श्री विष्णु द्वादशाक्षर मंत्र - ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सम्पूर्ण अर्थ, मोक्ष फल व विधि
भावार्थ: भगवान वासुदेव भगवत्ता से युक्त उन परमात्मा को मेरा बारंबार प्रणाम है।
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: भगवान वासुदेव भगवत्ता से युक्त उन परमात्मा को मेरा बारंबार प्रणाम है।
भावार्थ: यक्षों के आधिपत्य, धन के संरक्षक और वैश्रवण भगवान कुबेर को हमारा प्रणाम है, जो हमें धन और धान्य प्रदान करते हैं।
भावार्थ: समस्त ऐश्वर्य, आकर्षण और धन की अधिष्ठात्री माता महालक्ष्मी को मेरा बारंबार नमस्कार है।
भावार्थ: समस्त विघ्नों के हर्ता, गणों के स्वामी श्री गणेश को मेरा बारंबार नमस्कार है।
भावार्थ: हे हनुमान जी! आपको मेरा बारंबार नमस्कार है। आपके बीज मंत्र 'हं' के माध्यम से मैं आपकी शरण में हूँ।
भावार्थ: उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक देवस्वरूप परमात्मा का हम ध्यान करते हैं। वह परमात्मा हमार…
भावार्थ: हम तीन नेत्रों वाले त्रयम्बक (शिव) की पूजा करते हैं, जो सुगंधित और संपूर्ण जगत का पोषण करने वाले हैं। जैसे ककड़ी अपनी बे…
भावार्थ: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो हर श्वास में सुगंध फैलाते हैं और हमारे जीवन को पोषण देते हैं। जिस प्र…
भावार्थ: ॐ (परब्रह्म), द्रां (दत्तात्रेय बीज), दत्तात्रेयाय (भगवान दत्तात्रेय के लिए), नमः (नमस्कार)। भावार्थ: मैं भगवान दत्तात्र…
भावार्थ: ॐ (परब्रह्म), हं (बीज मंत्र), हनुमते (हनुमान जी को), रुद्रात्मकाय (रुद्र के अंश स्वरूप), हुं फट् (अस्त्र मंत्र), स्वाहा …
भावार्थ: हनुमान जी का ऋणहर्ता मंत्र कर्ज के बोझ से दबे व्यक्तियों के लिए एक दिव्य औषधि है। इस मंत्र के निरंतर जाप से आर्थिक बाधाए…
भावार्थ: ॐ (परब्रह्म), द्रां (दत्तात्रेय बीज), दत्तात्रेयाय (भगवान दत्तात्रेय के लिए), नमः (नमस्कार)। भावार्थ: मैं भगवान दत्तात्र…
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।