वैदिक मंत्र संग्रह · पावन जप
75 पावन मंत्र उपलब्ध
१०८ जप विधि व भावार्थ

Vedic Mantra

Vedic Mantra के सभी शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, १०८ जप विधि, साधना नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ।

१०८ जप माला विधि
संस्कृत व हिंदी शुद्ध उच्चारण संदर्भ
बीज मंत्र ऊर्जा चक्र जागरण
संपादकीय संदर्भ-आधारित सामग्री

Vedic Mantra सूची

नित्य साधना, मन की शांति एवं मनोकामना पूर्ति हेतु संपूर्ण मंत्र संकलन

कुल 75 मंत्र
भगवान सुदर्शन १०८ जप विधि

श्री सुदर्शन चक्र महामंत्र: अर्थ, विधि और नकारात्मक ऊर्जा का नाश

भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र का यह महामंत्र समस्त नकारात्मक शक्तियों और तंत्र बाधाओं को नष्ट करने वाला परम रक्षा कवच है।

भगवान महामृत्युंजय १०८ जप विधि

महामृत्युंजय संजीवनी मंत्र: अर्थ, विधि और अकाल मृत्यु से रक्षा

महामृत्युंजय संजीवनी मंत्र भगवान शिव का अत्यंत शक्तिशाली मंत्र है जो अकाल मृत्यु के भय को दूर कर जीवन की रक्षा करता है।

भगवान नारायण १०८ जप विधि

नारायण कवच: अर्थ, महत्व और संपूर्ण पाठ विधि | Narayana Kavach

नारायण कवच भगवान विष्णु का अत्यंत शक्तिशाली रक्षा कवच है। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, इसका पाठ करने से साधक को सभी प्रकार क…

हनुमान जी १०८ जप विधि

श्री हनुमान मूल मंत्र: अर्थ, जाप विधि और आध्यात्मिक लाभ

श्री हनुमान जी के मूल मंत्रों का विस्तृत विवरण, जाप विधि और उनके चमत्कारी लाभों को जानें।

बृहस्पति देव १०८ जप विधि

बृहस्पति मंत्र: अर्थ, महत्व और गुरु ग्रह शांति की संपूर्ण विधि

बृहस्पति देव का मंत्र जप जीवन में ज्ञान, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। जानिए गुरु मंत्र की विधि और ल…

सूर्य देव १०८ जप विधि

सूर्य ग्रह शांति मंत्र: ॐ सूर्याय नमः एवं ॐ घृणिः सूर्य आदित्योम

सूर्य देव की उपासना के लिए ॐ सूर्याय नमः और ॐ घृणिः सूर्य आदित्योम अत्यंत प्रभावशाली मंत्र हैं। यह मंत्र आरोग्य और तेज प्रदान…

भगवान वराह १०८ जप विधि

भगवान वराह प्रातः स्मरणीय मंत्र: अर्थ, विधि और संपूर्ण आरती

भगवान वराह के प्रातः स्मरणीय मंत्र और चामुंडा बीज मंत्र का संयुक्त पाठ जीवन में सुरक्षा, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान …

भगवान रुद्र / शिव १०८ जप विधि

रुद्र सूक्तम एवं चमकम्: अर्थ, महत्व और संपूर्ण पाठ विधि

रुद्र सूक्तम एवं चमकम् भगवान शिव की परम स्तुति है। यह यजुर्वेद का एक अत्यंत शक्तिशाली वैदिक मंत्र है जो साधक को भौतिक और आध्य…

माता भुवनेश्वरी १०८ जप विधि

माता भुवनेश्वरी ऋणहर्ता मंत्र साधना: अर्थ, विधि और ऐतिहासिक महत्व

माता भुवनेश्वरी और महामृत्युंजय मंत्र का यह अद्भुत संगम ऋणों से मुक्ति और जीवन में ऐश्वर्य प्रदान करने वाला है। जानें इसकी पू…

भगवान धन्वंतरि १०८ जप विधि

भगवान धन्वंतरि मंत्र: अर्थ, लाभ और आरोग्य प्राप्ति की संपूर्ण विधि

भगवान धन्वंतरि आरोग्य के देवता हैं। उनका यह सिद्ध मंत्र न केवल शारीरिक व्याधियों को दूर करता है, बल्कि अकाल मृत्यु के भय से भ…

माता त्रिपुर सुंदरी १०८ जप विधि

माता त्रिपुर सुंदरी मंत्र: वास्तु दोष निवारण और सकारात्मक ऊर्जा

माता त्रिपुर सुंदरी का यह सात्विक मंत्र वास्तु दोषों को दूर कर घर में सुख, समृद्धि और दिव्य सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

राहु ग्रह देवता १०८ जप विधि

राहु ग्रह शांति मंत्र: गृह क्लेश मुक्ति और पारिवारिक सुख हेतु

राहु ग्रह की शांति और गृह क्लेश निवारण के लिए 'ॐ रां राहवे नमः' मंत्र अत्यंत प्रभावशाली है। यह मंत्र पारिवारिक सुख और मानसिक …

मंत्र साधना एवं 108 जप के सार्वभौमिक नियम

शास्त्रसम्मत विधि से जप करने पर ही मंत्र की पूर्ण ऊर्जा एवं मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है

1. ब्रह्ममुहूर्त एवं समय

सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्ममुहूर्त, प्रातः 4:00 से 6:00 बजे) अथवा संध्याकाल में जप करने से मन स्वतः एकाग्र व शांत रहता है।

2. आसन एवं दिशा

कुशा, ऊनी अथवा स्वच्छ सूती आसन पर बैठें। जप के समय साधक का मुख सदैव पूर्व (East) अथवा उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए।

3. 108 जप माला विधि

रुद्राक्ष, तुलसी अथवा स्फटिक माला से 108 बार जप करें। माला फेरते समय सुमेरु (शीर्ष दाने) को कभी लांघा नहीं जाता।

4. भाव एवं एकाग्रता

मंत्र के अर्थ का ध्यान करते हुए उपांशु (होंठ हिलें पर आवाज न आए) या मानस जप करना शास्त्रों में सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

Vedic Mantra का आध्यात्मिक महत्व

सनातन परंपरा में Vedic Mantra का पाठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मबल की प्राप्ति का सशक्त माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने प्रत्येक मंत्र में ध्वनि कंपन (Sound Frequency) का ऐसा संयोजन किया है जो साधक की चेतना को उच्चतम स्तर पर प्रतिष्ठित करता है।

१. बीज मंत्र और उनकी दिव्य शक्ति

इस श्रेणी के मंत्रों में निहित बीज मंत्र शरीर के ऊर्जा चक्रों (Chakra System) को सक्रिय करते हैं। जब साधक एकाग्रचित्त होकर नित्य जप करता है, तो उसके भीतर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और दैवीय अनुकंपा का अनुभव होता है।

संपादकीय सुझाव: मंत्र जप के समय मन में किसी प्रकार का संशय न रखें। पूर्ण श्रद्धा, शुद्ध आसन और नियत समय पर जप करने से मंत्र सिद्धि शीघ्र प्राप्त होती है।

२. जप के उपरांत क्षमा प्रार्थना

मंत्र जप पूर्ण होने के बाद कम से कम २ मिनट मौन ध्यान करें और अंत में ईश्वर से अनजाने में हुई किसी भी त्रुटि (मात्रा, स्वर अथवा उच्चारण) के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

Vedic Mantra – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

शास्त्रसम्मत संदर्भों के आधार पर तैयार महत्वपूर्ण जिज्ञासाएं एवं समाधान

शास्त्रों के अनुसार प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त अथवा संध्याकाल में शुद्ध आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके 108 बार रुद्राक्ष अथवा तुलसी माला से जप करना सर्वोत्तम माना गया है।

हाँ, शुद्ध भाव, पवित्रता और श्रद्धा के साथ कोई भी साधक इन पावन वैदिक स्तुति मंत्रों का जप कर सकता है।

भारतीय ज्योतिष और खगोल शास्त्र में 27 नक्षत्र होते हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। 108 बार मंत्र जप करने से ब्रह्मांड की समस्त सकारात्मक ऊर्जा हमारे शरीर और मन के साथ संरेखित होती है।

🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!