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प्रामाणिक मंदिर विवरण

तिलंगा शिवजतपुर मंदिर – भदोही: भगवान शिव का प्राचीन एवं दिव्य धाम | Tilanga Shivjatpur Mandir Bhadohi: A Sacred Abode of Lord Shiva

201 दर्शनार्थी | प्रकाशित: 23 March 2026
इतिहास व दर्शन पढ़ें
दर्शन निर्देशिका (Temple Stats)
Shiva आराध्य देव
6 AM - 9 PM दर्शन समय
आरती समय आरती समय

मंदिर संक्षिप्त विवरण

आराध्य देव Shiva
स्थान / पता Tilanga Shivjatpur Mandir, Tilanga Shivjatpur, Bhadohi, Uttar Pradesh
आकार:
कंट्रास्ट:

🙏 तिलंगा शिवजतपुर मंदिर – भदोही

भगवान शिव की तपोभूमि, श्रद्धा और आस्था का अनुपम केंद्र (Tilanga Shivjatpur Mandir, Bhadohi)

भदोही जिले में स्थित एक प्राचीन एवं ऐतिहासिक शिव मंदिर

🌟 परिचय: तिलंगा शिवजतपुर मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले (संत रविदास नगर) में स्थित तिलंगा शिवजतपुर मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन और दिव्य धाम है। यह मंदिर न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि दूर-दूर से आने वाले भक्तों के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि यहाँ स्थित शिवलिंग स्वयंभू है और इसकी पूजा-अर्चना से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

मंदिर की वास्तुकला, शांत वातावरण, और नियमित रूप से होने वाली रुद्राभिषेक, महाशिवरात्रि उत्सव, तथा सावन मेले का आयोजन भक्तों को अद्भुत शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। यह स्थान अपने आप में एक तपोभूमि के समान है, जहाँ भगवान शिव के दर्शन मात्र से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

📍 स्थान और कैसे पहुंचें (Location & How to Reach)

तिलंगा शिवजतपुर मंदिर उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में स्थित है। यह जिला मुख्यालय भदोही से लगभग 12 किमी की दूरी पर है और प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

  • निकटतम प्रमुख शहर: भदोही (12 किमी), वाराणसी (45 किमी), प्रयागराज (90 किमी)
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन भदोही (BDOI) है, जो वाराणसी-लखनऊ मार्ग पर स्थित है। वाराणसी जंक्शन (BSB) प्रमुख स्टेशन है, जो लगभग 45 किमी दूर है।
  • सड़क मार्ग: भदोही से मंदिर तक टैक्सी, ऑटो या स्थानीय बसें आसानी से उपलब्ध हैं। राज्य परिवहन की बसें वाराणसी, प्रयागराज, मिर्जापुर आदि से भदोही के लिए चलती हैं।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी का लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (VNS) है, जो लगभग 55 किमी दूर है।
🗺️

तिलंगा शिवजतपुर, भदोही, उत्तर प्रदेश

भदोही से दूरी: ~12 किमी
वाराणसी से दूरी: ~45 किमी

📜 पौराणिक कथा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

तिलंगा शिवजतपुर मंदिर का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान कभी प्राचीन काल में तिलंगा नामक एक महान ऋषि की तपोभूमि रहा है। ऋषि ने यहाँ कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और यहाँ स्वयंभू शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए। तभी से इस स्थान का नाम "तिलंगा शिवजतपुर" पड़ा।

कहा जाता है कि यह शिवलिंग अपने आप प्रकट हुआ था और आज भी इसकी दिव्य चमक तथा ऊर्जा भक्तों को आकर्षित करती है। समय के साथ, स्थानीय राजाओं और भक्तों के सहयोग से मंदिर का विस्तार हुआ। आज यह मंदिर अपनी प्राचीनता, वास्तुकला और आध्यात्मिक महत्ता के लिए प्रसिद्ध है।

🕉️

"यहाँ का शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है, जिसकी पूजा से मोक्ष की प्राप्ति होती है।"

मान्यता: इस मंदिर में सच्चे मन से जल चढ़ाने से भगवान शिव सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं और रोग-शोक से मुक्ति मिलती है।

🏛️ भव्य वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

🙏 स्वयंभू शिवलिंग और नक्काशी

तिलंगा शिवजतपुर मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में निर्मित है, जिसमें सुंदर नक्काशी, ऊँचा शिखर और विशाल प्रांगण देखने को मिलता है। गर्भगृह में भगवान शिव का अद्भुत स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है, जिसकी पूजा विधि-विधान से की जाती है।

🎨 मंदिर परिसर

मंदिर परिसर में भगवान शिव की विशाल मूर्ति, नंदी की प्रतिमा, और एक पवित्र कुंड (शिव कुंड) है, जहाँ भक्त स्नान कर पूजा का लाभ लेते हैं।

🌳 शांत वाटिका

मंदिर के चारों ओर हरियाली से परिपूर्ण वाटिका है, जहाँ बैठकर ध्यान और भजन का आनंद लिया जा सकता है।

✨ धार्मिक महत्व एवं मान्यताएं

  • स्वयंभू शिवलिंग: मान्यता है कि यह शिवलिंग स्वतः प्रकट हुआ है और यहाँ की पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है।
  • रोग निवारण: भक्तों का विश्वास है कि यहाँ जल चढ़ाने और बेलपत्र अर्पित करने से असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं।
  • मोक्ष की प्राप्ति: श्रद्धा से यहाँ पूजा करने वाले भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • दांपत्य जीवन में सुख: विवाहित जोड़े यहाँ पूजा कर दाम्पत्य जीवन की समस्याओं से मुक्ति पाते हैं।
  • सावन सोमवार का विशेष महत्व: सावन के महीने में यहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

🎉 यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार

🔱

महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ भव्य रुद्राभिषेक, जागरण और भंडारे का आयोजन होता है। हज़ारों भक्त दर्शन करने आते हैं।

🌧️

सावन मेला

सावन के महीने में हर सोमवार को विशेष पूजा, कांवड़ यात्रा और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।

🌼

श्रावणी मेला

पूरे श्रावण मास में विशेष पूजा-अर्चना, भजन और प्रवचनों का आयोजन किया जाता है।

🪔

कार्तिक पूर्णिमा

इस दिन मंदिर में दीपदान और विशेष आरती का आयोजन होता है।

📿

शिव पुराण कथा

वर्ष में एक बार सात दिवसीय शिव पुराण कथा का आयोजन किया जाता है।

🏞️ आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

  • भदोही शहर: जिला मुख्यालय, यहाँ के हस्तनिर्मित कालीनों के लिए प्रसिद्ध।
  • वाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, सारनाथ – लगभग 45 किमी।
  • प्रयागराज: त्रिवेणी संगम, हनुमान मंदिर, आनंद भवन – लगभग 90 किमी।
  • मिर्जापुर: विन्ध्याचल मंदिर, सीताकुंड – लगभग 70 किमी।
  • जौनपुर: शाही किला, अटाला मस्जिद – लगभग 60 किमी।
📌 यात्रा टिप: वाराणसी या प्रयागराज की यात्रा के दौरान तिलंगा शिवजतपुर मंदिर के दर्शन करना एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव हो सकता है।

🗓️ यात्रा का सर्वोत्तम समय और सुझाव

🌤️ सर्वोत्तम समय

भदोही में यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के महीने सबसे उपयुक्त हैं। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है।

  • शीत ऋतु (अक्टूबर-फरवरी): यात्रा के लिए आदर्श।
  • सावन (जुलाई-अगस्त): यदि आप विशेष शिव भक्ति का अनुभव करना चाहें तो यह समय सर्वोत्तम है।

📝 यात्रा सुझाव

  • मंदिर सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है।
  • शाम की आरती (लगभग 7:00 बजे) में अवश्य शामिल हों।
  • मंदिर परिसर में शुद्ध शाकाहारी भोजन की व्यवस्था है।
  • पूजा-अर्चना के लिए बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि स्थानीय दुकानों से प्राप्त कर सकते हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: तिलंगा शिवजतपुर मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह उत्तर प्रदेश के भदोही जिले (संत रविदास नगर) में स्थित है। जिला मुख्यालय भदोही से लगभग 12 किमी दूर है।

प्रश्न 2: इस मंदिर की सबसे खास विशेषता क्या है?

उत्तर: यहाँ का स्वयंभू शिवलिंग, प्राचीन इतिहास और शिवरात्रि तथा सावन में होने वाले भव्य आयोजन विशेष आकर्षण हैं।

प्रश्न 3: क्या यहाँ कोई प्रवेश शुल्क है?

उत्तर: मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है।

प्रश्न 4: यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त है, साथ ही सावन मास और महाशिवरात्रि के अवसर पर भी विशेष उत्सव होते हैं।

प्रश्न 5: क्या यहाँ भोजन और आवास की व्यवस्था है?

उत्तर: भदोही में कई धर्मशालाएँ और निजी होटल उपलब्ध हैं। बेहतर आवास के लिए वाराणसी भी निकट है। मंदिर परिसर में भोजन की व्यवस्था है।

प्रश्न 6: भदोही कैसे पहुँचा जा सकता है?

उत्तर: भदोही रेलवे स्टेशन (BDOI) वाराणसी-लखनऊ रेलमार्ग पर स्थित है। सड़क मार्ग से वाराणसी, प्रयागराज, मिर्जापुर आदि से बसें चलती हैं।

📝 तिलंगा शिवजतपुर मंदिर की यात्रा का आध्यात्मिक लाभ

तिलंगा शिवजतपुर मंदिर, भदोही का एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ भगवान शिव की कृपा सीधे अनुभव की जा सकती है। यहाँ की प्राचीनता, आस्था और शांत वातावरण हर भक्त को आध्यात्मिक सुख-शांति प्रदान करता है।

महाशिवरात्रि, सावन सोमवार, और कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ विशेष आयोजन होते हैं, जिनमें सहभागिता करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। चाहे आप सच्चे शिव भक्त हों, आध्यात्मिक साधक हों, या सांस्कृतिक पर्यटक, यह स्थान आपको एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

ॐ नमः शिवाय ।। जय भोलेनाथ ।।

🕉️ तिलंगा शिवजतपुर मंदिर – भदोही
श्रद्धा, भक्ति और शिवमय ऊर्जा का साक्षात् धाम

देवादिदेव महादेव के अन्य १२ ज्योतिर्लिंगों और शिव आराधना मंत्रों के लिए शिव पुराण का पाठ अवश्य करें।

प्रामाणिक मंदिर दर्शन मार्गदर्शिका

यह मंदिर विवरण भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा प्रामाणिक धर्मग्रंथों, ऐतिहासिक शोधपत्रों एवं संबंधित मंदिर समितियों द्वारा जारी की गई अधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समीक्षित एवं सत्यापित किया गया है।

इतिहास एवं तथ्य-जांचित अंतिम सत्यापन तिथि: 23 Mar 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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