परिवर्तिनी (पद्मा) एकादशी व्रत 2028: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा
परिवर्तिनी एकादशी, जिसे पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, भगवान विष्णु के शयन काल में करवट बदलने का प्रतीक है...
अजा एकादशी व्रत 2028: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा
अजा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति और समस्त पापों के नाश के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। भाद्रपद मा...
श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत 2028: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी संतान प्राप्ति और उनके कल्याण के लिए अत्यंत फलदायी मानी गई है। इस दिन भग...
कामिका एकादशी व्रत 2028: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा
कामिका एकादशी का व्रत श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में आता है, जो भगवान विष्णु की कृपा और समस्त पापों के विनाश के लिए अ...
योगिनी एकादशी व्रत 2028: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा एवं आध्यात्मिक महत्व
योगिनी एकादशी का व्रत समस्त पापों का नाश करने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष क...
मोहिनी एकादशी व्रत 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा एवं आध्यात्मिक महत्व
मोहिनी एकादशी वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार को समर्पित है...
पापमोचिनी एकादशी व्रत 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा
पापमोचिनी एकादशी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह एकादशी समस्त पापों का नाश करने वाली और मोक्ष...
जया एकादशी व्रत 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा एवं आध्यात्मिक महत्व
जया एकादशी माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और समस्त पापो...
सफला एकादशी व्रत 2026: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा एवं संपूर्ण शास्त्रीय विधान
सफला एकादशी का व्रत पौष मास के कृष्ण पक्ष में आता है, जो भगवान नारायण की कृपा से सभी कार्यों में सफलता प्रदान करने ...
रमा एकादशी व्रत 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा
रमा एकादशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु के 'रमा' स्वरूप की आराधना के ल...
पापांकुशा एकादशी व्रत 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा
पापांकुशा एकादशी का व्रत समस्त पापों का नाश करने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। आश्विन मास के शुक्ल पक...
इंदिरा एकादशी व्रत 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं पितृ दोष मुक्ति की संपूर्ण शास्त्रीय मार्गदर्शिका
इंदिरा एकादशी पितृपक्ष के दौरान आने वाली अत्यंत महत्वपूर्ण एकादशी है, जो पितरों को मोक्ष प्रदान करने और साधक के समस...
सनातन पर्व परंपरा एवं वैदिक काल-गणना का विज्ञान
सनातन हिंदू परंपरा में प्रत्येक पर्व और त्यौहार केवल सामाजिक उत्सव नहीं हैं, बल्कि वे सूर्य, चंद्रमा, नक्षत्रों और ऋतु संक्रमण के गहन खगोलीय सामंजस्य पर आधारित आध्यात्मिक विज्ञान हैं। वैदिक काल से ही हमारे ऋषियों ने मानव जीवन को प्रकृति के साथ लयबद्ध करने हेतु इन पावन पर्वों का निर्धारण किया है।
१. उदया तिथि एवं काल-व्यापिनी तिथि का शास्त्रीय नियम
धर्मसिंधु एवं निर्णयसिंधु ग्रंथों के अनुसार, हिंदू धर्म में पर्वों का निर्णय मुख्य रूप से दो प्रमुख आधारों पर होता है:
- उदया तिथि (Udaya Tithi): जिस तिथि में सूर्योदय होता है, दिनभर सामान्यतः उसी तिथि का प्रभाव माना जाता है (जैसे रामनवमी, कृष्ण जन्माष्टमी व्रत, दशहरा)।
- काल-विशिष्ट व्यापिनी तिथि (Kala Vyapini): कुछ पर्व विशिष्ट प्रहर में मनाए जाते हैं—जैसे दीपावली का लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल (सूर्यास्त उपरांत) में, महाशिवरात्रि का रुद्राभिषेक निशीथ काल (मध्यरात्रि) में, और करवा चौथ का पारण चंद्रोदय काल में। ऐसे में उस विशिष्ट काल में उपस्थित तिथि को ही ग्रहण किया जाता है।
२. लूनी-सोलर (Lunisolar) समन्वय और अधिकमास
सौर वर्ष ३६५.२४२ दिन का और चंद्र वर्ष ३५४.३६ दिन का होता है। प्रतिवर्ष आने वाले लगभग ११ दिनों के अंतर को संतुलित करने हेतु प्रत्येक ३२ माह १६ दिन (लगभग ३ वर्ष) में चंद्र वर्ष में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है, जिसे 'अधिकमास' या 'पुरुषोत्तम मास' कहा जाता है। इसी वैज्ञानिक सामंजस्य के कारण हिंदू त्यौहार हमेशा अपनी प्राकृतिक ऋतुओं के अनुसार ही आते हैं।