती है।

  • श्रावण मास (जुलाई-अगस्त): शिव भक्तों के लिए यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
  • महाशिवरात्रि: फरवरी-मार्च में यहाँ विशेष उत्सव मनाया जाता है।

📝 यात्रा सुझाव

  • सुबह जल्दी दर्शन करें, क्योंकि दोपहर में गर्मी अधिक होती है।
  • नागवासुकी मंदिर के दर्शन भी अवश्य करें, क्योंकि दोनों मंदिरों का आपस में गहरा संबंध है।
  • संगम स्नान के बाद ही रामेश्वर मंदिर आएँ – ऐसी मान्यता है कि इससे पुण्य दोगुना हो जाता है।
  • पूजा सामग्री मंदिर के बाहर उपलब्ध है।
  • मोबाइल फोटोग्राफी की अनुमति आमतौर पर होती है, लेकिन गर्भगृह में फोटोग्राफी से बचें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: रामेश्वर मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह प्रयागराज शहर के दारागंज क्षेत्र में, नागवासुकी मंदिर के निकट स्थित है।

प्रश्न 2: इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्व क्या है?

उत्तर: मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना भगवान श्रीराम ने लंका विजय के बाद भगवान शिव की आराधना के लिए की थी। यह रामेश्वर नाम से प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3: क्या यहाँ प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: नहीं, मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

प्रश्न 4: नागवासुकी मंदिर से रामेश्वर मंदिर की दूरी कितनी है?

उत्तर: दोनों मंदिर एक दूसरे से कुछ ही मीटर की दूरी पर स्थित हैं, आप पैदल ही दोनों के दर्शन कर सकते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ विशेष पूजा का आयोजन होता है?

उत्तर: हाँ, महाशिवरात्रि, श्रावण मास के सोमवार, और नाग पंचमी पर विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है।

प्रश्न 6: क्या मंदिर के पास रुकने की व्यवस्था है?

उत्तर: दारागंज और संगम क्षेत्र में कई धर्मशालाएँ और होटल उपलब्ध हैं। प्रयागराज शहर में आवास की अच्छी सुविधाएँ हैं।

प्रश्न 7: यहाँ पहुँचने का सबसे सुविधाजनक साधन क्या है?

उत्तर: प्रयागराज जंक्शन से ऑटो या टैक्सी लेकर सीधे दारागंज पहुँचा जा सकता है। शहर के किसी भी हिस्से से सिटी बसें और ऑटो उपलब्ध हैं।

📝 रामेश्वर मंदिर, दारागंज की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

रामेश्वर मंदिर, दारागंज, प्रयागराज एक ऐसा पवित्र स्थल है जहाँ भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के साथ-साथ प्रभु श्रीराम के चरणों का स्पर्श भी अनुभव किया जा सकता है। यहाँ की शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा हर भक्त को आंतरिक शांति प्रदान करती है।

नागवासुकी मंदिर की निकटता और संगम की पवित्रता इस स्थान के महत्व को और बढ़ा देती है। यदि आप प्रयागराज आएँ, तो त्रिवेणी संगम में स्नान करने के बाद रामेश्वर मंदिर और नागवासुकी मंदिर के दर्शन अवश्य करें। यह यात्रा न केवल आपकी आध्यात्मिक पिपासा को शांत करेगी, बल्कि आपको प्राचीन भारतीय संस्कृति और आस्था के गहरे अर्थों से भी परिचित कराएगी।

🙏 ॐ नमः शिवाय ।। जय श्री राम ।।

🕉️ रामेश्वर मंदिर, दारागंज, प्रयागराज
प्रभु श्रीराम द्वारा स्थापित शिव का पावन धाम

देवादिदेव महादेव के अन्य १२ ज्योतिर्लिंगों और शिव आराधना मंत्रों के लिए शिव पुराण का पाठ अवश्य करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 22 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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