श्री महालक्ष्मी अष्टकम: अर्थ, स्तुति और स्थिर लक्ष्मी प्राप्ति विधि
भावार्थ: हे महामाये! श्रीपीठ पर स्थित और देवताओं द्वारा पूजित आपको नमस्कार है। शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली महालक्ष्मी! आपको म…
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: हे महामाये! श्रीपीठ पर स्थित और देवताओं द्वारा पूजित आपको नमस्कार है। शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली महालक्ष्मी! आपको म…
भावार्थ: ये 12 मंत्र सूर्य देव के विभिन्न गुणों और शक्तियों का आह्वान करते हैं। मित्र (मित्रता), रवि (प्रकाश), सूर्य (प्रेरक), भा…
भावार्थ: गुरुजी को मेरा आदेश (प्रणाम) है। सत्य नाम का निरंतर जाप करता हूँ। गुरु गोरखनाथ की शक्ति असीमित है, वे मेरी बार-बार रक्षा…
भावार्थ: गुरु के आदेश से मैं हनुमान जी का आह्वान करता हूँ। हे हनुमान जी, आप अपनी जंजीर से सभी नकारात्मक शक्तियों, भूत-प्रेत और दु…
भावार्थ: हे बटुक भैरव, आप मेरे समस्त कष्टों और आपदाओं का निवारण करें। हे बटुक, आप मेरे संकटों को दूर करने में सहायक हों।
भावार्थ: ॐ (प्रणव), नमो (नमस्कार), भगवते (भगवान को), महासुदर्शनाय (महान सुदर्शन चक्र को), दीप्त्रे (प्रकाशमान), ज्वालापरीताय (ज्व…
भावार्थ: हे तीन नेत्रों वाले भगवान शिव, हम आपकी पूजा करते हैं। आप सुगंधित हैं और जीवन का पोषण करने वाले हैं। जैसे एक पका हुआ खरबू…
भावार्थ: सिर झुकाकर गौरीपुत्र विनायक को प्रणाम करता हूँ। भक्तों के रक्षक भगवान गणेश का नित्य स्मरण करने से आयु, कामना और अर्थ की …
भावार्थ: भगवान हरि, जो गरुड़ की पीठ पर अपने चरण-कमल रखे हुए हैं, जिनके हाथों में शंख और चक्र सुशोभित हैं, वे मेरी रक्षा करें। वे …
भावार्थ: ॐ हनुमते नमः का अर्थ है हनुमान जी को नमन। ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् का अर्थ है रुद्र स्वरूप हनुमान को नमन जो शत्र…
भावार्थ: ॐ (परम सत्य), बृं (बीज मंत्र), बृहस्पतये (गुरु देव को), नमः (नमस्कार)। हे गुरु देव, आपको मेरा नमन है।
भावार्थ: ॐ सूर्याय नमः का अर्थ है सूर्य देव को मेरा नमन। ॐ घृणिः सूर्य आदित्योम का अर्थ है हे प्रकाशमान सूर्य देव, आप ही आदित्य ह…
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।