हनुमान मूल मंत्र: अर्थ, जाप विधि और आध्यात्मिक महत्व
भावार्थ: ॐ (प्रणव), हं (बीज), हनुमते (हनुमान जी को), रुद्रात्मकाय (रुद्र के अंश), हुं फट् (अस्त्र मंत्र), स्वाहा (आहुति)। अर्थ: ह…
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: ॐ (प्रणव), हं (बीज), हनुमते (हनुमान जी को), रुद्रात्मकाय (रुद्र के अंश), हुं फट् (अस्त्र मंत्र), स्वाहा (आहुति)। अर्थ: ह…
भावार्थ: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और जो समस्त संसार का पोषण करते हैं। जैसे एक पका हुआ खरबूज…
भावार्थ: ॐ सूर्याय नमः का अर्थ है सूर्य देव को मेरा नमन। ॐ घृणिः सूर्य आदित्योम का अर्थ है हे प्रकाशमान सूर्य देव, आप ही आदित्य ह…
भावार्थ: जिनके जटा रूपी वन से बहने वाली जल की धारा ने स्थल को पवित्र कर दिया है, जिनके गले में विशाल सर्पों की माला लटक रही है, ज…
भावार्थ: हे मनुष्य! मेरी कृपा से तुम समस्त बाधाओं से मुक्त होकर धन, धान्य और पुत्र-पौत्रादि से संपन्न हो जाओगे, इसमें कोई संशय नह…
भावार्थ: भगवान विष्णु के शरीर पर पुलकित (रोमांचित) आभूषणों के समान सुशोभित होने वाली, तमाल वृक्ष पर मंडराती हुई भंवरी के समान प्र…
भावार्थ: हे रुद्र! आपके क्रोध को नमस्कार है, आपके बाणों को नमस्कार है। आप समस्त जगत के स्वामी हैं।
भावार्थ: ॐ (परम ब्रह्म), ऐं (सरस्वती बीज), सरस्वत्यै (ज्ञान की देवी को), नमः (नमस्कार)। वाग्देव्यै (वाणी की देवी) को हम जानते हैं…
भावार्थ: यह मंत्र देवी चामुंडा का बीज मंत्र है, जो वराह अवतार की शक्ति और पृथ्वी के उद्धार की ऊर्जा से संबंधित है। ऐं (सरस्वती), …
भावार्थ: ॐ (परम ब्रह्म), ह्रां ह्रीं ह्रौं सः (बीज अक्षर), सूर्याय (सूर्य देव को), नमः (नमस्कार)। सूर्य देव को मेरा नमन है।
भावार्थ: ॐ (परमात्मा), बृं (बीज मंत्र), बृहस्पतये (देवगुरु बृहस्पति को), नमः (नमस्कार)। हे गुरुदेव, आप ज्ञान और बुद्धि के अधिष्ठा…
भावार्थ: ॐ - प्रणव, नमो - नमस्कार, भगवते - ऐश्वर्यशाली, रुक्मिणीवल्लभाय - रुक्मिणी के प्रियतम, स्वाहा - आहुति। क्लीं - कामबीज, कृ…
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।