प्रमुख हिंदू त्योहार • वर्ष २०२७

वट सावित्री व्रत 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा एवं संपूर्ण शास्त्रीय विधान

वट सावित्री व्रत अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु का प्रतीक है। यह पर्व ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाया जाता है, जिसमें वट वृक्ष की पूजा और सावित्री-सत्यवान की कथा का विशेष महत्व है। भक्तलोक के इस विस्तृत गाइड में जानें पूजा की संपूर्ण विधि, शुभ मुहूर्त और व्रत के शास्त्रीय नियम।

४ जून २०२७, शुक्रवार तिथि व दिनांक
प्रमुख हिंदू त्योहार धार्मिक श्रेणी
३५ कुल पाठक संख्या
४ मिनट पठन अवधि
महत्वपूर्ण सारांश: वट सावित्री व्रत अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु का प्रतीक है। यह पर्व ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाया जाता है, जिसमें वट वृक्ष की पूजा और सावित्री-सत्यवान की कथा का विशेष महत्व है। भक्तलोक के इस विस्तृत गाइड में जानें पूजा की संपूर्ण विधि, शुभ मुहूर्त और व्रत के शास्त्रीय नियम।
पावन पर्व तिथि एवं समय निर्धारण
पावन तिथि: ज्येष्ठ अमावस्या
प्रारंभ / मुख्य तिथि: ४ जून २०२७, शुक्रवार
शुभ मुहूर्त / समय: 04 जून 2027, प्रातः 06:00 से 10:30 बजे तक
विशेष उत्सव क्षेत्र: संपूर्ण भारत
पावन सिद्ध मंत्र
ॐ सावित्र्यै नमः। वटवृक्षाय नमः।

अखंड सौभाग्य का महाव्रत

सनातन धर्म में वट सावित्री व्रत का अत्यंत विशिष्ट स्थान है। स्कंद पुराण और भविष्य पुराण के अनुसार, यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सौभाग्य, सुख, समृद्धि और पति की दीर्घायु का वरदान लेकर आता है। ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को वट वृक्ष (बरगद) के नीचे बैठकर सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत 'वट सावित्री' के नाम से विख्यात हुआ।

शास्त्रीय महत्व एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि

वट वृक्ष को त्रिमूर्ति का प्रतीक माना गया है। स्कंद पुराण के अनुसार, वट वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और ऊपरी भाग में भगवान शिव का वास होता है। सावित्री ने इसी वृक्ष के नीचे बैठकर तपस्या की थी। यह व्रत न केवल पति की रक्षा के लिए है, बल्कि यह स्त्री शक्ति और संकल्प की विजय का प्रतीक भी है।

पंचांग एवं शुभ मुहूर्त (2027)

विवरणसमय/तिथि
तिथिज्येष्ठ अमावस्या
अमावस्या तिथि प्रारंभ03 जून 2027, 14:15 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त04 जून 2027, 16:20 बजे
अभिजित मुहूर्त11:45 से 12:38
अमृत कालप्रातः 09:15 से 10:45

पूजा सामग्री सूची

  • बांस का पंखा, लाल धागा (कलावा), कच्चा सूत।
  • धूप, दीप, घी, कपूर, माचिस।
  • अक्षत, रोली, सिंदूर, चंदन।
  • मौसमी फल (विशेषकर आम और लीची), मिठाई, गुड़, चने।
  • वट वृक्ष की कोमल पत्तियां, जल से भरा कलश।
  • सुहाग का सामान (बिंदी, चूड़ी, मेहंदी, सिंदूर)।

विधि-विधान एवं पूजन प्रक्रिया

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके पश्चात 'मम वैधव्य दोष परिहारार्थं सत्यवान सावित्री प्रीत्यर्थं वट सावित्री व्रतमहं करिष्ये' मंत्र का उच्चारण करते हुए संकल्प लें। वट वृक्ष के समीप जाकर जल अर्पित करें और विधि-विधान से पूजन करें। वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटकर सात बार परिक्रमा करें।

सावित्री-सत्यवान की दिव्य कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, भद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री ने सत्यवान को पति रूप में चुना था। नारद मुनि ने बताया था कि सत्यवान अल्पायु हैं। विवाह के कुछ समय बाद सत्यवान की मृत्यु हो गई। सावित्री ने अपने पति के प्राणों के लिए यमराज का पीछा किया और अपनी बुद्धिमानी व पतिव्रता धर्म से यमराज को प्रसन्न कर सत्यवान के प्राण वापस पाए।

व्रत के नियम एवं सावधानियां

व्रत के दौरान सात्विक आहार का पालन करें। निर्जला या फलाहारी व्रत रखें। वट वृक्ष की पूजा करते समय मन में पूर्ण श्रद्धा रखें। क्रोध, असत्य और कलह से दूर रहें। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के पश्चात चने और गुड़ खाकर करना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. प्रश्न: वट सावित्री व्रत कब है? उत्तर: 2027 में यह व्रत 04 जून को मनाया जाएगा।
  2. प्रश्न: वट वृक्ष की पूजा क्यों की जाती है? उत्तर: वट वृक्ष में त्रिमूर्ति का वास होता है और यह अक्षय वट के रूप में अमरता का प्रतीक है।
  3. प्रश्न: क्या कुंवारी कन्याएं यह व्रत रख सकती हैं? उत्तर: यह व्रत मुख्य रूप से सुहागिनों के लिए है, परंतु सौभाग्य प्राप्ति के लिए कन्याएं भी पूजा कर सकती हैं।
  4. प्रश्न: व्रत का पारण कैसे करें? उत्तर: अगले दिन प्रातः स्नान के बाद चने और गुड़ का सेवन करके व्रत खोलें।
  5. प्रश्न: पूजा में किन मंत्रों का जप करें? उत्तर: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' और 'सावित्र्यै नमः' का जप करें।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

यह लेख धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु व सनातन पंचांग परंपराओं के संदर्भों के आधार पर भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा संकलित किया गया है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा

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