भक्ति काव्य व भजन रविवार विशेष (भगवान सूर्य नारायण)

श्री गंगा लहरी सम्पूर्ण पाठ - सम्पूर्ण मूल पाठ, सरल हिंदी अर्थ, लाभ एवं विधि

श्री गंगा लहरी का सम्पूर्ण पाठ, सरल हिंदी अर्थ, जप विधि और आध्यात्मिक लाभ जानें। माँ गंगा की कृपा पाने हेतु यह दिव्य स्तोत्र संदर्भ सहित पढ़ें।

🌺 श्री गंगा लहरी सम्पूर्ण पाठ - आध्यात्मिक परिचय एवं संक्षेप

सनातन धर्म की पावन वांग्मय परंपरा में श्री गंगा लहरी सम्पूर्ण पाठ का अनुष्ठान अत्यंत मंगलकारी, दारिद्र्य नाशक, पाप प्रणाशक और आत्मिक चेतना को जाग्रत करने वाला माना गया है। माँ गंगा की अनन्य कृपा प्राप्त करने हेतु यह एक अचूक और दिव्य माध्यम है। इस संपूर्ण आलेख में प्रामाणिक मूल पाठ/लिरिक्स, प्रत्येक पद का सरल हिंदी भावार्थ, शास्त्रीय जप व गायन विधि, शुभ मुहूर्त और नित्य पाठ से प्राप्त होने वाले अलौकिक आध्यात्मिक लाभ विस्तार से प्रस्तुत किए गए हैं।

श्री गंगा लहरी सम्पूर्ण पाठ का आध्यात्मिक एवं पौराणिक महत्व

धार्मिक ग्रंथों, संहिताओं और पुराणों के अनुसार, जब भी कोई साधक सच्चे हृदय और निष्काम भाव से माँ गंगा की स्तुति करता है, तो उसके जीवन के समस्त संशय, भय, दरिद्रता, वास्तु दोष और ग्रह दोष स्वतः शांत हो जाते हैं। श्री गंगा लहरी सम्पूर्ण पाठ केवल शब्दों का संकलन नहीं, अपितु उच्च आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत एक सिद्ध रचना है, जिसकी प्रत्येक ध्वनि अंतःकरण को निर्मल और सकारात्मक तरंगों से परिपूर्ण कर देती है।

श्री गंगा लहरी सम्पूर्ण पाठ - सम्पूर्ण प्रामाणिक मूल पाठ

॥ श्री श्री गंगा लहरी सम्पूर्ण पाठ प्रारंभ ॥

ॐ श्री गणेशाय नमः । ॐ श्री गुरुभ्यो नमः । ॐ श्री माँ गंगा नमः ।

अथ ध्यानम् एवं पावन स्तुति पाठं करिष्ये ॥

जय जय सुरनायक जनसुखदायक प्रनतपाल भगवंता ।

गो द्विज हितकारी जय असुरारी सिन्धुसुता प्रिय कंता ॥

पालन कर्ता दुष्ट विनाशी भक्त मनोरथ पूरन कामी ।

सकल जगत के तारनहारे जय जय दीन दयाल स्वामी ॥

करुणा सिंधु भक्त प्रतिपालक शरण गहे प्रभु संकट टारो ।

अंतरयामी घट घट वासी भव सागर से पार उतारो ॥

ऋद्धि सिद्धि नव निधि के दाता मंगल मूर्ति कृपा विधाता ।

जो जन निसदिन ध्यान लगावै सो जन निर्मल पदवी पावै ॥

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ।

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देव देव ॥

॥ इति श्री श्री गंगा लहरी सम्पूर्ण पाठ संपूर्णम् ॥

प्रत्येक श्लोक एवं मुख्य पदों का सरल हिंदी भावार्थ

इस पावन पाठ में माँ गंगा के अनंत दिव्य स्वरूप, अपरिमित दयालुता, शरणागतवत्सलता और सृष्टि पालन की महिमा का विशद वर्णन किया गया है।

श्री गंगा लहरी सम्पूर्ण पाठ पाठ व गायन की शास्त्रीय विधि एवं नियम

  • शुद्धि एवं स्नान: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्याकाल में शुद्ध जल से स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • दिशा व आसन: उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर मुख कर कुश अथवा ऊनी आसन पर बैठें।
  • दीप प्रज्वलन: शुद्ध घी का दीपक और सुगंधित धूप प्रज्वलित करें।
  • शुद्ध उच्चारण: शांत चित्त से स्पष्ट और मधुर स्वर में पाठ करें।

नित्य पाठ से प्राप्त होने वाले दिव्य लाभ

मानसिक शांति, नकारात्मक ऊर्जा की समाप्ति, पारिवारिक सौहार्द, ग्रह शांति और माँ गंगा की अखंड कृपा प्राप्त होती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 01 Nov 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!