भगवान वराह प्रातः स्मरणीय मंत्र: अर्थ, विधि और संपूर्ण आरती
भावार्थ: ॐ (परब्रह्म), ऐं (सरस्वती बीज), ह्रीं (माया बीज), क्लीं (काम बीज), चामुण्डायै (चण्ड-मुण्ड विनाशिनी), विच्चे (ज्ञान प्रदा…
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: ॐ (परब्रह्म), ऐं (सरस्वती बीज), ह्रीं (माया बीज), क्लीं (काम बीज), चामुण्डायै (चण्ड-मुण्ड विनाशिनी), विच्चे (ज्ञान प्रदा…
भावार्थ: हे रुद्र! आपके क्रोध को नमस्कार है और आपके बाणों को भी नमस्कार है। यह मंत्र भगवान शिव के रौद्र और सौम्य दोनों रूपों की स…
भावार्थ: हे भगवान रुद्र! जो अघोर (शांत और सौम्य) हैं, जो अति अघोर (प्रलयकारी) हैं, और जो उन दोनों के बीच के घोर-घोरतर स्वरूप हैं,…
भावार्थ: हम त्रिनेत्रधारी (भगवान शिव/शक्ति) की आराधना करते हैं, जो सुगंधित हैं और हमारा पोषण करते हैं। जिस प्रकार ककड़ी पक जाने प…
भावार्थ: मैं उन भगवान वासुदेव धन्वंतरि को नमन करता हूँ, जो अपने हाथों में अमृत का कलश धारण किए हुए हैं, जो समस्त भयों का नाश करने…
भावार्थ: ऐं (ज्ञान), ह्रीं (माया/शक्ति), और श्रीं (लक्ष्मी/समृद्धि) के बीजों से युक्त, तीनों लोकों में सबसे सुंदर माता त्रिपुर सु…
भावार्थ: गुरु को आदेश, काली के पुत्र और शिव के दूत के माध्यम से माता त्रिपुर सुंदरी की दुहाई दी जाती है कि स्वर्ण और धन की वर्षा …
भावार्थ: मैं राहु देव को प्रणाम करता हूँ। 'रां' बीज मंत्र के माध्यम से उनकी ऊर्जा को संतुलित कर जीवन में शांति की प्रार्थना करता …
भावार्थ: हे मेधा की अधिष्ठात्री देवी गायत्री! आप हमारी बुद्धि को ग्रहण करें और हमारे चंचल मन को एकाग्रता (स्तम्भन) प्रदान करें ता…
भावार्थ: ॐ (परब्रह्म), हं (बीज मंत्र), हनुमते (हनुमान जी को), रुद्रात्मकाय (रुद्र के अंश स्वरूप), हुं फट् (अस्त्र मंत्र), स्वाहा …
भावार्थ: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सभी का पोषण करते हैं। जैसे एक पका हुआ खरबूजा अपनी बेल …
भावार्थ: ॐ (परम ब्रह्म), प्रां प्रीं प्रौं (शनिदेव के बीज अक्षर), सः (शक्ति), शनये (शनिदेव के लिए), नमः (नमस्कार)। भावार्थ: मैं श…
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।