श्री महामृत्युंजय संजीवन मंत्र - ॐ हौं जूं सः माम् पालय पालय सः जूं हौं सम्पूर्ण आरोग्य विधान
भावार्थ: हे भगवान शिव! आप मेरी रक्षा करें, मेरी रक्षा करें। मुझमें प्राण ऊर्जा का संचार कर मुझे पूर्ण आरोग्य प्रदान करें।
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: हे भगवान शिव! आप मेरी रक्षा करें, मेरी रक्षा करें। मुझमें प्राण ऊर्जा का संचार कर मुझे पूर्ण आरोग्य प्रदान करें।
भावार्थ: हे कामदेव! मैं आपको प्रणाम करता हूँ। मेरे जीवन में आकर्षण, प्रेम और सौंदर्य की ऊर्जा का संचार करें।
भावार्थ: माता त्रिपुरसुन्दरी जो वाग्भव, कामराज और शक्ति बीज से युक्त होकर साधक को समस्त ऐश्वर्य, ज्ञान और आनंद प्रदान करती हैं, उ…
भावार्थ: हे शरवण (सरकंडों के वन) में प्रकट होने वाले भगवान कार्तिकेय! आपको मेरा बारंबार नमस्कार है।
भावार्थ: माँ अन्नपूर्णा जगत की पालनकर्ता और पोषण प्रदायिनी हैं। उनके इस महामंत्र के स्मरण और जप से साधक के घर में कभी भी अन्न और …
भावार्थ: समस्त सर्पों, नागों तथा काल के परमेश्वर भगवान शिव को मेरा बारम्बार प्रणाम है।
भावार्थ: हे वाग्वादिनी (वाणी की देवी) मां सरस्वती, मुझको वाक् सिद्धि और तीव्र स्मरण शक्ति प्रदान करें। मेरी वाणी में दिव्यता और स…
भावार्थ: समस्त गुरुओं को मेरा कोटि-कोटि प्रणाम है, जो अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं।
भावार्थ: समस्त ऐश्वर्य, महालक्ष्मी स्वरूपा श्री राधा रानी को मेरा समर्पण है, जो कृष्ण प्राणप्रिया हैं।
भावार्थ: भगवान शिव के षडक्षर और पंचाक्षर मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' में सृष्टि के पाँचों महाभूतों (तत्वों) का रहस्य छिपा है। इसके नियमित…
भावार्थ: हे माँ बगलामुखी! सभी दुष्टों की वाणी, मुख और पैरों को स्तम्भित कर दीजिए, शत्रुओं का पूर्ण स्तम्भन हो।
भावार्थ: उन भगवान वासुदेव स्वरूप श्री धन्वंतरि को नमस्कार है, जिनके हाथों में अमृत कलश है, जो समस्त रोगों का नाश करने वाले हैं और…
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।