श्री राधा कृष्ण युगल मंत्र - ॐ श्रीं राधायै स्वाहा एवं युगल प्रेम रस साधना
भावार्थ: हे महालक्ष्मी स्वरूपा श्री राधा जी! आपको मेरा बारंबार नमन है, मैं अपनी ऊर्जा और भक्ति को आपके श्रीचरणों में समर्पित करता…
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: हे महालक्ष्मी स्वरूपा श्री राधा जी! आपको मेरा बारंबार नमन है, मैं अपनी ऊर्जा और भक्ति को आपके श्रीचरणों में समर्पित करता…
भावार्थ: मैं भगवान शिव को नमन करता हूँ, जो इस ब्रह्मांड के मूल आधार हैं।
भावार्थ: हे माँ बगलामुखी! सभी दुष्टों की वाणी, मुख और पैरों को स्तम्भित कर दीजिए, शत्रुओं का स्तम्भन कीजिए और उनकी बुद्धि का विना…
भावार्थ: भगवान वासुदेवरूप धन्वंतरि को नमस्कार है, जिनके हाथों में अमृत का कलश है, जो समस्त रोगों के नाशक और त्रिलोक के नाथ श्री म…
भावार्थ: जो अत्यंत उग्र, वीर, महाविष्णु स्वरूप, प्रदीप्त अग्नि की भांति चमकने वाले और सभी दिशाओं में मुख वाले हैं, उन भीषण तथा कल…
भावार्थ: सनातन संस्कृति में भगवती सरस्वती को विद्या, बुद्धि और चेतना की देवी माना गया है। 'ऐं' अक्षर माँ सरस्वती का मूल बीज मंत्र…
भावार्थ: श्री शनि मूल मंत्र 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' शनि देव की कृपा प्राप्त करने, साढ़ेसाती और ढैय्या के दुष्प्रभावों को शांत करने क…
भावार्थ: हे भैरव देव! आपको मेरा बारंबार प्रणाम है। मेरे जीवन के समस्त भयों, शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश करें।
भावार्थ: हम अदिति के पुत्र भगवान सूर्य को जानते हैं, प्रभाकर (प्रकाश करने वाले) का ध्यान करते हैं। वे सूर्य देव हमारी बुद्धि और च…
भावार्थ: हे माँ चामुण्डे! आप तीनों शक्तियों (सरस्वती, लक्ष्मी, काली) का प्रतिनिधित्व करती हैं। मेरे हृदय के आवरण को दूर कर मुझे ज…
भावार्थ: हे हरण करने वाले (दुखों और पापों को), हे सर्वआकर्षक भगवान कृष्ण! हे रमण करने वाले आनंदस्वरूप भगवान राम! कृपा करके मुझे अ…
भावार्थ: मैं बीज मंत्र 'रां' से युक्त भगवान श्री राम को सादर नमन करता हूँ, जो इस भवसागर से तारने वाले हैं।
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।