श्री गुरु पादुका मंत्र - ॐ गुरुभ्यो नमः गुरु कृपा एवं आत्म साक्षात्कार मंत्र
भावार्थ: अज्ञान रूपी अंधकार का नाश करने वाले, अपने वास्तविक ब्रह्म स्वरूप का साक्षात्कार कराने वाले श्री गुरुदेव और उनकी पावन पाद…
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: अज्ञान रूपी अंधकार का नाश करने वाले, अपने वास्तविक ब्रह्म स्वरूप का साक्षात्कार कराने वाले श्री गुरुदेव और उनकी पावन पाद…
भावार्थ: हे महालक्ष्मी स्वरूपा श्री राधा जी! आपको मेरा नमस्कार है, मेरी समस्त साधना आपके चरणों में समर्पित हो।
भावार्थ: मैं भगवान शिव को नमस्कार करता हूँ, जो इस ब्रह्मांड के मूल और कल्याणकारी देवता हैं।
भावार्थ: हे माँ बगलामुखी! सभी दुष्टों की वाणी, मुख और चरणों को स्तम्भित कर दीजिए, उनके शत्रुकर्म को रोकिए, उनकी जिह्वा को कीलित क…
भावार्थ: सनातन संस्कृति में भगवान श्री धन्वंतरि को आयुर्वेद का आदि प्रवर्तक और आरोग्य का देवता माना गया है। श्री धन्वंतरि मंत्र क…
भावार्थ: मैं उन परम पराक्रमी, प्रज्वलित अग्नि के समान तेजोमय, सर्वव्यापी, अत्यंत भीषण किंतु भक्तों के लिए कल्याणकारी और मृत्यु की…
भावार्थ: परमपिता परमात्मा के प्रणव रूप तथा भगवती वाग्देवी के 'ऐं' वाग्बीज के साथ ज्ञान, कला और वाणी की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती क…
भावार्थ: इस मंत्र के प्रत्येक बीज अक्षर का विशेष अर्थ है। 'प्रां' प्राण ऊर्जा को जाग्रत करता है, 'प्रीं' प्रेम और समर्पण का प्रती…
भावार्थ: हे भैरव देव! आपको मेरा बारंबार प्रणाम है। मेरे जीवन के सभी शत्रुओं, बाधाओं और भयों का नाश करें।
भावार्थ: हे आदिति पुत्र सूर्य देव! हम आपको जानते हैं, हे प्रभाकर (प्रकाश देने वाले)! हम आपका ध्यान करते हैं। वह सूर्य देव हमारी ब…
भावार्थ: हे महामाया! वाग्देवी (ऐं), माया (ह्रीं) और कामराज (क्लीं) बीज मंत्रों से युक्त होकर आप चामुण्डा रूप में प्रकट हों और हमा…
भावार्थ: हे हरण करने वाले (दुखों को दूर करने वाले) और हे सर्वआकर्षक भगवान कृष्ण! हे आनंद के स्रोत भगवान राम! मुझ पर कृपा करें और …
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।