६+ पावन त्यौहार विक्रम संवत २०८३ शास्त्रसम्मत मुहूर्त व विधियां

सनातन त्यौहार एवं पर्व निर्देशिका २०२६

समस्त हिंदू व्रत, पावन पर्वों एवं उत्सवों की तिथिवार प्रामाणिक सूची, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व शास्त्रोक्त महत्व।

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प्रमुख हिंदू त्योहार १३
२४ दिसम्बर २०२६, गुरुवार

मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2026: दत्तात्रेय जयंती एवं चंद्र देव की विशेष उपासना विधि

मार्गशीर्ष पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन भगवान दत्तात्रेय का प्राकट्य ...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
प्रमुख हिंदू त्योहार २८
२९ अक्टूबर २०२६, गुरुवार

माँ अन्नपूर्णा महापूजा एवं अन्नकूट उत्सव 2027: संपूर्ण शुभ मुहूर्त, शास्त्रीय पूजा विधि, दिव्य व्रत कथा और भोग समर्पण

माँ अन्नपूर्णा महापूजा एवं अन्नकूट महोत्सव (2027): ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, आध्यात्मिक महत्व और सनातन परंपरा ...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
प्रमुख हिंदू त्योहार १५७
१७ नवम्बर २०२६, मंगलवार

छठ पूजा 2026: नहाय-खाय, खरना, अर्घ्य समय और संपूर्ण विधि

छठ पूजा महापर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का सबसे कठिन और पवित्र व्रत है। चार दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान ...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
प्रमुख हिंदू त्योहार १९०
१० नवम्बर २०२६, मंगलवार

गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट 2026: तिथि, मुहूर्त, 56 भोग, पूजा विधि और पौराणिक कथा

गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का महापर्व भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन पर्वत लीला और प्रकृति पूजा को समर्पित है। जानिए वर्ष ...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
प्रमुख हिंदू त्योहार १४२
०८ नवम्बर २०२६, रविवार

धनतेरस 2026: कुबेर लक्ष्मी पूजन, खरीदारी का शुभ मुहूर्त और यम दीपदान विधि

धनतेरस 2026 का पावन पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाएगा। इस विशेष दिन पर भगवान धन्वंतरि,...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
प्रमुख हिंदू त्योहार १४२
०१ जनवरी २०२६, गुरुवार

Hindu Festival 2026 Date And Muhurat 2023: संपूर्ण सनातन पंचांग, शुभ मुहूर्त एवं व्रत कथा मार्गदर्शिका

वर्ष 2026 के सभी हिंदू त्योहारों और व्रतों की संपूर्ण जानकारी। जानिए सनातन पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त, तिथियां और...

सम्पूर्ण विवरण व पूजा विधि
कुल ६ / ६ त्यौहार प्रदर्शित
समस्त उपलब्ध त्यौहार प्रदर्शित हो चुके हैं।

सनातन पर्व परंपरा एवं वैदिक काल-गणना का विज्ञान

सनातन हिंदू परंपरा में प्रत्येक पर्व और त्यौहार केवल सामाजिक उत्सव नहीं हैं, बल्कि वे सूर्य, चंद्रमा, नक्षत्रों और ऋतु संक्रमण के गहन खगोलीय सामंजस्य पर आधारित आध्यात्मिक विज्ञान हैं। वैदिक काल से ही हमारे ऋषियों ने मानव जीवन को प्रकृति के साथ लयबद्ध करने हेतु इन पावन पर्वों का निर्धारण किया है।

१. उदया तिथि एवं काल-व्यापिनी तिथि का शास्त्रीय नियम

धर्मसिंधु एवं निर्णयसिंधु ग्रंथों के अनुसार, हिंदू धर्म में पर्वों का निर्णय मुख्य रूप से दो प्रमुख आधारों पर होता है:

  • उदया तिथि (Udaya Tithi): जिस तिथि में सूर्योदय होता है, दिनभर सामान्यतः उसी तिथि का प्रभाव माना जाता है (जैसे रामनवमी, कृष्ण जन्माष्टमी व्रत, दशहरा)।
  • काल-विशिष्ट व्यापिनी तिथि (Kala Vyapini): कुछ पर्व विशिष्ट प्रहर में मनाए जाते हैं—जैसे दीपावली का लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल (सूर्यास्त उपरांत) में, महाशिवरात्रि का रुद्राभिषेक निशीथ काल (मध्यरात्रि) में, और करवा चौथ का पारण चंद्रोदय काल में। ऐसे में उस विशिष्ट काल में उपस्थित तिथि को ही ग्रहण किया जाता है।

२. लूनी-सोलर (Lunisolar) समन्वय और अधिकमास

सौर वर्ष ३६५.२४२ दिन का और चंद्र वर्ष ३५४.३६ दिन का होता है। प्रतिवर्ष आने वाले लगभग ११ दिनों के अंतर को संतुलित करने हेतु प्रत्येक ३२ माह १६ दिन (लगभग ३ वर्ष) में चंद्र वर्ष में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है, जिसे 'अधिकमास' या 'पुरुषोत्तम मास' कहा जाता है। इसी वैज्ञानिक सामंजस्य के कारण हिंदू त्यौहार हमेशा अपनी प्राकृतिक ऋतुओं के अनुसार ही आते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ: यह सामग्री वैदिक पंचांग, पुराणों एवं प्रतिष्ठित सनातन धर्मग्रंथों के उपलब्ध संदर्भों के आधार पर भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा शोधपरक रूप से तैयार की गई है।
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