गंगा दशहरा महापर्व 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा एवं आध्यात्मिक महत्व
गंगा दशहरा हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र महापर्व है, जो ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इ...
नृसिंह जयंती 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा एवं आध्यात्मिक महत्व
नृसिंह जयंती भगवान विष्णु के उग्र और रक्षक स्वरूप 'नृसिंह अवतार' के प्राकट्य का पावन उत्सव है। वैशाख मास के शुक्ल प...
मोहिनी एकादशी व्रत 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा एवं आध्यात्मिक महत्व
मोहिनी एकादशी वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार को समर्पित है...
श्री राम नवमी महापर्व 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा
श्री राम नवमी का महापर्व मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। चैत्र मास के ...
पापमोचिनी एकादशी व्रत 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा
पापमोचिनी एकादशी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह एकादशी समस्त पापों का नाश करने वाली और मोक्ष...
महाशिवरात्रि महापर्व 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा
महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का पावन पर्व है। यह रात्रि आध्यात्मिक जागृति, आत्म-शुद्धि और मोक्ष क...
जया एकादशी व्रत 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा एवं आध्यात्मिक महत्व
जया एकादशी माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और समस्त पापो...
मकर संक्रांति एवं पोंगल महापर्व 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा
मकर संक्रांति 2027 का महापर्व सूर्य देव के उत्तरायण होने का प्रतीक है, जो आध्यात्मिक ऊर्जा और नई शुरुआत का काल है। ...
देवउठनी एकादशी एवं तुलसी विवाह 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा
देवउठनी एकादशी, जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है, भगवान विष्णु के चार माह की योगनिद्रा से जागने का पावन पर्व है...
छठ पूजा महापर्व 2027: संपूर्ण विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत कथा एवं वैज्ञानिक महत्व
छठ पूजा, जिसे 'सूर्य षष्ठी' के नाम से भी जाना जाता है, प्रकृति, जल और सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का मह...
नरक चतुर्दशी (रूप चौदस / छोटी दिवाली) 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा
नरक चतुर्दशी, जिसे रूप चौदस और छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है, कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती ह...
रमा एकादशी व्रत 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं व्रत कथा
रमा एकादशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु के 'रमा' स्वरूप की आराधना के ल...
सनातन पर्व परंपरा एवं वैदिक काल-गणना का विज्ञान
सनातन हिंदू परंपरा में प्रत्येक पर्व और त्यौहार केवल सामाजिक उत्सव नहीं हैं, बल्कि वे सूर्य, चंद्रमा, नक्षत्रों और ऋतु संक्रमण के गहन खगोलीय सामंजस्य पर आधारित आध्यात्मिक विज्ञान हैं। वैदिक काल से ही हमारे ऋषियों ने मानव जीवन को प्रकृति के साथ लयबद्ध करने हेतु इन पावन पर्वों का निर्धारण किया है।
१. उदया तिथि एवं काल-व्यापिनी तिथि का शास्त्रीय नियम
धर्मसिंधु एवं निर्णयसिंधु ग्रंथों के अनुसार, हिंदू धर्म में पर्वों का निर्णय मुख्य रूप से दो प्रमुख आधारों पर होता है:
- उदया तिथि (Udaya Tithi): जिस तिथि में सूर्योदय होता है, दिनभर सामान्यतः उसी तिथि का प्रभाव माना जाता है (जैसे रामनवमी, कृष्ण जन्माष्टमी व्रत, दशहरा)।
- काल-विशिष्ट व्यापिनी तिथि (Kala Vyapini): कुछ पर्व विशिष्ट प्रहर में मनाए जाते हैं—जैसे दीपावली का लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल (सूर्यास्त उपरांत) में, महाशिवरात्रि का रुद्राभिषेक निशीथ काल (मध्यरात्रि) में, और करवा चौथ का पारण चंद्रोदय काल में। ऐसे में उस विशिष्ट काल में उपस्थित तिथि को ही ग्रहण किया जाता है।
२. लूनी-सोलर (Lunisolar) समन्वय और अधिकमास
सौर वर्ष ३६५.२४२ दिन का और चंद्र वर्ष ३५४.३६ दिन का होता है। प्रतिवर्ष आने वाले लगभग ११ दिनों के अंतर को संतुलित करने हेतु प्रत्येक ३२ माह १६ दिन (लगभग ३ वर्ष) में चंद्र वर्ष में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है, जिसे 'अधिकमास' या 'पुरुषोत्तम मास' कहा जाता है। इसी वैज्ञानिक सामंजस्य के कारण हिंदू त्यौहार हमेशा अपनी प्राकृतिक ऋतुओं के अनुसार ही आते हैं।