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प्रामाणिक मंदिर विवरण

सेमराढ़नाथ भोले शंकर मंदिर – भदोही: भगवान शिव का दिव्य धाम | Semradhnath Bhole Shankar Mandir Bhadohi: A Sacred Shiva Temple

285 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 23 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Shiva आराध्य देव
सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक, शाम 3:00 बजे से रात 8:30 बजे तक दर्शन समय
सुबह आरती: 5:30 बजे, संध्या आरती: 7:00 बजे आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Shiva
दर्शन समय सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक, शाम 3:00 बजे से रात 8:30 बजे तक
आरती समय सुबह आरती: 5:30 बजे, संध्या आरती: 7:00 बजे
स्थान / पता Semradhnath Bhole Shankar Mandir, Semra Village, Bhadohi, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 सेमराढ़नाथ भोले शंकर मंदिर – भदोही

भगवान शिव का प्राचीन एवं चमत्कारी धाम (Semradhnath Bhole Shankar Mandir, Bhadohi)

भदोही जिले में स्थित एक अत्यंत पवित्र शिव मंदिर, जहाँ हर सोमवार श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है

🌟 परिचय: सेमराढ़नाथ महादेव का आध्यात्मिक महत्व

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में स्थित सेमराढ़नाथ भोले शंकर मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन, ऐतिहासिक एवं चमत्कारी धाम है। यह मंदिर न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए भी आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है।

यहाँ की वास्तुकला, शिवमय वातावरण, और नियमित रूप से होने वाली रुद्राभिषेक, महाशिवरात्रि, सावन सोमवार के विशेष आयोजन मन को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देते हैं। विशेष रूप से सावन मास में यहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और उन्हें आध्यात्मिक सुख-शांति की प्राप्ति होती है। यह स्थान अपने आप में एक छोटा काशी (वाराणसी) जैसा अनुभव कराता है।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

सेमराढ़नाथ भोले शंकर मंदिर उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में स्थित है। यह स्थान भदोही शहर से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर है और सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: भदोही (5 किमी), वाराणसी (45 किमी), प्रयागराज (80 किमी)
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन भदोही (BDOI) है, जो कई ट्रेनों से जुड़ा है। इसके अलावा ज्ञानपुर रोड (GYN) भी पास है।
  • सड़क मार्ग: भदोही शहर से मंदिर तक सीधी सड़क है। निजी वाहन, ऑटो, टैक्सी आसानी से उपलब्ध हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (VNS) है, जो लगभग 50 किमी की दूरी पर स्थित है।
🗺️

सेमरा, भदोही, उत्तर प्रदेश

भदोही से दूरी: ~5 किमी
वाराणसी से दूरी: ~45 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

सेमराढ़नाथ मंदिर का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, प्राचीन काल में यह क्षेत्र घने जंगलों से आच्छादित था। एक दिन एक ग्वाले (चरवाहे) को यहाँ एक स्वयंभू शिवलिंग मिला, जो धरती से निकल रहा था। उसने गाँव वालों को इसकी सूचना दी। तब ग्रामीणों ने मिलकर उस स्थान पर एक छोटा सा मंदिर बनवाया, जो समय के साथ विस्तारित होता गया।

मान्यता है कि इस शिवलिंग की पूजा स्वयं भगवान राम और भगवान कृष्ण ने भी की थी। यहाँ के पुजारी बताते हैं कि शिवलिंग पर साक्षात् भगवान शंकर का वास है, इसलिए इसे "भोले शंकर" का नाम दिया गया। इस मंदिर में आज भी प्राचीन परंपराएँ निभाई जाती हैं, जो इसकी गौरवशाली विरासत को दर्शाती हैं।

मंदिर का नाम "सेमराढ़नाथ" सेमरा गाँव के नाम पर पड़ा, जहाँ यह स्थित है। "ढ़नाथ" स्थानीय भाषा में "स्थान" या "धाम" का सूचक है, अर्थात सेमरा गाँव का शिव धाम।

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"यह स्वयंभू शिवलिंग अत्यंत प्राचीन एवं चमत्कारी माना जाता है।"

मान्यता: यहाँ सच्चे मन से जल चढ़ाने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🕉️ प्राचीन स्वयंभू शिवलिंग

मंदिर का गर्भगृह एक विशाल प्राकृतिक शिवलिंग का घर है, जो धरती से ऊपर निकला हुआ है। शिवलिंग की ऊँचाई लगभग 3 फीट है और इस पर चांदी का मुखौटा चढ़ा हुआ है। शिवलिंग के चारों ओर गंगा जल और बेलपत्र से अभिषेक किया जाता है।

🎨 भव्य प्रांगण और नंदी की मूर्ति

मंदिर प्रांगण में भगवान नंदी की विशाल मूर्ति स्थापित है, जिसे भक्त दूध और दही से सजाते हैं। प्रांगण में कई छोटे शिवलिंग और पीपल का पेड़ है, जहाँ धागे बाँधने की परंपरा है।

🌳 शिव वाटिका और ध्यान स्थल

मंदिर परिसर में एक सुंदर वाटिका विकसित की गई है, जहाँ भक्त बैठकर ध्यान और भजन का आनंद ले सकते हैं। परिसर में स्थित पीपल वृक्ष के नीचे योग और ध्यान शिविर लगते हैं।

🧘 भक्ति, योग और आध्यात्मिकता का केंद्र

सेमराढ़नाथ भोले शंकर मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरण का जीवंत केंद्र भी है। यहाँ नियमित रूप से:

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भजन-कीर्तन

प्रतिदिन शाम को शिव भजन, रुद्राष्टाध्यायी और कीर्तन का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु भगवान शंकर के नामों का गान करते हैं।

📖

शिव पुराण कथा

वर्ष में कई बार सप्ताह भर चलने वाली शिव पुराण कथा का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता करते हैं।

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योग और ध्यान

प्रातःकाल मंदिर परिसर में योग और ध्यान शिविर लगाए जाते हैं, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

ये सभी क्रियाएँ भक्तों को आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं, जिससे उनका जीवन आनंदमय हो जाता है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • मनोकामना पूर्ति: सच्चे मन से जलाभिषेक करने पर भगवान शिव भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।
  • सुख-समृद्धि: यहाँ विधिवत पूजा करने से घर में सुख, शांति और धन-धान्य की वृद्धि होती है।
  • रोग निवारण: भक्तों की मान्यता है कि यहाँ जल चढ़ाने और भस्म प्रसाद लेने से कई रोग दूर होते हैं।
  • नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति: मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक प्रभावों को दूर करती है और मन को शुद्ध करती है।
  • विवाह में विघ्न नाश: कहा जाता है कि यहाँ सोमवार को विशेष पूजा करने से विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

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महाशिवरात्रि

फाल्गुन मास की चतुर्दशी को यहाँ विशाल मेला लगता है। रात्रि जागरण, रुद्राभिषेक, और भंडारे का आयोजन किया जाता है। हजारों भक्त दर्शन करते हैं।

💧

सावन सोमवार

सावन मास के प्रत्येक सोमवार को यहाँ विशेष रुद्राभिषेक, जल चढ़ाने और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। श्रद्धालु कांवड़ लेकर आते हैं।

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श्रावणी पूर्णिमा

इस दिन यज्ञोपवीत संस्कार और विशेष पूजा का आयोजन होता है। बड़ी संख्या में ब्राह्मण और श्रद्धालु भाग लेते हैं।

🪔

कार्तिक पूर्णिमा

इस दिन मंदिर में दीपदान और विशेष आरती का आयोजन होता है, साथ ही मेले का भी आयोजन किया जाता है।

📿

शिव पुराण सप्ताह

वर्ष में एक बार सात दिवसीय शिव पुराण कथा का आयोजन किया जाता है, जो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • वाराणसी (काशी): विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, सारनाथ – लगभग 45 किमी दूर।
  • भदोही (काली माता मंदिर): भदोही शहर में प्रसिद्ध काली माता मंदिर, जो दुर्गा पूजा के अवसर पर विशेष आकर्षण रखता है। (लगभग 5 किमी)
  • ज्ञानपुर: यहाँ का प्राचीन ज्ञानपुर शिव मंदिर और अन्य धार्मिक स्थल देखे जा सकते हैं। (लगभग 20 किमी)
  • प्रयागराज (त्रिवेणी संगम): प्रयागराज का संगम, हनुमान मंदिर, इलाहाबाद किला – लगभग 80 किमी।
  • औरंगाबाद (भदोही): प्राचीन औरंगाबाद शिव मंदिर, जो भगवान शिव के भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है। (लगभग 12 किमी)
📌 यात्रा टिप: भदोही जिले की यात्रा के दौरान आप सेमराढ़नाथ मंदिर के दर्शन के साथ वाराणसी, प्रयागराज और आसपास के अन्य शिव मंदिरों का भी भ्रमण कर सकते हैं। यहाँ से काशी विश्वनाथ मंदिर मात्र 45 किमी दूर है, इसलिए एक ही दिन में दोनों धामों के दर्शन संभव हैं।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

भदोही क्षेत्र में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे मंदिर परिसर में भ्रमण और धार्मिक क्रियाएँ सुखद रहती हैं। सावन मास (जुलाई-अगस्त) में भी यहाँ भारी भीड़ रहती है, लेकिन वर्षा की संभावना बनी रहती है।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • सावन (जुलाई-अगस्त): यदि आप सावन सोमवार की धूम देखना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 3:00 बजे से रात 8:30 बजे तक खुला रहता है।
  • सुबह की आरती (लगभग 5:30 बजे) और शाम की आरती (लगभग 7:00 बजे) में अवश्य शामिल हों।
  • सोमवार को यहाँ विशेष रुद्राभिषेक होता है, इसलिए इस दिन दर्शन अधिक फलदायी माने जाते हैं।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजन की सुविधा है। प्रसाद के रूप में यहाँ की "भस्म" और "महाप्रसाद" प्रसिद्ध है।
  • फोटोग्राफी की अनुमति के लिए मंदिर प्रशासन से अनुमति लें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: सेमराढ़नाथ भोले शंकर मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के सेमरा गाँव में स्थित है। भदोही शहर से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता यहाँ का स्वयंभू प्राचीन शिवलिंग है, जो धरती से ऊपर निकला हुआ है। साथ ही, यहाँ सावन सोमवार और महाशिवरात्रि पर होने वाले उत्सव अत्यंत भव्य होते हैं।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है। दान स्वेच्छा से दिया जा सकता है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा है। सावन मास और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: मंदिर परिसर के पास धर्मशाला और शुद्ध शाकाहारी भोजन की दुकानें उपलब्ध हैं। बेहतर आवास के लिए भदोही शहर या वाराणसी जाना अधिक सुविधाजनक रहता है।

प्रश्न 6: सेमराढ़नाथ मंदिर कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: भदोही रेलवे स्टेशन (BDOI) निकटतम रेलवे स्टेशन है। सड़क मार्ग से वाराणसी, प्रयागराज, और आसपास के शहरों से बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं। मंदिर भदोही शहर से मात्र 5 किमी दूर है।

प्रश्न 7: क्या यहाँ विशेष पूजा या अनुष्ठान करवाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, मंदिर के पुजारियों से संपर्क करके आप रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, या सत्संग का आयोजन करवा सकते हैं।

📝 सेमराढ़नाथ भोले शंकर मंदिर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

सेमराढ़नाथ भोले शंकर मंदिर, भदोही का एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्तों को भगवान शिव की भक्ति में डूबने का अवसर भी देता है।

यहाँ का प्राचीन शिवलिंग, भव्य रुद्राभिषेक, और नियमित रूप से होने वाले सत्संग एवं भजन-कीर्तन हर किसी को भक्ति-रस में डुबो देते हैं। चाहे आप सच्चे भक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या फिर एक सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

भदोही की पवित्र भूमि पर स्थित यह मंदिर उन सभी के लिए एक आदर्श तीर्थ स्थल है जो भगवान शिव की अनन्य भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना रखते हैं।

🙏 हर हर महादेव ।। जय भोलेनाथ ।।

🕉️ सेमराढ़नाथ भोले शंकर मंदिर – भदोही
भगवान शिव का प्राचीन एवं चमत्कारी धाम

देवादिदेव महादेव के अन्य १२ ज्योतिर्लिंगों और शिव आराधना मंत्रों के लिए शिव पुराण का पाठ अवश्य करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 23 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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