श्री नरसिंह मंत्र - ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम् अमोघ रक्षा कवच
भावार्थ: जो अत्यंत उग्र, वीर, महाविष्णु स्वरूप, प्रज्वलित अग्नि जैसे, सर्वतोमुख (सभी ओर मुख वाले), भीषण, कल्याणकारी और मृत्यु के …
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: जो अत्यंत उग्र, वीर, महाविष्णु स्वरूप, प्रज्वलित अग्नि जैसे, सर्वतोमुख (सभी ओर मुख वाले), भीषण, कल्याणकारी और मृत्यु के …
भावार्थ: समस्त विद्या और ज्ञान की देवी माँ सरस्वती को मेरा बारम्बार नमस्कार है। बीज मंत्र 'ऐं' वाग्बीज है जो वाणी और बुद्धि को जा…
भावार्थ: हे शनैश्चर देव! आपको मेरा नमस्कार है, आपके बीज मंत्र 'शं' से मेरा कल्याण हो।
भावार्थ: मैं उन भगवान भैरव को प्रणाम करता हूँ, जिनके बीज मंत्र 'भ्रं' के प्रभाव से ब्रह्मांड की सभी नकारात्मक शक्तियां और शत्रु प…
भावार्थ: हे आदिति पुत्र सूर्य देव! हम आपको जानते हैं और प्रभाकर (प्रकाश करने वाले) का ध्यान करते हैं। वह सूर्य देव हमारी बुद्धि क…
भावार्थ: राहु ग्रह की शांति और महाशक्ति चामुण्डा की कृपा प्राप्त करने का यह एक अत्यंत प्रभावशाली बीज मंत्र है, जो साधक के जीवन के…
भावार्थ: हे हरण करने वाले (दुखों और कर्म बंधनों के), हे कृष्ण (सर्वआकर्षक सच्चिदानंद स्वरूप), हे राम (परम आनंद के आधान), मुझ पर क…
भावार्थ: श्री राम तारक महामंत्र का अर्थ है कि हे सर्वव्यापक, रमणीय भगवान राम आपकी जय हो, आपकी अनन्य विजय हो। यह मंत्र भवसागर से त…
भावार्थ: मैं भगवान वासुदेव को सादर प्रणाम करता हूँ, जो इस सम्पूर्ण सृष्टि के स्वामी और पालनहार हैं।
भावार्थ: हे यक्षराज, कुबेर, वैश्रवण (विश्वश्रवा के पुत्र), समस्त धन और धान्य के आधिपत्य (स्वामी) आपको मेरा कोटि-कोटि प्रणाम है।
भावार्थ: भगवती महालक्ष्मी के त्रिबीजात्मक महामंत्र 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः' का शास्त्रोक्त साधना विधान, बीज मंत्रों…
भावार्थ: हम समस्त विघ्नों के निवारक, गणों के स्वामी श्री गणेश को नमस्कार करते हैं और उनके बीज मंत्र 'गं' का आह्वान करते हैं।
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।