वैदिक नाद एवं मंत्र सागर सम्पूर्ण मंत्र संग्रह 108 जप काउंटर

सम्पूर्ण वैदिक मंत्र सूची एवं साधना निर्देशिका

सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।

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पावन मंत्र संग्रह (Mantra Directory)

शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।

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श्री राधा-कृष्ण 62

श्री राधा कृष्ण युगल मंत्र - ॐ श्रीं राधायै स्वाहा एवं युगल प्रेम रस साधना

ॐ श्रीं राधायै स्वाहा

भावार्थ: हे महालक्ष्मी स्वरूपा श्री राधा जी! आपको मेरा बारंबार नमन है, मैं अपनी ऊर्जा और भक्ति को आपके श्रीचरणों में समर्पित करता…

माँ बगलामुखी 130

श्री बगलामुखी मंत्र - ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय शत्रु स्तम्भन

ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय शत्रुन् स्तम्भय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा

भावार्थ: हे माँ बगलामुखी! सभी दुष्टों की वाणी, मुख और पैरों को स्तम्भित कर दीजिए, शत्रुओं का स्तम्भन कीजिए और उनकी बुद्धि का विना…

भगवान धन्वंतरि 56

श्री धन्वंतरि मंत्र - ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलशहस्ताय आरोग्य मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलशहस्ताय सर्वव्याधि विनाशाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णवे स्वाहा॥

भावार्थ: भगवान वासुदेवरूप धन्वंतरि को नमस्कार है, जिनके हाथों में अमृत का कलश है, जो समस्त रोगों के नाशक और त्रिलोक के नाथ श्री म…

भगवान श्री नरसिंह 46

श्री नरसिंह मंत्र - ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम् अमोघ रक्षा कवच

ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्योर्मुत्युं नमाम्यहम्॥

भावार्थ: जो अत्यंत उग्र, वीर, महाविष्णु स्वरूप, प्रदीप्त अग्नि की भांति चमकने वाले और सभी दिशाओं में मुख वाले हैं, उन भीषण तथा कल…

माता सरस्वती 66

श्री सरस्वती बीज मंत्र - ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः विद्या, ज्ञान व तीव्र स्मरण शक्ति प्राप्ति

श्री सरस्वती बीज मंत्र - ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः विद्या, ज्ञान व तीव्र स्मरण शक्ति प्राप्ति

भावार्थ: सनातन संस्कृति में भगवती सरस्वती को विद्या, बुद्धि और चेतना की देवी माना गया है। 'ऐं' अक्षर माँ सरस्वती का मूल बीज मंत्र…

भगवान श्री शनीश्वर (शनि देव) 52

श्री शनि मूल मंत्र - ॐ शं शनैश्चराय नमः साढ़ेसाती व ढैय्या शांति का अमोघ उपाय

श्री शनि मूल मंत्र - ॐ शं शनैश्चराय नमः साढ़ेसाती व ढैय्या शांति का अमोघ उपाय

भावार्थ: श्री शनि मूल मंत्र 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' शनि देव की कृपा प्राप्त करने, साढ़ेसाती और ढैय्या के दुष्प्रभावों को शांत करने क…

भगवान श्री कालभैरव 75

श्री कालभैरव मंत्र - ॐ भ्रं भैरवाय नमः सम्पूर्ण शत्रु नाशन व भय मुक्ति विधान

ॐ भ्रं भैरवाय नमः

भावार्थ: हे भैरव देव! आपको मेरा बारंबार प्रणाम है। मेरे जीवन के समस्त भयों, शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश करें।

भगवान सूर्य नारायण 48

श्री सूर्य गायत्री मंत्र - ॐ आदित्याय विद्महे प्रभाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्

ॐ आदित्याय विद्महे प्रभाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्।

भावार्थ: हम अदिति के पुत्र भगवान सूर्य को जानते हैं, प्रभाकर (प्रकाश करने वाले) का ध्यान करते हैं। वे सूर्य देव हमारी बुद्धि और च…

माँ दुर्गा 71

माँ दुर्गा नवार्ण मंत्र - ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे सम्पूर्ण 9 शक्ति रहस्य व सिद्धि

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

भावार्थ: हे माँ चामुण्डे! आप तीनों शक्तियों (सरस्वती, लक्ष्मी, काली) का प्रतिनिधित्व करती हैं। मेरे हृदय के आवरण को दूर कर मुझे ज…

भगवान श्री कृष्ण 52

श्री कृष्ण महामंत्र - हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे सम्पूर्ण भावार्थ व कीर्तन

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ॥

भावार्थ: हे हरण करने वाले (दुखों और पापों को), हे सर्वआकर्षक भगवान कृष्ण! हे रमण करने वाले आनंदस्वरूप भगवान राम! कृपा करके मुझे अ…

भगवान श्री राम 64

श्री राम तारक मंत्र - ॐ रां रामाय नमः एवं राम नाम की अनंत महिमा व जप रहस्य

ॐ रां रामाय नमः

भावार्थ: मैं बीज मंत्र 'रां' से युक्त भगवान श्री राम को सादर नमन करता हूँ, जो इस भवसागर से तारने वाले हैं।

वैदिक मंत्र विज्ञान, साधना विधि एवं 108 जप रहस्य

सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।

1. नाद और ध्वनि तरंगों का प्रभाव

संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।

2. 108 बार जप का खगोलीय रहस्य

वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।

मंत्र जप के तीन प्रमुख प्रकार (Types of Mantra Japa)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

भक्तिलोक पर प्रस्तुत समस्त मंत्र एवं साधना सामग्री उपलब्ध सनातन धर्मग्रंथों एवं परंपराओं के संदर्भ पर आधारित संपादकीय रूप से तैयार की गई है।
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