वैदिक नाद एवं मंत्र सागर सम्पूर्ण मंत्र संग्रह 108 जप काउंटर

सम्पूर्ण वैदिक मंत्र सूची एवं साधना निर्देशिका

सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।

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पावन मंत्र संग्रह (Mantra Directory)

शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।

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श्री कामधेनु माता (सुरभि) 70

श्री कामधेनु मंत्र: ॐ सुरभ्यै नमः - मनोकामना पूर्ति एवं पारिवारिक सुख-समृद्धि का गुप्त विधान

ॐ सुरभ्यै नमः

भावार्थ: समस्त देवताओं की जननी, पवित्रता की मूर्ति और समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली देवी सुरभि (कामधेनु) को मेरा नमस्कार है।

कार्तवीर्य अर्जुन 67

श्री कार्तवीर्य अर्जुन मंत्र - ॐ कार्तवीर्यार्जुनो नाम राजा बाहुसहस्रवान् खोई वस्तु व धन पुनर्प्राप्ति साधना

ॐ कार्तवीर्यार्जुनो नाम राजा बाहुसहस्रवान्। यस्य स्मरणमात्रेण हृतं नष्टं च लभ्यते॥

भावार्थ: सहस्र भुजाओं वाले राजा कार्तवीर्य अर्जुन का स्मरण करने मात्र से ही खोई हुई या चोरी हुई वस्तु पुनः प्राप्त हो जाती है।

माँ गायत्री एवं भगवान विष्णु 86

श्री गायत्री प्राण प्रतिष्ठा व सुरक्षा मंत्र - ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्ववस्थां गतोपि वा सम्पूर्ण शुद्धि व साधना कवच

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्ववस्थां गतोपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥

भावार्थ: जो व्यक्ति चाहे अपवित्र स्थिति में हो या पवित्र स्थिति में, अथवा किसी भी अवस्था को प्राप्त हो, जो भगवान पुण्डरीकाक्ष (वि…

माँ कात्यायनी 86

श्री कात्यायनी महामंत्र - ॐ कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि शीघ्र विवाह एवं मनोवांछित वर प्राप्ति

ॐ कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥

भावार्थ: हे महामाया, हे महायोगिनियों की अधीश्वरी मां कात्यायनी! आप नन्दगोप के सुत (श्रीकृष्ण) को जिस प्रकार अपनी पुत्री या भक्तों…

महर्षि अगस्त्य 90

श्री अगस्त्य सिद्ध मूल मंत्र - ॐ श्री अगस्त्याय नमः आरोग्य, आयु वृद्धि और समस्त बाधा निवारण महामंत्र

श्री अगस्त्य सिद्ध मूल मंत्र - ॐ श्री अगस्त्याय नमः आरोग्य, आयु वृद्धि और समस्त बाधा निवारण महामंत्र

भावार्थ: महर्षि अगस्त्य के सिद्ध मूल मंत्र 'ॐ श्री अगस्त्याय नमः' से आरोग्य, लंबी आयु और समस्त बाधाओं का निवारण करने की संपूर्ण व…

भगवान गणेश 79

श्री गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ

ॐ नमस्ते गणपतये। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि। त्वमेव केवलं कर्तासि। त्वमेव केवलं धर्तासि। त्वमेव केवलं हर्तासि। त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि…

भावार्थ: हे भगवान गणेश! आपको नमस्कार है। आप ही प्रत्यक्ष रूप से ब्रह्म तत्व हैं। आप ही केवल सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता …

भगवान श्री गणेश 68

Ganesh Atharvashirsha Path Kaise Kare

नमस्ते गणपतये। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि। त्वमेव केवलं कर्तासि। त्वमेव केवलं धर्तासि। त्वमेव केवलं हर्तासि। त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि। …

भावार्थ: हे गणपति भगवान! आपको नमस्कार है। आप ही प्रत्यक्ष तत्व हैं। आप ही केवल कर्ता, धर्ता और संहारक हैं। आप ही यह संपूर्ण ब्रह्…

भगवान गणेश 89

गणेश अथर्वशीर्ष पाठ हिंदी में लिखा हुआ - संपूर्ण विधि, अर्थ एवं पाठ

ॐ नमस्ते गणाधिपाय सर्वेश्वराय महाप्तये सर्वसिद्धये... (संपूर्ण पाठ नीचे एचटीएमएल खंड में उपलब्ध है)

भावार्थ: भगवान गणेश को ब्रह्मांड का सर्वोच्च ईश्वर, परम ब्रह्म और समस्त सिद्धियों का दाता स्वीकार करते हुए की गई अमोघ स्तुति।

माता महालक्ष्मी 121

Shri Suktam Path Ki Vidhi

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरससस्रजाम्। चन्द्रं हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

भावार्थ: हे जातवेद अग्नि! आप ऐसी सुवर्ण के समान कांति वाली, हरिणी, सोने और चांदी की मालाओं से अलंकृत, चंद्रमा के समान कांतिमान और…

केतु ग्रह देवता 131

कृष्ण मूल मंत्र एवं केतु ग्रह देवता के प्राचीन मंत्र

ॐ स्रां स्रीं सौं सः केतवे नमः

भावार्थ: ॐ ब्रह्म स्वरूप परमात्मा को नमस्कार है। स्रां स्रीं सौं सः (बीज मंत्र) केतु ग्रह की ऊर्जा और शक्ति के प्रतीक हैं। हे केत…

माँ प्रत्यंगिरा 148

श्री प्रत्यंगिरा देवी मंत्र - ॐ अपराजितायै विद्महे शत्रु निषूदिल्यै धीमहि तन्नो शक्तिः प्रचोदयात् घोर शत्रु बाधा व तंत्र दोष निवारण

ॐ अपराजितायै विद्महे शत्रु निषूदिल्यै धीमहि तन्नो शक्तिः प्रचोदयात्

भावार्थ: हम अपराजिता स्वरूपा माँ प्रत्यंगिरा को जानते हैं, शत्रुओं का नाश करने वाली देवी का ध्यान करते हैं। वह शक्ति स्वरूपा हमें…

माँ तारा 78

श्री तारा महाविद्या मंत्र - ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट् अमोघ संकट मुक्ति, धन लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति साधना

ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्

भावार्थ: हे माँ तारा, आप समस्त ब्रह्मांड की शक्ति हैं। आप मेरे अज्ञान, दरिद्रता और संकटों का विनाश करें और मुझे मोक्ष प्रदान करें…

वैदिक मंत्र विज्ञान, साधना विधि एवं 108 जप रहस्य

सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।

1. नाद और ध्वनि तरंगों का प्रभाव

संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।

2. 108 बार जप का खगोलीय रहस्य

वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।

मंत्र जप के तीन प्रमुख प्रकार (Types of Mantra Japa)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

भक्तिलोक पर प्रस्तुत समस्त मंत्र एवं साधना सामग्री उपलब्ध सनातन धर्मग्रंथों एवं परंपराओं के संदर्भ पर आधारित संपादकीय रूप से तैयार की गई है।
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