अपनी चंद्र राशि व लक्षणों से जांचें
अपनी राशि चुनें और 3 सामान्य प्रश्नों के उत्तर देकर जानें कि वर्तमान में आप पर शनि साढ़े साती, मांगलिक या पितृ दोष का कितना प्रभाव हो सकता है।
वैदिक दोष विश्लेषण की वैज्ञानिक प्रक्रिया
सनातन ज्योतिष में 'दोष' का अर्थ कोई अभिशाप नहीं, अपितु आत्मा के पूर्व संचित कर्मों की ऊर्जा दिशा है। सही मंत्र जप, दान और आचरण शुद्धि से किसी भी दोष के प्रभाव को न्यूनतम किया जा सकता है।
👈 बाईं ओर अपनी राशि चुनकर तुरंत जांचेंगुरु चांडाल दोष (Guru Chandal Dosha)
विवेक, धर्म निष्ठा एवं बौद्धिक शुद्धि का शास्त्रोक्त उपायपरिभाषा एवं शास्त्रीय आधार
जन्म कुंडली के किसी भी भाव में शुभ ग्रह देवगुरु बृहस्पति और छाया ग्रह राहु की युति होने पर गुरु चांडाल योग बनता है। इससे ज्ञान, धर्म और नैतिकता की दिशा भ्रमित हो सकती है।
प्रमुख लक्षण एवं पहचान:
- निर्णय लेने में बार-बार भ्रम, गुरुजनों व संतों के प्रति अनादर की भावना।
- शिक्षा, उच्च अध्ययन एवं करियर में अचानक अप्रत्याशित बाधाएं।
- पाचन तंत्र, यकृत (Liver) या पेट संबंधी रोग।
- आध्यात्मिक साधना में मन न लगना या नास्तिकता की ओर झुकाव।
शास्त्रोक्त अचूक निवारण उपाय (Remedies)
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः (नित्य १०८ बार)।
विष्णु सहस्रनाम एवं गुरु स्तोत्र का पाठ।
चने की दाल, पीले वस्त्र, बेसन के लड्डू, हल्दी, धार्मिक पुस्तकें व स्वर्ण का दान।
गुरुवार को भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी का केसर-हल्दी से पूजन।