गायत्री मंत्र की महिमा: बुद्धि, तेज और आत्मिक शांति का महामंत्र
भावार्थ: ॐ (परब्रह्म), भूर्भुवः स्वः (तीनों लोकों में व्याप्त), तत् (उस), सवितुः (सूर्य देव), वरेण्यं (श्रेष्ठ), भर्गो (तेज), देव…
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: ॐ (परब्रह्म), भूर्भुवः स्वः (तीनों लोकों में व्याप्त), तत् (उस), सवितुः (सूर्य देव), वरेण्यं (श्रेष्ठ), भर्गो (तेज), देव…
भावार्थ: भगवान विष्णु जो इस संपूर्ण ब्रह्मांड के रूप में स्थित हैं, जो सर्वव्यापी हैं, जो यज्ञ के भोक्ता हैं, जो भूत, भविष्य और व…
भावार्थ: ॐ - परमात्मा का प्रतीक, शं - शनि देव का बीज मंत्र, शनैश्चराय - धीरे चलने वाले, नमः - नमन। अर्थ: धीरे चलने वाले शनि देव क…
भावार्थ: भगवान वासुदेव को नमस्कार है। वे भगवान हरि, जिनके चरण-कमल गरुड़ के पृष्ठ पर स्थित हैं, मेरी सर्वत्र रक्षा करें।
भावार्थ: रघुनाथ श्री राम का चरित्र सौ करोड़ विस्तार वाला है। इसका एक-एक अक्षर मनुष्यों के बड़े से बड़े पापों का नाश करने वाला है।
भावार्थ: उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अपनी अंतरात्मा में धारण करें। व…
भावार्थ: जो कुंद के फूल, चंद्रमा, हिम और हार के समान धवल (श्वेत) हैं, जिन्होंने शुभ्र वस्त्र धारण किए हैं, जिनके हाथ वीणा और वरदं…
भावार्थ: हे क्षीरसागर में निवास करने वाले, चक्र धारण करने वाले, शेषनाग की मणियों से सुशोभित दिव्य स्वरूप वाले, योगियों के स्वामी,…
भावार्थ: ॐ (परम ब्रह्म), शनैश्चराय (शनि देव को) विद्महे (हम जानते हैं), छायापुत्राय (छाया के पुत्र को) धीमहि (हम ध्यान करते हैं),…
भावार्थ: ब्रह्मा, विष्णु (मुरारि), शिव (त्रिपुरान्तकारी) के समान ही नवग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु…
भावार्थ: देवराज इंद्र द्वारा पूजित, जिनके चरण कमल पवित्र हैं, जो सर्प को यज्ञोपवीत के रूप में धारण करते हैं, जिनके मस्तक पर चंद्र…
भावार्थ: हे देवकी के पुत्र, हे गोविंद, हे वासुदेव, हे जगत के स्वामी! मुझे संतान प्रदान करें। हे कृष्ण, मैं आपकी शरण में आया हूँ।
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।