श्री नागचंद्रेश्वर मंत्र: कालसर्प दोष मुक्ति और नाग देवता की कृपा विधि
भावार्थ: हम नागराज नागचंद्रेश्वर को जानते हैं जो विषदंत धारी हैं, हम उनका ध्यान करते हैं। वे सर्प देवता हमें सत प्रेरणा और सन्मार…
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
अपनी अभीष्ट साधना एवं आवश्यकतानुसार अभीष्ट मंत्र श्रेणी का चयन करें।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: हम नागराज नागचंद्रेश्वर को जानते हैं जो विषदंत धारी हैं, हम उनका ध्यान करते हैं। वे सर्प देवता हमें सत प्रेरणा और सन्मार…
भावार्थ: हे माँ कूष्माण्डा! हम आपको बारंबार नमन करते हैं। आप हमें ज्ञान (ऐं), माया व ऊर्जा (ह्रीं), तथा आकर्षण व सिद्धि (क्लीं) प…
भावार्थ: हे दुष्टों का दलन करने वाले, धर्म की रक्षा करने वाले भगवान कल्कि आपको बारम्बार नमस्कार है।
भावार्थ: उन भगवान को नमस्कार है जो कूर्म (कछुआ) के रूप में प्रकट हुए हैं और संपूर्ण ब्रह्मांड को स्थिरता प्रदान करते हैं।
भावार्थ: जलचरों के स्वामी, महाबली और भगवान विष्णु के मत्स्य रूप को मेरा बारंबार नमन है।
भावार्थ: हम भगवान भास्कर (सूर्य) को जानते हैं, जो महान प्रकाश के स्रोत हैं, हम उनका ध्यान करते हैं। वह आदित्य (सूर्य देव) हमें बु…
भावार्थ: ॐ (परब्रह्म), ऐं (सरस्वती), ह्रीं (महालक्ष्मी), क्लीं (महाकाली), चामुण्डायै (चण्ड-मुण्ड विनाशिनी), विच्चे (ज्ञान प्रदान …
भावार्थ: ॐ (परम ब्रह्म), द्रां द्रीं द्रौं (शुक्र के बीज अक्षर), सः (शक्ति), शुक्राय (शुक्र देव के लिए), नमः (नमस्कार)। भावार्थ: …
भावार्थ: हे अखिल ब्रह्मांड की स्वामिनी माँ दुर्गा, आप तीनों लोकों की समस्त बाधाओं को शांत करने वाली हैं। आप मेरे शत्रुओं का विनाश…
भावार्थ: हे जातवेद (अग्निदेव), आप मेरे लिए उन महालक्ष्मी को बुलाएं जो स्वर्ण के समान कांति वाली हैं, जो हरिणी (मनोहर) हैं, जिन्हो…
भावार्थ: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सभी का पोषण करते हैं। जैसे एक पका हुआ खरबूजा अपनी बेल …
भावार्थ: हे माँ बगलामुखी! सभी दुष्टों की वाणी, मुख और पैरों को स्तम्भित कर दें, उनकी जिह्वा को कीलित कर दें और उनकी बुद्धि का विन…
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।