प्रमुख हिंदू त्योहार • वर्ष २०२७

करवा चौथ व्रत 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा एवं संपूर्ण शास्त्रीय मार्गदर्शिका

करवा चौथ का व्रत भारतीय नारी के अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु का प्रतीक है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला यह महापर्व प्रेम, त्याग और अटूट विश्वास की पराकाष्ठा है। इस लेख में जानें 2027 के लिए सटीक मुहूर्त, पूजा विधि, पौराणिक कथा और व्रत के शास्त्रीय नियम।

२० अक्टूबर २०२७, बुधवार तिथि व दिनांक
प्रमुख हिंदू त्योहार धार्मिक श्रेणी
५० कुल पाठक संख्या
४ मिनट पठन अवधि
महत्वपूर्ण सारांश: करवा चौथ का व्रत भारतीय नारी के अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु का प्रतीक है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला यह महापर्व प्रेम, त्याग और अटूट विश्वास की पराकाष्ठा है। इस लेख में जानें 2027 के लिए सटीक मुहूर्त, पूजा विधि, पौराणिक कथा और व्रत के शास्त्रीय नियम।
पावन पर्व तिथि एवं समय निर्धारण
पावन तिथि: कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी
प्रारंभ / मुख्य तिथि: २० अक्टूबर २०२७, बुधवार
शुभ मुहूर्त / समय: शाम 05:45 से 07:15 बजे तक
विशेष उत्सव क्षेत्र: संपूर्ण भारत
पावन सिद्ध मंत्र
ॐ गौरीशंकराय नमः

करवा चौथ 2027: अखंड सौभाग्य का महापर्व

करवा चौथ, जिसे 'कर्क चतुर्थी' के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में सुहागिन स्त्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। स्कंद पुराण और भविष्य पुराण के अनुसार, यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। यह केवल एक उपवास नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच के अटूट प्रेम और समर्पण का उत्सव है।

शास्त्रीय महत्व एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि

धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु के अनुसार, करवा चौथ का व्रत चंद्रमा की पूजा और शिव-पार्वती के परिवार की आराधना पर केंद्रित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था, जो करवा चौथ के व्रत के समान ही था। यह व्रत नारी शक्ति के उस संकल्प को दर्शाता है, जो अपने पति के जीवन की रक्षा के लिए यमराज से भी संघर्ष करने का साहस रखती है।

पंचांग एवं शुभ मुहूर्त (2027)

विवरणसमय/तिथि
तिथिकार्तिक कृष्ण चतुर्थी
पूजा का शुभ समयशाम 05:45 से 07:15 तक
चंद्रोदय का समयलगभग 08:20 (स्थान अनुसार भिन्न)
अभिजित मुहूर्तदोपहर 11:45 से 12:30

पूजा विधि एवं संकल्प

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान के बाद 'मम सुख सौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये' मंत्र के साथ संकल्प लें। दिन भर निर्जला रहकर शाम को गेरू से दीवार पर करवा का चित्र बनाएं। पूजा के लिए एक चौकी पर भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय की प्रतिमा स्थापित करें।

आवश्यक पूजा सामग्री

  • मिट्टी का करवा और ढक्कन
  • गंगाजल, धूप, दीप, चंदन, रोली, अक्षत
  • मिठाई, फल, ऋतुफल (सेब, केला)
  • श्रृंगार का सामान (बिंदी, चूड़ी, मेहंदी)
  • करवा चौथ व्रत कथा की पुस्तक

पौराणिक व्रत कथा: वीरवती की निष्ठा

प्राचीन काल में वीरवती नाम की एक पतिव्रता स्त्री थी। अपने भाइयों के आग्रह पर उसने चंद्रोदय से पूर्व ही भूख से व्याकुल होकर व्रत तोड़ दिया, जिसके परिणामस्वरूप उसके पति की मृत्यु हो गई। बाद में, उसने पुनः पूर्ण निष्ठा से करवा चौथ का व्रत किया, जिससे प्रसन्न होकर माता पार्वती ने उसके पति को पुनर्जीवित किया। यह कथा हमें सिखाती है कि श्रद्धा और विश्वास में कितनी शक्ति है।

व्रत के नियम एवं सावधानियां

व्रत के दौरान किसी भी प्रकार का अन्न या जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करें। पारण में सात्विक भोजन का ही प्रयोग करें। क्रोध, असत्य और कलह से दूर रहना इस व्रत की अनिवार्य शर्त है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. क्या गर्भवती महिलाएं यह व्रत रख सकती हैं? शास्त्रानुसार स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी गई है, अतः फलाहार के साथ व्रत रखा जा सकता है।
  2. चंद्रमा को अर्घ्य क्यों दिया जाता है? चंद्रमा को आयु और सौभाग्य का कारक माना गया है, उन्हें अर्घ्य देने से पति की आयु लंबी होती है।
  3. क्या व्रत के दौरान पानी पी सकते हैं? करवा चौथ का व्रत निर्जला (बिना जल के) रखा जाता है।
  4. पूजा में किस मंत्र का जाप करें? 'ॐ नमः शिवाय' या 'ॐ गौरीशंकराय नमः' का जाप करें।
  5. पारण का सही समय क्या है? चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के तुरंत बाद व्रत खोला जा सकता है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

यह लेख धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु व सनातन पंचांग परंपराओं के संदर्भों के आधार पर भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा संकलित किया गया है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा

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