नारायण कवच: अर्थ, महत्व और संपूर्ण रक्षा कवच पाठ विधि
भावार्थ: भगवान हरि, जो गरुड़ की पीठ पर अपने चरण-कमल रखे हुए हैं, वे मेरी रक्षा करें। जिनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म है, ज…
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: भगवान हरि, जो गरुड़ की पीठ पर अपने चरण-कमल रखे हुए हैं, वे मेरी रक्षा करें। जिनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म है, ज…
भावार्थ: ॐ हनुमते नमः का अर्थ है हनुमान जी को नमन। ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् का अर्थ है भगवान शिव के अंशावतार हनुमान जी को…
भावार्थ: ॐ (परम ब्रह्म), गं (बीज मंत्र), गणपतये (गणों के स्वामी), नमः (नमस्कार)। अर्थ: हे गणों के स्वामी, मैं आपको नमन करता हूँ।
भावार्थ: ॐ (परब्रह्म), भूः (पृथ्वी), भुवः (अंतरिक्ष), स्वः (स्वर्ग)। उस सृष्टिकर्ता परमात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, जो हमार…
भावार्थ: जल के स्वामी वरुण देव को मेरा नमन है।
भावार्थ: हे भगवान दक्षिणामूर्ति! आप मुझे मेधा (धारण शक्ति) और प्रज्ञा (विवेक) प्रदान करें।
भावार्थ: हे चित्रगुप्त देव, आप धर्मराज के लेखपाल हैं, आपको मेरा नमन है। मेरे समस्त कर्मों को आप धर्म के मार्ग पर प्रतिष्ठित करें।
भावार्थ: उन भगवान देवर्षि नारद को नमस्कार है जो तीनों लोकों में संचार करते हैं, सभी प्रकार की बाधाओं का शमन करते हैं और भक्तों को…
भावार्थ: हे योगिनियों की स्वामिनी, योगेश्वरी और समस्त चराचर जगत को आकर्षित करने वाली माता पार्वती, मेरे मन की कामना पूर्ण करें और…
भावार्थ: हे अश्विनी कुमारों! आपको मेरा नमन है।
भावार्थ: सृष्टि के आदि स्रोत परमेश्वर स्वरूप हमारे समस्त दिव्य पितरों और पूर्वजों को मैं आदरपूर्वक नमन करता हूँ। वे हमें आशीर्वाद…
भावार्थ: हे राहु देव, मैं आपको नमन करता हूँ। आपके बीज मंत्रों के माध्यम से मैं आपकी कृपा और शांति की प्रार्थना करता हूँ।
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।