वैदिक नाद एवं मंत्र सागर सम्पूर्ण मंत्र संग्रह 108 जप काउंटर

सम्पूर्ण वैदिक मंत्र सूची एवं साधना निर्देशिका

सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।

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पावन मंत्र संग्रह (Mantra Directory)

शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।

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भगवान श्री नरसिंह 38

श्री नरसिंह मंत्र - ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम् अमोघ रक्षा कवच

ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥

भावार्थ: जो अत्यंत उग्र, वीर, महाविष्णु स्वरूप, प्रज्वलित अग्नि जैसे, सर्वतोमुख (सभी ओर मुख वाले), भीषण, कल्याणकारी और मृत्यु के …

माता सरस्वती 59

श्री सरस्वती बीज मंत्र - ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः विद्या, ज्ञान व तीव्र स्मरण शक्ति प्राप्ति

ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः

भावार्थ: समस्त विद्या और ज्ञान की देवी माँ सरस्वती को मेरा बारम्बार नमस्कार है। बीज मंत्र 'ऐं' वाग्बीज है जो वाणी और बुद्धि को जा…

शनि देव 52

श्री शनि मूल मंत्र - ॐ शं शनैश्चराय नमः साढ़ेसाती व ढैय्या शांति का अमोघ उपाय

ॐ शं शनैश्चराय नमः

भावार्थ: हे शनैश्चर देव! आपको मेरा नमस्कार है, आपके बीज मंत्र 'शं' से मेरा कल्याण हो।

भगवान श्री कालभैरव 82

श्री कालभैरव मंत्र - ॐ भ्रं भैरवाय नमः सम्पूर्ण शत्रु नाशन व भय मुक्ति विधान

ॐ भ्रं भैरवाय नमः

भावार्थ: मैं उन भगवान भैरव को प्रणाम करता हूँ, जिनके बीज मंत्र 'भ्रं' के प्रभाव से ब्रह्मांड की सभी नकारात्मक शक्तियां और शत्रु प…

भगवान सूर्य नारायण 43

श्री सूर्य गायत्री मंत्र - ॐ आदित्याय विद्महे प्रभाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्

ॐ आदित्याय विद्महे प्रभाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्

भावार्थ: हे आदिति पुत्र सूर्य देव! हम आपको जानते हैं और प्रभाकर (प्रकाश करने वाले) का ध्यान करते हैं। वह सूर्य देव हमारी बुद्धि क…

राहु ग्रह देवता 47

राहु ग्रह देवता मूल मंत्र साधना: प्राचीन प्रामाणिक कथा

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

भावार्थ: राहु ग्रह की शांति और महाशक्ति चामुण्डा की कृपा प्राप्त करने का यह एक अत्यंत प्रभावशाली बीज मंत्र है, जो साधक के जीवन के…

भगवान श्री कृष्ण 47

श्री कृष्ण महामंत्र - हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे सम्पूर्ण भावार्थ व कीर्तन

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ॥

भावार्थ: हे हरण करने वाले (दुखों और कर्म बंधनों के), हे कृष्ण (सर्वआकर्षक सच्चिदानंद स्वरूप), हे राम (परम आनंद के आधान), मुझ पर क…

भगवान श्री राम 45

श्री राम तारक मंत्र: श्री राम जय राम जय जय राम अर्थ और महत्व

श्री राम जय राम जय जय राम

भावार्थ: श्री राम तारक महामंत्र का अर्थ है कि हे सर्वव्यापक, रमणीय भगवान राम आपकी जय हो, आपकी अनन्य विजय हो। यह मंत्र भवसागर से त…

भगवान विष्णु 42

श्री विष्णु द्वादशाक्षर मंत्र - ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सम्पूर्ण अर्थ, मोक्ष फल व विधि

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

भावार्थ: मैं भगवान वासुदेव को सादर प्रणाम करता हूँ, जो इस सम्पूर्ण सृष्टि के स्वामी और पालनहार हैं।

भगवान कुबेर 79

श्री कुबेर मंत्र - ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये नमः अष्ट लक्ष्मी व धन वृद्धि

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये नमः

भावार्थ: हे यक्षराज, कुबेर, वैश्रवण (विश्वश्रवा के पुत्र), समस्त धन और धान्य के आधिपत्य (स्वामी) आपको मेरा कोटि-कोटि प्रणाम है।

भगवती श्री महालक्ष्मी 62

श्री महालक्ष्मी बीज मंत्र - ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः धन-वैभव प्राप्ति विधान

श्री महालक्ष्मी बीज मंत्र - ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः धन-वैभव प्राप्ति विधान

भावार्थ: भगवती महालक्ष्मी के त्रिबीजात्मक महामंत्र 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः' का शास्त्रोक्त साधना विधान, बीज मंत्रों…

भगवान गणेश 54

श्री गणेश मूल मंत्र - ॐ गं गणपतये नमः सम्पूर्ण जप रहस्य, सिद्धि विधि एवं विघ्ननाश

ॐ गं गणपतये नमः

भावार्थ: हम समस्त विघ्नों के निवारक, गणों के स्वामी श्री गणेश को नमस्कार करते हैं और उनके बीज मंत्र 'गं' का आह्वान करते हैं।

वैदिक मंत्र विज्ञान, साधना विधि एवं 108 जप रहस्य

सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।

1. नाद और ध्वनि तरंगों का प्रभाव

संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।

2. 108 बार जप का खगोलीय रहस्य

वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।

मंत्र जप के तीन प्रमुख प्रकार (Types of Mantra Japa)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

भक्तिलोक पर प्रस्तुत समस्त मंत्र एवं साधना सामग्री उपलब्ध सनातन धर्मग्रंथों एवं परंपराओं के संदर्भ पर आधारित संपादकीय रूप से तैयार की गई है।
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