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प्रामाणिक मंदिर विवरण

श्री अखिलेश्वर महादेव मंदिर, प्रयागराज - Shri Akhileshwar Mahadev Mandir: A Sacred Shiva Temple at the Confluence of Ganga, Yamuna, and Saraswati

218 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 22 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Shiva आराध्य देव
प्रातः 5:00 AM – 12:00 PM, शाम 4:00 PM – 9:00 PM दर्शन समय
सुबह 6:00 AM, शाम 7:00 PM आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Shiva
दर्शन समय प्रातः 5:00 AM – 12:00 PM, शाम 4:00 PM – 9:00 PM
आरती समय सुबह 6:00 AM, शाम 7:00 PM
स्थान / पता Shri Akhileshwar Mahadev Mandir, Sangam Area, Prayagraj, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🕉️ श्री अखिलेश्वर महादेव मंदिर, प्रयागराज

त्रिवेणी संगम के पवित्र तट पर भगवान शिव का दिव्य धाम (Shri Akhileshwar Mahadev Mandir, Prayagraj)

प्रयागराज के संगम क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन एवं प्रसिद्ध शिव मंदिर

🌟 परिचय: श्री अखिलेश्वर महादेव मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

प्रयागराज (इलाहाबाद) में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम के समीप स्थित श्री अखिलेश्वर महादेव मंदिर एक अत्यंत प्राचीन और दिव्य शिव स्थल है। यह मंदिर न केवल स्थानीय निवासियों की आस्था का केंद्र है, बल्कि दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी एक प्रमुख तीर्थ स्थान है।

यहाँ विराजमान भगवान शिव को “अखिलेश्वर” कहा जाता है – अर्थात सम्पूर्ण ब्रह्मांड के ईश्वर। मान्यता है कि इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने से भक्तों के समस्त कष्ट दूर होते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। संगम की पवित्र रेती और शिवालय का अद्भुत संयोजन यहाँ के वातावरण को अलौकिक बना देता है।

यह मंदिर अपनी सादगी, शांत वातावरण और प्राचीन स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है। यहाँ नियमित रूप से होने वाली आरतियाँ, भजन-कीर्तन और विशेष अवसरों पर आयोजित होने वाले धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धालुओं को गहन आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करते हैं।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

श्री अखिलेश्वर महादेव मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में, गंगा-यमुना के पवित्र संगम (त्रिवेणी संगम) के निकट स्थित है। यह स्थान धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रयागराज को “तीर्थराज” कहा जाता है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: वाराणसी (लगभग 120 किमी), लखनऊ (लगभग 200 किमी)।
  • रेल मार्ग: प्रयागराज जंक्शन (पूर्व में इलाहाबाद जंक्शन) भारतीय रेलवे का एक प्रमुख स्टेशन है। यहाँ से मंदिर लगभग 4-5 किमी दूर है। टैक्सी या ऑटो-रिक्शा आसानी से उपलब्ध हैं।
  • सड़क मार्ग: प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्गों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। शहर के भीतर बसें, टैक्सियाँ और ऑटो-रिक्शा से मंदिर पहुंचा जा सकता है।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज हवाई अड्डा (बमरौली) है, जो शहर से लगभग 12-15 किमी दूर है। यहाँ से मंदिर टैक्सी द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।
🗺️

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

संगम क्षेत्र से दूरी: ~1-2 किमी
प्रयागराज जंक्शन से: ~4 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

प्रयागराज का महत्व पुराणों और रामायण-महाभारत काल से जुड़ा है। श्री अखिलेश्वर महादेव मंदिर की उत्पत्ति भी प्राचीन कथाओं से जुड़ी है। मान्यता है कि इस स्थान पर भगवान शिव ने “अखिलेश्वर” रूप में दर्शन दिए थे, जहाँ उन्होंने समस्त संसार के कल्याण की कामना से तपस्या की थी।

एक प्रचलित कथा के अनुसार, जब माँ सती के शरीर के अंग विभिन्न स्थानों पर गिरे थे, तब प्रयागराज में उनकी उंगली गिरी थी, जिसके कारण यह स्थान शक्तिपीठों में भी गिना जाता है। उसी प्रसंग में भगवान शिव ने यहाँ “अखिलेश्वर” नाम से विराजमान होकर अपनी भक्तों पर कृपा बनाए रखी।

ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है। समय-समय पर इसका जीर्णोद्धार हुआ, परन्तु इसकी मूल प्राचीनता और पवित्रता आज भी बनी हुई है। आज भी मंदिर परिसर में वह प्राचीन शिवलिंग विद्यमान है, जिसके दर्शन के लिए हजारों भक्त प्रतिदिन आते हैं।

🕉️

“अखिलेश्वर – सम्पूर्ण ब्रह्मांड के ईश्वर”

मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से जल चढ़ाने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं भगवान शिव पूर्ण करते हैं।

🏛️ वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

श्री अखिलेश्वर महादेव मंदिर की वास्तुकला प्राचीन नागर शैली का सुंदर उदाहरण है। मंदिर का शिखर दूर से ही आकर्षित करता है। मुख्य गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग अत्यंत प्राचीन है और इसकी पूजा विधिवत रूप से की जाती है।

🙏 प्राचीन शिवलिंग

गर्भगृह में स्थित शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है। इसकी पूजा में जलाभिषेक, बिल्वपत्र, धतूरा और भांग का विशेष महत्व है। मान्यता है कि यहाँ भगवान शिव “अखिलेश्वर” रूप में विराजमान हैं, जो भक्तों की हर पुकार सुनते हैं।

🐂 नंदी की प्रतिमा

मंदिर के प्रवेश द्वार पर नंदी जी की भव्य प्रतिमा स्थापित है। भगवान शिव के परम भक्त नंदी यहाँ विराजमान हैं और भक्तों को शिव की कृपा का अनुभव कराते हैं।

🌿 संगम का दिव्य दृश्य

मंदिर की छत से गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। माघ मेले के दौरान यह स्थान विशेष रूप से आकर्षक लगता है।

🪷 शांत वातावरण

मंदिर परिसर बहुत ही स्वच्छ और शांत है। यहाँ बैठकर ध्यान लगाने या कुछ समय मौन बिताने से मन को असीम शांति मिलती है।

🎶 आरती, भजन और भक्ति लिरिक्स

श्री अखिलेश्वर महादेव मंदिर में प्रतिदिन सुबह-शाम भव्य आरती होती है, जिसमें शामिल होना भक्तों के लिए अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। यहाँ शिव भजनों की धुनें वातावरण को भक्तिमय बना देती हैं।

ॐ जय शिव ओंकारा – प्रसिद्ध आरती
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे,
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
शिव भजन – “नमो नमो शंकरा”
नमो नमो शंकरा, नमो नमो शंकरा।
भोले भंडारी, तुम्हारी शरण में आए॥
जटा में गंगा धारी, चंद्रमा शीश विराजे,
डमरू वीणा बाजे, प्रभु सबके रक्षक हो॥

भक्तगण यहाँ इन भजनों का सामूहिक गायन करते हैं, जिससे भक्ति रस में डूबने का अनुभव होता है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • त्रिवेणी संगम स्नान के बाद दर्शन: प्रयागराज के संगम में स्नान के बाद यहाँ भगवान शिव के दर्शन करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
  • मनोकामना पूर्ति: सच्चे मन से की गई प्रार्थना और जलाभिषेक से भगवान शिव भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
  • संतान प्राप्ति: संतान सुख की कामना से यहाँ विशेष पूजा करने वालों को शीघ्र ही फल मिलता है।
  • रोग-शोक निवारण: मान्यता है कि यहाँ के शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल अनेक रोगों को दूर करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।
  • पितृ तर्पण का महत्व: प्रयागराज संगम के समीप होने के कारण यहाँ पितरों को तर्पण करने का भी विशेष महत्व है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🕉️

महाशिवरात्रि

यहाँ का सबसे भव्य पर्व। रात्रि जागरण, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और भंडारे का आयोजन। दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।

🌿

श्रावण मास

सावन के पूरे महीने विशेष पूजा, सोमवार व्रत और कांवड़ यात्रा। मंदिर परिसर शिवभक्तों से भर जाता है।

🌊

माघ मेला (कुंभ)

माघ मास एवं कुंभ के अवसर पर लाखों श्रद्धालु संगम स्नान कर यहाँ भगवान अखिलेश्वर के दर्शन करते हैं।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • त्रिवेणी संगम: गंगा, यमुना और सरस्वती का पवित्र संगम, यहाँ से मात्र 1-2 किमी दूर।
  • अलोपी देवी मंदिर: प्रसिद्ध शक्तिपीठ, मंदिर से लगभग 3 किमी दूर।
  • हनुमान मंदिर (इलाहाबाद किला): लेटे हुए हनुमान जी की मूर्ति वाला अनोखा मंदिर।
  • आनंद भवन: नेहरू-गांधी परिवार का ऐतिहासिक संग्रहालय।
  • इलाहाबाद किला: अशोक स्तंभ और अक्षयवट के लिए प्रसिद्ध।
  • शंकर विमान मंडपम: एक भव्य आधुनिक मंदिर, शहर के निकट।
  • प्रयागराज विश्वविद्यालय: देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक, यहाँ का संग्रहालय देखने योग्य है।
📌 यात्रा टिप: प्रयागराज में कम से कम दो दिन रहकर सभी धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन कर सकते हैं। संगम पर नाव की सवारी अवश्य लें।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

प्रयागराज की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च तक का समय सर्वोत्तम होता है, जब मौसम सुहावना रहता है। माघ मास (जनवरी-फरवरी) में माघ मेले का आयोजन होता है, जो अपने आप में एक अनूठा अनुभव है।

  • शरद ऋतु से वसंत ऋतु: यात्रा के लिए आदर्श।
  • श्रावण मास: यदि आप शिवभक्ति का विशेष वातावरण देखना चाहें तो सावन का महीना बहुत अच्छा है, परंतु भीड़ अधिक होती है।

📝 यात्रा सुझाव

  • प्रातः काल संगम स्नान करके मंदिर दर्शन करें – इससे पुण्य अधिक होता है।
  • महाशिवरात्रि या श्रावण सोमवार पर यात्रा से बचें यदि अत्यधिक भीड़ पसंद न हो।
  • मंदिर परिसर में शांति बनाए रखें और स्वच्छता में सहयोग करें।
  • पूजा सामग्री मंदिर के बाहर आसानी से मिल जाती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: श्री अखिलेश्वर महादेव मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) शहर में, गंगा-यमुना के संगम के निकट स्थित है।

प्रश्न 2: मंदिर के दर्शन का समय क्या है?

उत्तर: मंदिर प्रतिदिन प्रातः 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है। आरती का समय सुबह 6:00 बजे और शाम 7:00 बजे है।

प्रश्न 3: क्या मंदिर में कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: नहीं, मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है।

प्रश्न 4: क्या मंदिर परिसर में भोजन की व्यवस्था है?

उत्तर: मंदिर परिसर में भंडारा और प्रसाद की व्यवस्था समय-समय पर की जाती है। आस-पास कई शुद्ध शाकाहारी भोजनालय भी उपलब्ध हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ रुकने की सुविधा है?

उत्तर: प्रयागराज में सरकारी धर्मशालाओं से लेकर लक्ज़री होटलों तक की सुविधा उपलब्ध है। मंदिर के निकट भी कई अतिथि गृह हैं।

प्रश्न 6: मंदिर तक पहुँचने का सबसे सुगम मार्ग कौन सा है?

उत्तर: प्रयागराज जंक्शन से टैक्सी या ऑटो लेकर सीधे मंदिर पहुँचा जा सकता है। संगम क्षेत्र से पैदल भी जाया जा सकता है।

📝 श्री अखिलेश्वर महादेव मंदिर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

प्रयागराज का श्री अखिलेश्वर महादेव मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह आस्था, शांति और आध्यात्मिकता का साक्षात् केंद्र है। त्रिवेणी संगम के पवित्र जल के सान्निध्य में स्थित यह शिवालय भक्तों को गहन मानसिक शांति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कराता है।

यहाँ की प्राचीन शिवलिंग, भव्य आरतियाँ, मंत्रोच्चार और भजनों की धुनें वातावरण को दिव्य बना देती हैं। यदि आप प्रयागराज आएँ, तो संगम स्नान के बाद श्री अखिलेश्वर महादेव के दर्शन करना अपनी यात्रा का अनिवार्य अंग बनाएँ।

🙏 ॐ नमः शिवाय ।। हर हर महादेव ।।

🕉️ श्री अखिलेश्वर महादेव मंदिर, प्रयागराज
त्रिवेणी संगम के तट पर भगवान शिव का अखिलेश्वर रूप

देवादिदेव महादेव के अन्य १२ ज्योतिर्लिंगों और शिव आराधना मंत्रों के लिए शिव पुराण का पाठ अवश्य करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 22 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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