एकादशी व्रत • वर्ष २०२७

मोहिनी एकादशी व्रत 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा एवं आध्यात्मिक महत्व

मोहिनी एकादशी वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार को समर्पित है, जो मोह-माया के बंधनों से मुक्ति दिलाने वाला और पापों का नाश करने वाला माना गया है। इस वर्ष 2027 में मोहिनी एकादशी का व्रत अत्यंत फलदायी है, जो साधक को मोक्ष और मानसिक शांति प्रदान करता है।

१९ मई २०२७, बुधवार तिथि व दिनांक
एकादशी व्रत धार्मिक श्रेणी
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१० मिनट पठन अवधि
महत्वपूर्ण सारांश: मोहिनी एकादशी वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार को समर्पित है, जो मोह-माया के बंधनों से मुक्ति दिलाने वाला और पापों का नाश करने वाला माना गया है। इस वर्ष 2027 में मोहिनी एकादशी का व्रत अत्यंत फलदायी है, जो साधक को मोक्ष और मानसिक शांति प्रदान करता है।
पावन पर्व तिथि एवं समय निर्धारण
पावन तिथि: वैशाख शुक्ल पक्ष एकादशी
प्रारंभ / मुख्य तिथि: १९ मई २०२७, बुधवार
शुभ मुहूर्त / समय: 19 मई 2027, प्रातः 05:30 से 08:15 बजे (पारण)
विशेष उत्सव क्षेत्र: संपूर्ण भारत
पावन सिद्ध मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः

मोहिनी एकादशी 2027: आध्यात्मिक और शास्त्रीय विवेचन

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को 'मोहिनी एकादशी' के नाम से जाना जाता है। स्कंद पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, यह एकादशी समस्त पापों का नाश करने वाली और मनुष्य को मोह-माया के जाल से मुक्त करने वाली है। भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के समय असुरों को भ्रमित करने के लिए जो मोहिनी रूप धारण किया था, उसी की स्मृति में यह व्रत अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।

शास्त्रीय महत्व एवं पौराणिक आधार

धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु के अनुसार, मोहिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। यह व्रत न केवल भौतिक सुख-समृद्धि प्रदान करता है, बल्कि साधक को आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर भी अग्रसर करता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को इस व्रत का महत्व बताते हुए कहा था कि जो भी व्यक्ति इस दिन विधि-विधान से पूजा करता है, उसके समस्त पूर्व जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।

पंचांग एवं शुभ मुहूर्त (2027)

विवरणसमय/तिथि
एकादशी तिथि प्रारंभ18 मई 2027, प्रातः 09:45 बजे
एकादशी तिथि समाप्त19 मई 2027, प्रातः 11:15 बजे
पारण का समय20 मई 2027, प्रातः 05:30 से 08:15 बजे तक
अभिजित मुहूर्त11:50 से 12:45 बजे

पूजा विधि एवं संकल्प

मोहिनी एकादशी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु के समक्ष हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें।

  1. कलश स्थापना: पूजा स्थल पर चौकी बिछाकर पीला वस्त्र बिछाएं और भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
  2. षोडशोपचार पूजा: भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं, तत्पश्चात चंदन, अक्षत, तुलसी दल, पीले पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें।
  3. मंत्र जप: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।
  4. आरती: अंत में भगवान विष्णु की आरती करें और क्षमा प्रार्थना करें।

मोहिनी एकादशी की पौराणिक कथा

प्राचीन काल में भद्रावती नगर में धृतिमान नामक राजा राज्य करते थे। उनके राज्य में 'धनपाल' नाम का एक वैश्य था, जिसके पांच पुत्र थे। उनमें से 'धृष्टबुद्धि' नाम का पुत्र अत्यंत पापी और दुराचारी था। पिता ने उसे घर से निकाल दिया। दुखी होकर वह वन में भटकने लगा। वहां उसकी भेंट कौण्डिन्य ऋषि से हुई। ऋषि ने उसे मोहिनी एकादशी का व्रत करने का उपदेश दिया। उस व्रत के प्रभाव से धृष्टबुद्धि के सारे पाप नष्ट हो गए और अंत में उसे विष्णु लोक की प्राप्ति हुई।

व्रत के नियम एवं सावधानियां

एकादशी के दिन अन्न का सेवन वर्जित है। फलाहार में दूध, फल, मेवे और सात्विक पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। क्रोध, लोभ और मोह का त्याग करें। रात्रि में जागरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: मोहिनी एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा?
उत्तर: 2027 में मोहिनी एकादशी का व्रत 19 मई को रखा जाएगा।

प्रश्न: व्रत पारण का सही समय क्या है?
उत्तर: व्रत का पारण 20 मई 2027 को प्रातः काल सूर्योदय के बाद किया जाएगा।

प्रश्न: क्या इस दिन तुलसी का प्रयोग कर सकते हैं?
उत्तर: जी हाँ, भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है, अतः पूजा में तुलसी दल का प्रयोग अनिवार्य है।

प्रश्न: व्रत में क्या खाना चाहिए?
उत्तर: सात्विक फलाहार जैसे दूध, दही, फल, कुट्टू का आटा और सेंधा नमक का प्रयोग करें।

प्रश्न: मोहिनी एकादशी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: यह व्रत मोह-माया के बंधनों से मुक्ति और आत्म-शुद्धि के लिए किया जाता है।

मोहिनी एकादशी 2027: आध्यात्मिक महत्व और पौराणिक पृष्ठभूमि

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को 'मोहिनी एकादशी' के नाम से जाना जाता है। सनातन धर्म में एकादशी का व्रत समस्त पापों का नाश करने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। वर्ष 2027 में मोहिनी एकादशी का व्रत अत्यंत विशेष है, क्योंकि यह तिथि भगवान विष्णु के उस मोहिनी स्वरूप को समर्पित है, जिसने असुरों के अहंकार को चूर-चूर कर देवताओं को अमृत का पान कराया था। यह व्रत न केवल भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मोह-माया के बंधनों से मुक्ति के लिए भी किया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब अमृत कलश निकला, तो असुरों ने उसे हथियाने का प्रयास किया। तब भगवान विष्णु ने अत्यंत सुंदर 'मोहिनी' रूप धारण किया। मोहिनी की माया में असुर इतने मोहित हो गए कि उन्होंने अमृत का कलश मोहिनी को सौंप दिया। मोहिनी ने अपनी चतुराई और दिव्य शक्ति से देवताओं को अमृत पिलाया और असुरों को वंचित रखा। मोहिनी एकादशी का व्रत इसी घटना की स्मृति में रखा जाता है, ताकि साधक भी भगवान की इस 'मोह' रूपी माया से ऊपर उठकर सत्य और धर्म के मार्ग पर चल सके।

इस व्रत का आध्यात्मिक दर्शन यह है कि संसार एक विशाल 'मोह' है। जिस प्रकार असुर मोहिनी के रूप पर मोहित होकर अपना लक्ष्य भूल गए थे, उसी प्रकार मनुष्य सांसारिक आकर्षणों में फंसकर अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य यानी 'मोक्ष' को भूल जाता है। मोहिनी एकादशी का व्रत हमें यह शिक्षा देता है कि यदि हम भगवान विष्णु की शरण में जाएं, तो वे अपनी माया (मोहिनी शक्ति) को हटाकर हमें आत्म-ज्ञान का मार्ग दिखा सकते हैं। यह व्रत मन की चंचलता को नियंत्रित करने और इंद्रियों को वश में करने का एक सशक्त माध्यम है।

मोहिनी एकादशी 2027: शुभ मुहूर्त एवं व्रत के नियम

वर्ष 2027 में मोहिनी एकादशी का व्रत विधि-विधान से संपन्न करना अत्यंत फलदायी है। पंचांग गणना के अनुसार, एकादशी तिथि का प्रारंभ और समापन समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। व्रत का संकल्प दशमी की रात्रि से ही प्रारंभ हो जाता है, जिसमें सात्विक भोजन और ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है। एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान-ध्यान के पश्चात व्रत का संकल्प लेना चाहिए।

विवरण समय/तिथि (वर्ष 2027)
मोहिनी एकादशी तिथि प्रारंभ 18 मई 2027, प्रातः 09:25 बजे
मोहिनी एकादशी तिथि समापन 19 मई 2027, प्रातः 11:10 बजे
व्रत पारण का समय 20 मई 2027, प्रातः 05:30 से 08:15 के मध्य

व्रत के नियमों में सबसे महत्वपूर्ण है 'अन्न का त्याग'। एकादशी के दिन चावल का सेवन पूर्णतः वर्जित माना गया है, क्योंकि मान्यता है कि चावल में जल तत्व की अधिकता होती है जो मन को चंचल बनाती है। व्रत के दौरान साधक को 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का निरंतर जाप करना चाहिए। यदि संभव हो, तो इस दिन भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप का ध्यान करते हुए विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए। रात्रि जागरण का भी इस व्रत में विशेष महत्व है, जिससे साधक की आध्यात्मिक ऊर्जा का संचय होता है।

पारण यानी व्रत खोलने की विधि भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी पूजा। द्वादशी तिथि के दिन सूर्योदय के पश्चात ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर और सात्विक भोजन कराकर ही स्वयं भोजन ग्रहण करना चाहिए। पारण के समय 'हरि वासर' का ध्यान रखना आवश्यक है। यदि एकादशी का व्रत बिना पारण विधि के समाप्त किया जाए, तो उसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। अतः, 20 मई 2027 को निर्धारित समय सीमा के भीतर ही व्रत का समापन करना श्रेयस्कर होगा।

विस्तृत पूजा विधि और भगवान विष्णु की आराधना

मोहिनी एकादशी की पूजा विधि में भगवान विष्णु के साथ-साथ लक्ष्मी जी की आराधना भी अनिवार्य है। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करने के बाद एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं। भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें और उन्हें पीले पुष्प, अक्षत, चंदन, तुलसी दल और नैवेद्य अर्पित करें। तुलसी दल भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, अतः पूजा में इसका प्रयोग अवश्य करें।

विशेष टिप: मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पीले फलों का भोग लगाएं और 'विष्णु चालीसा' का पाठ करें। इस दिन दान का विशेष महत्व है, अतः अपनी क्षमतानुसार निर्धनों को अन्न, वस्त्र या जल का दान अवश्य करें।

पूजा के दौरान 'मोहिनी एकादशी व्रत कथा' का श्रवण करना अनिवार्य है। कथा सुनने से मन में भक्ति का संचार होता है और व्रत के उद्देश्यों की पूर्ति होती है। कथा के पश्चात भगवान विष्णु की आरती करें और उनसे अपने समस्त पापों की क्षमा याचना करें। यह व्रत केवल उपवास नहीं, बल्कि एक आत्म-अनुशासन है। जो भक्त इस दिन पूर्ण श्रद्धा के साथ भगवान की सेवा करते हैं, उन्हें न केवल सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है, बल्कि मृत्यु के पश्चात वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।

अंत में, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि मोहिनी एकादशी का व्रत केवल शारीरिक शुद्धि के लिए नहीं है, बल्कि यह मानसिक और वैचारिक शुद्धि का पर्व है। इस दिन किसी भी प्रकार के क्रोध, लोभ, मोह और ईर्ष्या से दूर रहना चाहिए। वाणी पर संयम रखें और दूसरों की निंदा करने से बचें। भगवान विष्णु की कृपा से यह व्रत साधक के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। 2027 की यह एकादशी आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे, यही इस व्रत का परम लक्ष्य है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

यह लेख धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु व सनातन पंचांग परंपराओं के संदर्भों के आधार पर भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा संकलित किया गया है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा

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